The ekadashi that comes between Holika Dahan and Chaitra Navaratri is called Papamochani Ekadashi. This year Papamochani Ekadashi is on Friday 31 March 2019. It has been said that if a person wishes to atone for his sins inadvertently, then this ekadashi is the best day for him. Here is vrat katha of papamochani ekadashi in Hindi.


Papamochani Ekadashi Vrat Katha in Hindi

भविष्य पुराण की कथा के अनुसार भगवान अर्जुन से कहते हैं, राजा मान्धाता ने एक समय में लोमश ऋषि से जब पूछा। हे प्रभु! यह बताएं कि मनुष्य जो जाने अनजाने में पाप कर्म करता है वह उससे कैसे मुक्त हो सकता है। राजा मान्धाता के इस प्रश्न के जवाब में लोमश ऋषि ने राजा को एक कहानी सुनाई कि चैत्ररथ नामक सुन्दर वन में च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी ऋषि तपस्या पूरे लीन थे। इस वन में एक दिन मंजुघोषा नाम की अप्सरा की नजर ऋषि पर पड़ी तो वह उनपर मोहित हो गयी और उन्हें अपनी ओर आकर्षित करने हेतु प्रयत्न करने लगी। कामदेव भी उस समय उस वन से गुजर रहे थे। इसी क्रम में उनकी नजर अप्सरा पड़ी। वह उसकी मनोभावना को समझते हुए उसकी सहायता करने लगे। अप्सरा अपने प्रयत्न में सफल हुई और ऋषि वासना के प्रति आकर्षित हो गए। काम के वश में होकर ऋषि शिव की तपस्या का व्रत भूल गए और अप्सरा के साथ रमण-गमन करने लगे। कई वर्षों के बाद जब उनकी चेतना जगी तो उन्हें एहसास हुआ कि वह शिव की तपस्या से विरत हो चुके हैं।

तब उन्हें उस अप्सरा पर बहुत क्रोध हुआ और तपस्या भंग करने का दोषी जानकर ऋषि ने अप्सरा को श्राप दे दिया कि तुम पिशाचिनी बन जाओ। श्राप से दु:खी होकर वह ऋषि के पैरों पर गिर पड़ी और श्राप से मुक्ति के लिए अनुनय-विनय करने लगी।

मेधावी ऋषि ने तब उस अप्सरा को विधि-पूर्वक चैत्र कृष्ण एकादशी का व्रत करने के लिए कहा। भोग में निमग्न रहने के कारण ऋषि का तेज भी लोप हो गया था अत: ऋषि ने भी इस एकादशी का व्रत किया जिससे उनके पाप नष्ट हो गए। उधर अप्सरा भी इस व्रत के प्रभाव से पिशाच योनि से मुक्त हो गयी और उसे सुन्दर रूप प्राप्त हुआ। जिसके बाद वह अप्सरा स्वर्ग के लिए प्रस्थान कर गई।


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