पहलेसाईकेचरणोंमें, अपनाशीशनमाऊंमैं

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॥चौपाई॥

पहलेसाईकेचरणोंमें, अपनाशीशनमाऊंमैं।

कैसेशिरडीसाईआए, साराहालसुनाऊंमैं॥


कौनहैमाता, पिताकौनहै, येनकिसीनेभीजाना।

कहांजन्मसाईनेधारा, प्रश्नपहेलीरहाबना॥


कोईकहेअयोध्याके, येरामचंद्रभगवानहैं।

कोईकहतासाईबाबा, पवनपुत्रहनुमानहैं॥


कोईकहतामंगलमूर्ति, श्रीगजानंदहैंसाई।

कोईकहतागोकुलमोहन, देवकीनन्दनहैंसाई॥


शंकरसमझेभक्तकईतो, बाबाकोभजतेरहते।

कोईकहअवतारदत्तका, पूजासाईकीकरते॥


कुछभीमानोउनकोतुम, परसाईहैंसच्चेभगवान।

बड़ेदयालुदीनबन्धु, कितनोंकोदियाजीवनदान॥


कईवर्षपहलेकीघटना, तुम्हेंसुनाऊंगामैंबात।

किसीभाग्यशालीकी, शिरडीमेंआईथीबारात॥


आयासाथउसीकेथा, बालकएकबहुतसुन्दर।

आया, आकरवहींबसगया, पावनशिरडीकियानगर॥


कईदिनोंतकभटकता, भिक्षामाँगउसनेदर-दर।

औरदिखाईऐसीलीला, जगमेंजोहोगईअमर॥


जैसे-जैसेअमरउमरबढ़ी, बढ़तीहीवैसेगईशान।

घर-घरहोनेलगानगरमें, साईबाबाकागुणगान॥10॥


दिग्-दिगन्तमेंलगागूंजने, फिरतोसाईंजीकानाम।

दीन-दुखीकीरक्षाकरना, यहीरहाबाबाकाकाम॥


बाबाकेचरणोंमेंजाकर, जोकहतामैंहूंनिर्धन।

दयाउसीपरहोतीउनकी, खुलजातेदुःखकेबंधन॥


कभीकिसीनेमांगीभिक्षा, दोबाबामुझकोसंतान।

एवंअस्तुतबकहकरसाई, देतेथेउसकोवरदान॥


स्वयंदुःखीबाबाहोजाते, दीन-दुःखीजनकालखहाल।

अन्तःकरणश्रीसाईका, सागरजैसारहाविशाल॥


भक्तएकमद्रासीआया, घरकाबहुतब़ड़ाधनवान।

मालखजानाबेहदउसका, केवलनहींरहीसंतान॥


लगामनानेसाईनाथको, बाबामुझपरदयाकरो।

झंझासेझंकृतनैयाको, तुम्हींमेरीपारकरो॥


कुलदीपककेबिनाअंधेरा, छायाहुआघरमेंमेरे।

इसलिएआयाहूँबाबा, होकरशरणागततेरे॥


कुलदीपककेअभावमें, व्यर्थहैदौलतकीमाया।

आजभिखारीबनकरबाबा, शरणतुम्हारीमैंआया॥


देदोमुझकोपुत्र-दान, मैंऋणीरहूंगाजीवनभर।

औरकिसीकीआशानमुझको, सिर्फभरोसाहैतुमपर॥


अनुनय-विनयबहुतकीउसने, चरणोंमेंधरकेशीश।

तबप्रसन्नहोकरबाबाने ,दियाभक्तकोयहआशीश॥20॥


'अल्लाभलाकरेगातेरा' पुत्रजन्महोतेरेघर।

कृपारहेगीतुझपरउसकी, औरतेरेउसबालकपर॥


अबतकनहींकिसीनेपाया, साईकीकृपाकापार।

पुत्ररत्नदेमद्रासीको, धन्यकियाउसकासंसार॥


तन-मनसेजोभजेउसीका, जगमेंहोताहैउद्धार।

सांचकोआंचनहींहैंकोई, सदाझूठकीहोतीहार॥


मैंहूंसदासहारेउसके, सदारहूँगाउसकादास।

साईजैसाप्रभुमिलाहै, इतनीहीकमहैक्याआस॥


मेराभीदिनथाएकऐसा, मिलतीनहींमुझेरोटी।

तनपरकप़ड़ादूररहाथा, शेषरहीनन्हींसीलंगोटी॥


