Ratha Saptami Vrat Katha in Hindi

Ratha Saptami is also famous as- Achala Saptami, Surya Jayanti and Magha Saptami. As per Hindu narrations, Ratha Saptami Vrat katha is basically a mythological tale of a lady- Indumati and Lord Surya. Read the full ancient story in Hindi.

Ratha Saptami

Ratha Saptami Vrat Katha सप्तमी व्रत कथा:

 

भविष्य पुराण में एक कथा है कि एक गणिका इन्दुमति ने अपने जीवन में कभी कोई दान-पुण्य नहीं किया था। इसे जब अपने अंत समय का ख्याल आया तो वशिष्ठ मुनि के पास गयी और वशिष्ठ मुनि से मुक्ति पाने का उपाय पूछने लगी तब मुनि ने उत्तर में गणिका से कहा- माघ मास की सप्तमी को अचला सप्तमी का व्रत (Achala Saptami Vrat) करो। इसके लिए षष्ठी के दिन एक ही बार भोजन करो और सप्तमी की सुबह स्नान के पूर्व आक के सात पत्ते सिर पर रखें और सूर्य का ध्यान करके गन्ने से जल को हिला कर ‘नमस्ते रुद्ररूपाय रसानां पतये नम:। वरुणाय नमस्तेsस्तु।’ मंत्र का उच्चारण करने के बाद दीप को जल में बहा दें।

स्नान के उपरांत सूर्य की अष्टदली प्रतिमा बना कर शिव और पार्वती को स्थापित करें और विधिपूर्वक पूजन कर तांबे के पात्र में चावल भर कर दान करें। गणिका इन्दुमति ने मुनि के कथनानुसार माघ सप्तमी का व्रत किया। इसके पुण्य से शरीर त्याग के बाद इन्द्र ने उसे अप्सराओं की नायिका बना दिया। जो लोग नदी में स्नान नहीं कर सकते, वे पानी में गंगाजल डाल के स्नान कर सकते हैं।

एक अन्य कथा के अनुसार भगवान श्री कृष्णजी के पुत्र शाम्ब को अपने बल और शारीरिक सुंदरता का अभिमान हो गया था।  एक बार दुर्वासा ऋषि श्री कृष्ण से मिलने आये थे उस समय दुर्वासा ऋषि का शरीर बहुत ही दुबला हो गया था क्योकि वह कठिन तप में लम्बे समय से लीन थे। ऋषि को देखकर शाम्ब को हंसी आ गयी। स्वभाव से ही क्रोधी ऋषि को शाम्ब की धृष्ठता पर क्रोध आ गया और उन्होंने शाम्ब को कुष्ठ होने का श्राप दे दिया। ऋषि  के श्राप का प्रभाव तुरंत ही हो गया। उपचार से  जब कोई लाभ नहीं हुआ तब श्री कृष्ण ने शाम्ब को सूर्योपासना  करने की सलाह दी शीघ्र ही सूर्योपासना से शाम्ब कुष्ट रोग से छुटकारा मिल गया।

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