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कल्कि जयंती 2021: तिथि, अनुष्ठान और कहानी

भगवान कल्कि के आगमन को चिह्नित करने के लिए यह त्योहार मनाया जाता है। भगवान कल्कि के रूप में दसवें भगवान विष्णु। भगवान कल्कि का अभी तक अवतार नहीं हुआ है। कल युग में, जो वर्तमान युग है, भगवान विष्णु द्वेष के पूर्ण विनाश और 'धर्म' के निर्माण के लिए प्रकट होंगे।

कल्कि जयंती तिथि

कलियुग के अंत में कल्कि भगवान विष्णु के दसवें और अंतिम अवतार होंगे। साल 2021 में कल्कि जयंती 13 अगस्त मंगलवार को पड़ रही है।

कल्कि जयंती मुहूर्त - 04:24 PM to 07:02 PM

षष्ठी तिथि प्रारंभ - 01:42 PM on Aug 13, 2021

षष्ठी तिथि समाप्त - 11:50 AM on Aug 14, 2021

कल्कि जयंती अनुष्ठान

भक्त कठोर उपवास रखते हैं। वे विष्णु सहस्रनाम, नारायण मंत्र और अन्य मंत्रों का 108 बार पाठ और जाप करते हैं। पूजा के बाद व्रत की शुरुआत करते समय भक्तों द्वारा बीज मंत्र का जाप भी किया जाता है। भक्त देवताओं की मूर्तियों को पानी और पंचामृत से धोते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु के विभिन्न नामों का भी जाप किया जाता है। भक्त ब्राह्मणों को भोजन भी दान करते हैं क्योंकि इस दिन को शुभ माना जाता है।

कल्कि जयंती की कहानी

यह माना जाता है कि बुरे कर्मों के उन्मूलन या अन्य सत्य युग के पुनरुद्धार के लिए भगवान महाविष्णु कलयुग में भगवान कल्कि के रूप में पुनर्जन्म लेंगे। कल्कि संस्कृत शब्द कालका से बना है जिसका अर्थ है जो ब्रह्मांड से बुराई को खत्म करता है। ऐसा माना जाता है कि जब भगवान विष्णु इस ग्रह पर भगवान कल्कि के रूप में प्रकट होते हैं, तो इस दुनिया से सभी बुरी और काली शक्तियां दूर हो जाएंगी, और धर्म या धर्म की स्थापना होगी।

कल्कि जयंती का महत्व

इस दिन भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और प्रार्थना करते हैं कि वे अपने सभी बुरे कर्मों या पापों के लिए क्षमा मांगें। यह भी माना जाता है कि भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में शांति आती है। भगवान कल्कि के सबसे क्रूर अवतारों में से एक माना जाता है जो इस धरती पर मानव जाति के अंत का प्रतीक है। कल्कि का उद्देश्य इस संसार को अन्धविश्वास से मुक्त कर धर्म की स्थापना करना है।

इस दुनिया से भ्रष्टाचार और बुराई का उन्मूलन एक नए युग का निर्माण करेगा, जहां लोगों के दिलों में भक्ति होगी और शांति कायम होगी।

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