सरितासन्मुखहोनेपरभी, मैंप्यासाकाप्यासाथा।

दुर्दिनमेरामेरेऊपर, दावाग्नीबरसाताथा॥


धरतीकेअतिरिक्तजगतमें, मेराकुछअवलम्बनथा।

बनाभिखारीमैंदुनियामें, दर-दरठोकरखाताथा॥


ऐसेमेंएकमित्रमिलाजो, परमभक्तसाईकाथा।

जंजालोंसेमुक्तमगर, जगतीमेंवहभीमुझसाथा॥


बाबाकेदर्शनकीखातिर, मिलदोनोंनेकियाविचार।

साईजैसेदयामूर्तिके, दर्शनकोहोगएतैयार॥


पावनशिरडीनगरमेंजाकर, देखमतवालीमूरति।

धन्यजन्महोगयाकिहमने, जबदेखीसाईकीसूरति॥30॥


जबसेकिएहैंदर्शनहमने, दुःखसाराकाफूरहोगया।

संकटसारेमिटैऔर, विपदाओंकाअन्तहोगया॥


मानऔरसम्मानमिला, भिक्षामेंहमकोबाबासे।

प्रतिबिम्बितहोउठेजगतमें, हमसाईकीआभासे॥


बाबानेसन्मानदियाहै, मानदियाइसजीवनमें।

इसकाहीसंबललेमैं, हंसताजाऊंगाजीवनमें॥


साईकीलीलाकामेरे, मनपरऐसाअसरहुआ।

लगताजगतीकेकण-कणमें, जैसेहोवहभराहुआ॥


'काशीराम' बाबाकाभक्त, शिरडीमेंरहताथा।

मैंसाईकासाईमेरा, वहदुनियासेकहताथा॥


सीकरस्वयंवस्त्रबेचता, ग्राम-नगरबाजारोंमें।

झंकृतउसकीहृदयतंत्रीथी, साईकीझंकारोंमें॥


स्तब्धनिशाथी, थेसोय, रजनीआंचलमेंचाँदसितारे।

नहींसूझतारहाहाथकोहाथतिमिरकेमारे॥


वस्त्रबेचकरलौटरहाथा, हाय !हाटसेकाशी।

विचित्रब़ड़ासंयोगकिउसदिन, आताथाएकाकी॥


घेरराहमेंख़ड़ेहोगए, उसेकुटिलअन्यायी।

मारोकाटोलूटोइसकीही, ध्वनिप़ड़ीसुनाई॥


लूटपीटकरउसेवहाँसेकुटिलगएचम्पतहो।

आघातोंमेंमर्माहतहो, उसनेदीसंज्ञाखो॥40॥


बहुतदेरतकप़ड़ारहवह, वहींउसीहालतमें।

जानेकबकुछहोशहोउठा, वहींउसकीपलकमें॥


अनजानेहीउसकेमुंहसे, निकलप़ड़ाथासाई।

जिसकीप्रतिध्वनिशिरडीमें, बाबाकोप़ड़ीसुनाई॥


क्षुब्धहोउठामानसउनका, बाबागएविकलहो।

लगताजैसेघटनासारी, घटीउन्हींकेसन्मुखहो॥


उन्मादीसेइ़धर-उ़धरतब, बाबालेगेभटकने।

सन्मुखचीजेंजोभीआई, उनकोलगनेपटकने॥


औरधधकतेअंगारोंमें, बाबानेअपनाकरडाला।

हुएसशंकितसभीवहाँ, लखताण्डवनृत्यनिराला॥


समझगएसबलोग, किकोईभक्तप़ड़ासंकटमें।

क्षुभितख़ड़ेथेसभीवहाँ, परप़ड़ेहुएविस्मयमें॥


उसेबचानेकीहीखातिर, बाबाआजविकलहै।

उसकीहीपी़ड़ासेपीडित, उनकीअन्तःस्थलहै॥


इतनेमेंहीविविधनेअपनी, विचित्रतादिखलाई।

लखकरजिसकोजनताकी, श्रद्धासरितालहराई॥


लेकरसंज्ञाहीनभक्तको, गा़ड़ीएकवहाँआई।

सन्मुखअपनेदेखभक्तको, साईकीआंखेंभरआई॥


शांत, धीर, गंभीर, सिन्धुसा, बाबाकाअन्तःस्थल।

आजनजानेक्योंरह-रहकर, होजाताथाचंचल॥50॥


आजदयाकीमूर्तिस्वयंथा, बनाहुआउपचारी।

