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छठ पूजा आरती और भजन

1 छठ गीत

जय जय जय रविदेव जय जय जय रविदेव

रजनीपति माधारी शतदल जीवन दाता

पटपड मान मदुकारी हे दीनमन दाता

जग के वह रविदेव जय जय जय स्वदेव

नभ मंडल के वाणी ज्योति प्रचंड देवा

निजजन हित सुखराशी तेरी हम सब सेवा

कटे है रवि देव जय जय जय रविदेव

कनक बदन मन मोहित रुचिर प्रभा प्यारी

नित मंडल सी मंडित अजर अमर चौविहारी

हे सुरवर रविदेव जय जय जय रविदेव

2 छठ गीत

ऊ जे केरवा जे फरेला खाबाद से, ओहि पर सुगा मदराय

मारबो रे सुग्वा धनुख से, सूरा गीर मुरझाये

ऊँ सुगनी जे रोयले वियोग से, आदित होइ न सहाय

ऊँ जय नारायण जय फरेला खाबाद से, ओही परा सुग्गा मेड

मारबो रे सुग्वा धनुख से, सूरा गीर मुरझाये

ऊँ सुगनी जे रोयले वियोग से, आदित होइ न सहाय

amarudwa je pharela khabad se, oh par सुगर मेडराय

मारबो रे सुग्वा धनुख से, सूरा गीर मुरझाये

ऊँ सुगनी जे रोयले वियोग से, आदित होइ न सहाय

sharifwa je pharela khabad se, oh par सुगर मेडराय

मारबो रे सुग्वा धनुख से, सूरा गीर मुरझाये

ऊँ सुगनी जे रोयले वियोग से, आदित होइ न सहाय

narangiya je pharela khabad se, oh par सुगर मेडराय

मारबो रे सुग्वा धनुख से, सूरा गीर मुरझाये

ऊँ सुगनी जे रोयले वियोग से, आदित होइ न सहाय

ऊँ सिवुया जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मड़रये

मारबो रे सुग्वा धनुख से, सूरा गीर मुरझाये

ऊँ सुगनी जे रोयले वियोग से, आदित होइ न सहाय

सब फलेवा जे फरेला खाबाद से, ओह पर सुगा मेडराय

मारबो रे सुग्वा धनुख से, सूरा गीर मुरझाये

ऊँ सुगनी जे रोयले वियोग से, आदित होइ न सहाय

3 छठ गीत

ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥

ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥

अमरुदवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥

शरीफवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥

ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥

सभे फलवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥

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