arkadaşlık sitesi porno adana escort izmir escort porn esenyurt escort ankara escort bahçeşehir escort देवउठनी एकादशी: तिथि, महत्व, व्रत विधि और कथा !-- Facebook Pixel Code -->

देवउठनी एकादशी: तिथि, महत्व, व्रत विधि और कथा

हिंदू संस्कृति में देवउत्थान एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी और देवउठनी एकादशी सबसे महत्वपूर्ण होती है। यह एकादशी हिंदू महीने में कार्तिक के शुक्ल पक्ष के ग्यारहवें दिन मनाई जाती है। कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी की पूर्व संध्या पर सोते हैं। यह संध्या चार महीनों तक चलती है। और इस अवधि के चलते मनुष्य कोई भी शुभ कार्य नहीं कर सकता। और सभी शुभ और धार्मिक कार्य तभी हो सकते है जब भगवान विष्णु उठ जाएं।

देव उत्थान एकादशी भारत में कार्तिक शुक्ल पक्ष की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। साल 2021 में देव उत्थान एकादशी रविवार, 14 नवंबर को पड़ रही है।

देवउठनी एकादशी की व्रत विधि

- देव उत्थान एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और उनसे जागने का आह्वान किया जाता है। 

- घर की सफाई के बाद स्नान करें। उसके के बाद आंगन में भगवान विष्णु के चरणों की आकृति बनाएं।

- इस दिन सुबह जल्दी उठकर व्रत रखें और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

- उसके बाद फल,मिठाई,बेर,सिंघाड़े,ऋतुफल और गन्ना उस स्थान पर रखकर उसे डलिया से ढांक देते हैं।

- रात्त के समय परिवार के सभी सदस्य को भगवान विष्णु समेत सभी देवी-देवताओं की पूजा की जाती है।

- इसके बाद भगवान को शंख, घंटा-घड़ियाल बजाकर उठाना चाहिए और ये वाक्य बार बार बोलना चाहिए कि उठो देवा, बैठा देवा, आंगुरिया चटकाओ देवा, नई सूत, नई कपास, देव उठाये कार्तिक मास

- और फिर भगवान का आह्वान करते समय मंत्र जाप करना चाहिए। 

तुलसी विवाह और देवउठनी

प्रबोधिनी एकादशी की संध्या पर तुलसी विवाह करने का एक अनुष्ठान है। तुलसी विवाह भगवान शालिग्राम (भगवान विष्णु के अवतार) और तुलसी (पवित्र पौधे) के बीच होता है। तुलसी को भी ‘विष्णु प्रिया’ के रूप में श्रद्धेय माना जाता है। कथाओं और हिंदू ग्रंथों के अनुसार, जिन जोड़ों के पास संतान के रूप में बेटी या लड़की नहीं है, उन्हें कन्यादान का लाभ अर्जित करने के लिए अपने जीवनकाल में एक बार तुलसी विवाह का अनुष्ठान जरूर करना चाहिए।

देवउठनी एकादशी व्रत कथा

एक बार की बात है जब देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु से कहा था - ‘हे भगवान! आपकी अनिश्चित नींद और जागृति का समय पूरी दुनिया को परेशान करता है। आप कभी-कभी आप सालों तक सोते रहते हो। और कभी-कभी आप कई दिन और रात जागते रहते हो। इस वजह से पृथ्वी पर सब चीजों में बाधा होनी शुरू हो रही है। यह मेरे विश्राम में बाधाएं हो रहा हैं और मैं आराम भी नहीं कर पा रहीं हूं। इसलिए मैं आपसे बता रही हूं कि आपको समय पर सोना चाहिए’, नहीं तो पूरी दुनिया को परेशानियों का सामना करना पड़ जाएगा। 

भगवान विष्णु ने मुस्कुरा कर देवी से कहा कि अब मैं चार महीने के लिए सो जाऊंगा। मान्यताओं के अनुसार, यह कहा जाता है कि जो भक्त भगवान विष्णु की जागृति और नींद के समय उनके प्रति अत्यधिक समर्पण और उत्साह के साथ पूजा करते हैं वह भगवान विष्णु का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और भगवान विष्णु उनके घरों में निवास करते हैं। इसके बाद सभी खुशहाल जीवन के साथ रहते है। आइए अब जानते है कि तुलसी विवाह के आयोजन के बारे में। 

तुलसी विवाह आयोजन

इस दिन तुलसी विवाह का आयोजन भी किया जाता है। तुलसी के वृक्ष और शालिग्राम की यह शादी सभी विवाहों की तरह पूरे धूमधाम से होती है। इसलिए तुलसी को विष्णु प्रिया भी कहा जाता हैं। तभी जब देवता जगते है तो सबसे पहली प्रार्थना हरिवल्लभा तुलसी की ही सुनते हैं। तुलसी विवाह का सीधा अर्थ है, तुलसी के माध्यम से भगवान का ध्यान करना। शास्त्रों में कहा गया है कि जिन दंपत्तियों के कन्या नहीं होती, वे जीवन में एक बार तुलसी का विवाह करके कन्यादान का पुण्य अवश्य प्राप्त करें। जिससे वह लोग भी कन्यादान का पुण्य प्राप्त कर सकें।

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