औरभक्तकेलिएआजथा, देवबनाप्रतिहारी॥


आजभक्तिकीविषमपरीक्षामें, सफलहुआथाकाशी।

उसकेहीदर्शनकीखातिरथे, उम़ड़ेनगर-निवासी॥


जबभीऔरजहांभीकोई, भक्तप़ड़ेसंकटमें।

उसकीरक्षाकरनेबाबा, आतेहैंपलभरमें॥


युग-युगकाहैसत्ययह, नहींकोईनईकहानी।

आपतग्रस्तभक्तजबहोता, जातेखुदअन्तर्यामी॥


भेद-भावसेपरेपुजारी, मानवताकेथेसाई।

जितनेप्यारेहिन्दु-मुस्लिम, उतनेहीथेसिक्खईसाई॥


भेद-भावमन्दिर-मस्जिदका, तोड़-फोड़बाबानेडाला।

राहरहीमसभीउनकेथे, कृष्णकरीमअल्लाताला॥


घण्टेकीप्रतिध्वनिसेगूंजा, मस्जिदकाकोना-कोना।

मिलेपरस्परहिन्दु-मुस्लिम, प्यारबढ़ादिन-दिनदूना॥


चमत्कारथाकितनासुन्दर, परिचयइसकायानेदी।

औरनीमकडुवाहटमेंभी, मिठासबाबानेभरदी॥


सबकोस्नेहदियासाईने, सबकोसंतुलप्यारकिया।

जोकुछजिसनेभीचाहा, बाबानेउसकोवहीदिया॥


ऐसेस्नेहशीलभाजनका, नामसदाजोजपाकरे।

पर्वतजैसादुःखनक्योंहो, पलभरमेंवहदूरटरे॥60॥


साईजैसादाताहमने, अरेनहींदेखाकोई।

जिसकेकेवलदर्शनसेही, सारीविपदादूरगई॥


तनमेंसाई, मनमेंसाई, साई-साईभजाकरो।

अपनेतनकीसुधि-बुधिखोकर, सुधिउसकीतुमकियाकरो॥


जबतूअपनीसुधितज, बाबाकीसुधिकियाकरेगा।

औररात-दिनबाबा-बाबा, हीतूरटाकरेगा॥


तोबाबाकोअरे !विवशहो, सुधितेरीलेनीहीहोगी।

तेरीहरइच्छाबाबाकोपूरीहीकरनीहोगी॥


जंगल, जगंलभटकनपागल, औरढूंढ़नेबाबाको।

एकजगहकेवलशिरडीमें, तूपाएगाबाबाको॥


धन्यजगतमेंप्राणीहैवह, जिसनेबाबाकोपाया।

दुःखमें, सुखमेंप्रहरआठहो, साईकाहीगुणगाया॥


गिरेसंकटोंकेपर्वत, चाहेबिजलीहीटूटपड़े।

साईकालेनामसदातुम, सन्मुखसबकेरहोअड़े॥


इसबूढ़ेकीसुनकरामत, तुमहोजाओगेहैरान।

दंगरहगएसुनकरजिसको, जानेकितनेचतुरसुजान॥


एकबारशिरडीमेंसाधु, ढ़ोंगीथाकोईआया।

भोली-भालीनगर-निवासी, जनताकोथाभरमाया॥


जड़ी-बूटियांउन्हेंदिखाकर, करनेलगावहभाषण।

कहनेलगासुनोश्रोतागण, घरमेराहैवृन्दावन॥70॥


औषधिमेरेपासएकहै, औरअजबइसमेंशक्ति।

इसकेसेवनकरनेसेही, होजातीदुःखसेमुक्ति॥


अगरमुक्तहोनाचाहो, तुमसंकटसेबीमारीसे।

तोहैमेरानम्रनिवेदन, हरनरसे, हरनारीसे॥


लोखरीदतुमइसको, इसकीसेवनविधियांहैंन्यारी।

यद्यपितुच्छवस्तुहैयह, गुणउसकेहैंअतिभारी॥


जोहैसंततिहीनयहांयदि, मेरीऔषधिकोखाए।

पुत्र-रत्नहोप्राप्त, अरेवहमुंहमांगाफलपाए॥


औषधिमेरीजोनखरीदे, जीवनभरपछताएगा।

मुझजैसाप्राणीशायदही, अरेयहांआपाएगा॥


दुनियादोदिनोंकामेलाहै, मौजशौकतुमभीकरलो।

अगरइससेमिलताहै, सबकुछ, तुमभीइसकोलेलो॥


हैरानीबढ़तीजनताकी, लखइसकीकारस्तानी।

