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कोजागरा पूजा 2021: तिथि, अनुष्ठान और महत्व

हिंदू धर्म में कोजागर पूजा सबसे शुभ माना जाता है। यह दिन असम, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा राज्यों में अत्यधिक खुशी और उल्लास से मनाया जाता है। अश्विन महीने में पूर्णिमा के दिन देवी लक्ष्मी की पूजा करने के बारे में है। यह अक्टूबर या सितंबर के महीने में मनाया जाता है। अश्विन पूर्णिमा के दिन देवी लक्ष्मी की पूजा  करने से भक्तों को प्रचुर मात्रा में धन और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। 

कोजागरा पूजा 2021 तिथि

कोजागरी पूजा अश्विन चंद्र मास की पूर्णिमा के दिन होती है। लक्ष्मी पूजा, जिसे कोजागर पूजा के रूप में भी जाना जाता है, पूर्णिमा को की जाती है, और वर्ष 2021 में, कोजागर पूजा मंगलवार, 19 अक्टूबर को होती है।

कोजागर पूजा के दिन चन्द्रोदय - 05:21 PM

पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - October 19, 2021, at 07:03 PM

पूर्णिमा तिथि समाप्त - October 20, 2021, at 08:26 PM

कोजागरा पूजा विधि 

- सबसे पहले पूजा स्थल को साफ कर गंगाजल से शुद्ध कर लें। 

- इसके बाद पूजा चौकी को स्वच्छ कर उस पर लाल कपड़ा बिछाकर लक्ष्मी जी प्रतिमा को स्थापित करें। 

- मूर्ति स्थापना के बाद संकल्प लेकर लक्ष्मी-गणेश सहित नवग्रह देवता का आवाहन करें। 

- इसके बाद गणेश और लक्ष्मी जी की विधिवत पूजा करें।

- फिर कलश की पूजा करें। इसके बाद एक-एक करके पूजन सामग्री माता लक्ष्मी को अर्पित करें। 

- माँ लक्ष्मी की विधिवत पूजा के बाद हाथ रक्षा सूत्र बांधें। रक्षा सूत्र के लिए मौली का इस्तेमाल करें। 

- पूजन के बाद इस मंत्र को बोलकर देवी लक्ष्मी से क्षमा प्रार्थना करें।

कोजागरा पूजा मंत्र

1. ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः॥

2. ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

3. ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥

लक्ष्मी पूजा में मंत्रों के उच्चारण पर विशेष शयन देना आवश्यक माना गया है।

कोजागरा पूजा कथा 

लक्ष्मी जी के बारे में पुराणों में तो बहुत सारी कथाओं का वर्णन मिलता है। जिसमें लक्ष्मी और विष्णु से संबंधित कथा सबसे प्रचलित और लोकप्रिय है। कथा के मुताबिक उसके मुताबिक पौराणिक ग्रंथों में जो कथा मिलती है उसके अनुसार देवी लक्ष्मी एक बार देवताओं से रूठकर समुद्र में विलीन हो गईं। लक्ष्मी के समुद्र में विलीन होने पर सभी देवतागण लक्ष्मी विहीन यानि धन विहीन हो गए। अपनी दयनीय स्थिति को देखकर भगवान इन्द्र ने लक्ष्मी को मनाने के लिए उनके निमित्त व्रत-उपवास रखा। देवता इन्द्र को देखते हुए अन्य सभी देवता गण भी उपवास रखा। देवताओं की तरह असुरों ने भी उपवास रखा। यह देखकर लक्ष्मी जी अपने भक्तों की पुकार सुनकर व्रत खत्म होने के बाद फिर से उत्पन्न हुईं। इसके बाद लक्ष्मी का विवाह भगवान विष्णु से हुआ। जिसके बाद सभी देवता लक्ष्मी की कृपा पाकर प्रसन्न हुए।

कोजागरा पूजा के अनुष्ठान 

- कोजागर पूजा के उत्सव में कई अनुष्ठान और रीति-रिवाज शामिल हैं।

- कोजागर पूजा के समय, भक्त पूजा करते हैं और देवी लक्ष्मी की प्रार्थना करते हैं। देवी की मूर्ति को पंडाल या घरों में रखा या स्थापित किया जाता है। कोजागर पूजा करने के रीति-रिवाज प्रत्येक स्थान और धर्म में भिन्न होते हैं।

- एक पुजारी के मार्गदर्शन में, भक्त लक्ष्मी पूजा का पालन करते हैं।

- नर्केल भाजा, तालर फोल, नारू, खिचड़ी और मिठाई देवी लक्ष्मी को भेंट की जाती है ताकि भक्त उनका दिव्य आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।

- इस विशेष दिन, महिलाएं अपने घरों के सामने अल्पाण बनाती हैं, यह देवी लक्ष्मी के चरणों का प्रतिनिधित्व करती है।

- ऐसा माना जाता है कि, इस दिन,देवी लक्ष्मी सभी घरों में जाती हैं और अच्छे भाग्य और अत्यधिक समृद्धि के लिए अपना दिव्य आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

- भक्त रात में जागरण करते हैं और देवी मां को खुश करने के लिए मंत्र, कीर्तन और भजनों का जप हैं।

- देवी का स्वागत करने के लिए, भक्त अपने घरों को मिट्टी के दीपक और रोशनी से उजागर करते हैं।

- भक्त इस दिन उपवास भी करते हैं और पूरे दिन भोजन और पेयजल का इस्तेमाल नहीं करते हैं। सभी अनुष्ठानों को पूरा करने, नारियल के पानी की पेशकश करने और देवी लक्ष्मी को साबुत चावल अर्पित करने के बाद, भक्त अपना उपवास तोड़ सकते हैं।

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