बुध प्रदोष व्रत 2021 तिथियां, व्रत कथा और विधि

बुध प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि को प्रदोष काल के दौरान मनाया जाता है। यदि प्रदोष व्रत बुधवार को पड़ता है, तो इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है।
अन्य नामसौम्य वारा प्रदोषम
तिथित्रयोदशी
दिनबुधवार
देवताभगवान शिव
तिथियाँ24 फरवरी 2021
10 मार्च 2021
07 जुलाई 2021
21 जुलाई 2021
विधिपूजा, उपवास, जागरण, दान, और प्रार्थना
लाभखुशियाँ लाता है और सभी प्रकार की इच्छाओं को पूरा करता है

यदि प्रदोष व्रत बुधवार को पड़ता है तो इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है। इसे सौम्य वारा प्रदोषम भी कहा जाता है। बुधवार को प्रदोष व्रत रखने से सुख की प्राप्ति होती है और सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस बुध प्रदोष व्रत कथा इस प्रकार है।

आपको पढ़ना चाहिए: प्रदोष व्रत 2021 तिथियां 

बुध प्रदोष व्रत कथा

Budh Pradosh Vrat

प्राचीन काल की कथा है, एक पुरुष का नया-नया विवाह हुआ था। वह गौने के बाद दूसरी बार पत्नी को लाने के लिये ससुराल पहुंचा और उसने सास से कहा कि बुधवार के दिन ही पत्नी को लेकर अपने नगर जायेगा।

उस पुरुष के सास-ससुर ने, साले-सालियों ने उसको समझाया कि बुधवार को पत्नी को विदा कराकर ले जाना शुभ नहीं है, लेकिन वह पुरुष नहीं माना. विवश होकर सास-ससुर को अपने जमाता और पुत्री को भारी मन से विदा करना पड़ा।

पति-पत्नी बैलगाड़ी में चले जा रहे थे। एक नगर से बाहर निकलते ही पत्नी को प्यास लगी। पति लोटा लेकर पत्नी के लिये पानी लेने गया। जब वह पानी लेकर लौटा तो उसने देखा कि उसकी पत्नी किसी पराये पुरुष के लाये लोटे से पानी पीकर, हँस-हँसकर बात कर रही है। वह पराया पुरुष बिल्कुल इसी पुरुष के शक्ल-सूरत जैसा था। यह देखकर वह पुरुष दूसरे अन्य पुरुष से क्रोध में आग-बबूला होकर लड़ाई करने लगा। धीरे-धीरे वहाँ काफी भीड़ इकट्ठा हो गयी। 

इतने में एक सिपाही भी आ गया। सिपाही ने स्त्री से पूछा कि सच-सच बता तेरा पति इन दोनों में से कौन है? लेकिन वह स्त्री चुप रही क्योंकि दोनों पुरुष हमशक्ल थे।

बीच राह में पत्नी को इस तरह देखकर वह पुरुष मन ही मन शंकर भगवान की प्रार्थना करने लगा कि हे भगवान मुझे और मेरी पत्नी को इस मुसीबत से बचा लो, मैंने बुधवार के दिन अपनी पत्नी को विदा कराकर जो अपराध किया है उसके लिये मुझे क्षमा करो।  भविष्य में मुझसे ऐसी गलती नहीं होगी।

श्री शंकर भगवान उस पुरुष की प्रार्थना से द्रवित हो गये और उसी क्षण वह अन्य पुरुष कही अंर्तध्‍यान हो गया. वह पुरुष अपनी पत्नी के साथ सकुशल अपने नगर को पहुँच गया। इसके बाद से दोनों पति-पत्नी नियमपूर्वक बुधवार प्रदोष व्रत करने लगे। बोलो उमापति शंकर भगवान की जय।

आपको पढ़ना चाहिए: प्रदोष व्रत पूजा विधी

लाभ: बुधवार को प्रदोष व्रत रखने से सुख की प्राप्ति होती है और सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

संबंधित विषय

रवि प्रदोष व्रत (भानु प्रदोषम)
सोम प्रदोष व्रत (सोम प्रदोषम)
मंगल प्रदोष व्रत (भौम प्रदोषम)
गुरु प्रदोष व्रत (गुरु वारा प्रदोषम)
शुक्र प्रदोष व्रत (भृगु वारा प्रदोषम)
शनि प्रदोष व्रत (शनि प्रदोषम)

अपनी टिप्पणी दर्ज करें



More Mantra × -
00:00 00:00