Each month there are two Ekadashi which come during the Shukla Paksha and the Krishna Paksha. The significance of Ekadashi is also explained in Skanda Purana and Padam Purana. Kartik month's Krishna Paksha Ekadashi is known as Rama Ekadashi. This Ekadashi is also called Rambha Ekadashi. On this day Lord Keshav is the law of distribution of offerings to Pujan, Naivedya and Aarti with all things. On the day of Ekadashi, after reading the Vishnu Sahasranama, Lord Vishnu gets the special grace that is kept from sunset to Ekadashi before the ekadashi date, till the next sunrise. Rama Ekadashi is given the Dakshina to Brahmins. In 2019, Rama ekadashi falls on 24th October.



Rama Ekadashi Vrat Katha 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में मुकुंद नामक एक धर्मात्मा और दानी राजा था। प्रजा उन्हें भगवान के तुल्य मानते थे। राजा मुकुंद वैष्णव सम्प्रदाय को मानता था। अतः राजा नियमित और श्रद्धा-पूर्वक भगवान विष्णु जी का पूजन किया करता था। राजा के अति भक्ति से प्रभावित होकर प्रजा भी एकादशी व्रत करने लगी। कुछ समय पश्चात राजा के घर एक पुत्री का जन्म हुआ। जो अत्यंत शील और गुणवान थी। राजा ने अपनी पुत्री का नाम चन्द्रभागा रखा। समय के साथ चन्द्रभागा बड़ी हो गई। तत्पश्चात राजा ने चन्द्रभागा का विवाह राजा चंद्रसेन के पुत्र शोभन से कर दी।चन्द्रभागा अपने पति के साथ ससुराल में रहने लगी। विवाह के पश्चात प्रथम एकादशी को चन्द्रभागा अपने पति को भी एकादशी व्रत करने को कहती है। शोभन की अति हठ के परिणाम स्वरूप शोभन भी एकादशी व्रत व् उपवास करता है। किन्तु एकादशी तिथि के मध्य काल में शोभन को भूख लग जाती है। शोभन भूख से व्याकुल हो तड़पने लगता है कुछ समय में शोभन की मृत्यु हो जाती है। मृत्यु उपरांत शोभन मंदराचल पर्वत पर स्थित देवनगरी राज का राजा बनता है। देवनगरी में राजा शोभन की सेवा हेतु अनेक अप्सराएं उपस्थित रहती है। चन्द्रभागा अपने पति की मृत्यु के उपरांत भी एकादशी व्रत को श्रद्धा-पूर्वक करती है। एक दिन राजा मुकुंद अपने सैनिको के साथ देवनगरी भ्रमण को जाते है। देवनगरी में शोभन को देखकर राजा मुकुंद अति प्रसन्न होते है।


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