प्रमुदितवहभीमन- ही-मनथा, लखलोगोंकीनादानी॥


खबरसुनानेबाबाकोयह, गयादौड़करसेवकएक।

सुनकरभृकुटीतनीऔर, विस्मरणहोगयासभीविवेक॥


हुक्मदियासेवकको, सत्वरपकड़दुष्टकोलाओ।

याशिरडीकीसीमासे, कपटीकोदूरभगाओ॥


मेरेरहतेभोली-भाली, शिरडीकीजनताको।

कौननीचऐसाजो, साहसकरताहैछलनेको॥80॥


पलभरमेंऐसेढोंगी, कपटीनीचलुटेरेको।

महानाशकेमहागर्तमेंपहुँचा, दूँजीवनभरको॥


तनिकमिलाआभासमदारी, क्रूर, कुटिलअन्यायीको।

कालनाचताहैअबसिरपर, गुस्साआयासाईको॥


पलभरमेंसबखेलबंदकर, भागासिरपररखकरपैर।

सोचरहाथामनहीमन, भगवाननहींहैअबखैर॥


सचहैसाईजैसादानी, मिलनसकेगाजगमें।

अंशईशकासाईबाबा, उन्हेंनकुछभीमुश्किलजगमें॥


स्नेह, शील, सौजन्यआदिका, आभूषणधारणकर।

बढ़ताइसदुनियामेंजोभी, मानवसेवाकेपथपर॥


वहीजीतलेताहैजगतीके, जनजनकाअन्तःस्थल।

उसकीएकउदासीही, जगकोकरदेतीहैविह्वल॥


जब-जबजगमेंभारपापका, बढ़-बढ़हीजाताहै।

उसेमिटानेकीहीखातिर, अवतारीहीआताहै॥


पापऔरअन्यायसभीकुछ, इसजगतीकाहरके।

दूरभगादेतादुनियाके, दानवकोक्षणभरके॥


स्नेहसुधाकीधारबरसने, लगतीहैइसदुनियामें।

गलेपरस्परमिलनेलगते, हैंजन-जनआपसमें॥


ऐसेअवतारीसाई, मृत्युलोकमेंआकर।

समताकायहपाठपढ़ाया, सबकोअपनाआपमिटाकर॥90॥


नामद्वारकामस्जिदका, रखाशिरडीमेंसाईने।

दाप, ताप, संतापमिटाया, जोकुछआयासाईने॥


सदायादमेंमस्तरामकी, बैठेरहतेथेसाई।

पहरआठहीरामनामको, भजतेरहतेथेसाई॥


सूखी-रूखीताजीबासी, चाहेयाहोवेपकवान।

सौदाप्यारकेभूखेसाईकी, खातिरथेसभीसमान॥


स्नेहऔरश्रद्धासेअपनी, जनजोकुछदेजातेथे।

बड़ेचावसेउसभोजनको, बाबापावनकरतेथे॥


कभी-कभीमनबहलानेको, बाबाबागमेंजातेथे।

प्रमुदितमनमेंनिरखप्रकृति, छटाकोवेहोतेथे॥


रंग-बिरंगेपुष्पबागके, मंद-मंदहिल-डुलकरके।

बीहड़वीरानेमनमेंभीस्नेहसलिलभरजातेथे॥


ऐसीसमुधुरबेलामेंभी, दुखआपात, विपदाकेमारे।

अपनेमनकीव्यथासुनाने, जनरहतेबाबाकोघेरे॥


सुनकरजिनकीकरूणकथाको, नयनकमलभरआतेथे।

देविभूतिहरव्यथा, शांति, उनकेउरमेंभरदेतेथे॥


जानेक्याअद्भुतशिक्त, उसविभूतिमेंहोतीथी।

जोधारणकरतेमस्तकपर, दुःखसाराहरलेतीथी॥


धन्यमनुजवेसाक्षात्दर्शन, जोबाबासाईकेपाए।

धन्यकमलकरउनकेजिनसे, चरण-कमलवेपरसाए॥100॥


काशनिर्भयतुमकोभी, साक्षात्साईमिलजाता।

वर्षोंसेउजड़ाचमनअपना, फिरसेआजखिलजाता॥


गरपकड़तामैंचरणश्रीके, नहींछोड़ताउम्रभर।

मनालेतामैंजरूरउनको, गररूठतेसाईमुझपर॥


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