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महाराजा अग्रसेन जयंती, तिथि, पौराणिक कथा और उत्सव

हरियाणा के अग्रोहा शहर हरियाणा में स्थित है, वहां पर महाराजा अग्रसेन एक राजा रहते थे। आप सभी लोग महाराजा अग्रसेन की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगा सकते है कि आज भी महाराजा अग्रसेन को हरियाणा राज्य में व्यापारिक समुदाय की स्थापना का श्रेय दिया जाता है। व्यापारिक समुदाय उत्तरी भारत, विशेषकर हरियाणा राज्य में अग्रोहा के नाम से प्रसिद्ध है। माना जाता है कि महाराजा अग्रसेन जयंती आमतौर पर अक्टूबर के महीने के आश पास ही मनाई जाती है। कहा जाता है कि महाराजा अग्रसेन जी का जन्म सुर्यवंशी भगवान श्रीराम जी की चौतीस वी पीढ़ी में यानी की द्वापर के अंतिम काल (महाभारत काल) के समय एवं कलयुग के प्रारंभ में अश्विन शुक्ल एकम में हआ था। आइए अब जानते हैं अग्रसेन जयंती कैसे मनाई जाती है। 

महाराजा अग्रसेन जयंती 2021

अग्रसेन के कई भक्त हरियाणा, पंजाब और अन्य जगहों पर रहते हैं। ये लोग मुख्य रूप से अग्रहरी, अग्रवाल और जैन जातीय समूह हैं। यह एक महान हिंदू राजा अग्रसेन महाराज के जन्मदिन का उत्सव है। वर्ष 2021 में महाराजा अग्रसेन जयंती 07 अक्टूबर गुरुवार को पड़ रही है।

अग्रसेन जयंती कैसे मनाई जाती है?

इस दिन महाराजा अग्रसेन की पूजा के साथ - साथ देवी लक्ष्मी की भी पूजा करते है। इस पूजा को अग्रवाल और अग्रगाही वाले लोग करते है। जिससे की समृद्धि और खुशहाली रहे साथ ही व्यापार और बिजनेस में तरक्की बने रहे। इस दिन भक्त सुबह के समय अपने कुलदेवता के मन्दिर में जाकर पूजा करने जाते है। सभी स्थानों पर शोभा यात्रा निकाली जाती है। यह यात्रा शहर के मुख्य मार्गो से होकर निकलती है। यात्रा में महाराजा अग्रसेन की प्रतिमा को सजाया जाता है। अग्रवाल और अग्रगाही समाज के लोग इस दिन अनेक तरह के सामाजिक कार्यक्रम जैसे भंडारा, गरीब लोगो को भोजन, कपड़ा दान जैसे कार्यक्रम करते है। जगह जगह खाना खिलाया जाता है। मेडिकल कैम्प लगाकर मरीजो का इलाज किया जाता है। महाराजा अग्रसेन पर गोषठी होती है। उनके योगदान और दी गयी शिक्षा के बारे में लोगो को बताया जाता है। इस दिन सम्पूर्ण वैश्य समुदाय उनको याद करता है और उनके पद चिन्हों पर चलने का प्रयास करता है।

महाराजा अग्रसेन जयंती की पौराणिक कथा

महाराजा अग्रसेन वनिका धर्म के प्रमुख दीक्षार्थियों में से एक थे। बता दें कि क्षेत्र के लोगों के लाभ के लिए महाराजा द्वारा धर्म को अपनाया गया था। ऐसा माना जाता है कि महाराजा अग्रसेन के 18 बच्चे थे, इसलिए अग्रवाल समुदाय में गोत्रों की संख्या समान है। उनकी मृत्यु के बाद, महाराजा अग्रसेन के सभी बच्चों के बीच राज्य का वितरण किया गया और उन्होंने इसके बाद अलग-अलग हिस्सों पर शासन किया।

अग्रोहा शहर की उत्पत्ति से जुड़ी किंवदंती महाराजा अग्रसेन से भी संबंधित है। एक बार राजा अग्रसेन काशी गए और भगवान विष्णु से उन्हें वरदान देने की प्रार्थना की। प्रभु जल्द ही प्रकट हुए और उन्होंने राजा को देवी लक्ष्मी की पूजा करने का निर्देश दिया क्योंकि वह समस्या को दूर करने में उनकी मदद कर सकते थे। राजा ने उसके बाद देवी लक्ष्मी की पूजा की और वह प्रकट हुए। राजा ने उसे एक योग्य व्यापारी बनने का ज्ञान देने के लिए कहा ताकि वह अपने समुदाय के लोगों की अच्छी सेवा कर सके। बाद में राजा ने अपनी पत्नी के साथ एक ऐसी जगह खोजने के लिए यात्रा शुरू की जहाँ नया साम्राज्य स्थापित किया जा सकता था। वे दोनों एक ऐसे स्थान पर आए जहाँ बाघों के कुछ शावक खेल रहे थे। बाद में राजा ने एक राज्य स्थापित करने का फैसला किया क्योंकि उन्होंने इसे एक अच्छा संकेत माना। इसके बाद अघोरा के नाम से जाना जाने लगा। अग्रवाल समुदाय की प्रासंगिकता को इस तथ्य से समझा जा सकता है कि महान मुगल राजा अकबर के पास अग्रवाल समुदाय के दो लोग थे।

त्योहार के रूप में मनाई जाती है महाराजा अग्रसेन जयंती

महाराजा अग्रसेन जयंती को अग्रवाल समुदाय द्वारा पूरी धार्मिक भक्ति के साथ जयंती मनाई जाती है। भक्त पूरे क्षेत्र में विभिन्न पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और पारंपरिक शोभा यात्रा का हिस्सा बनते हैं। साथ ही ये यात्रा शहरों के माध्यम से महत्वपूर्ण स्थानों से होकर निकली है। यात्रा पूरे हरियाणा में कस्बों और शहरों में भक्ति के साथ की जाती है। शोभा यात्रा जुलूस में महाराजा अग्रसेन के परिवार के सदस्यों के चित्र और अवशेष शामिल हैं और विशेष रूप से दिन के लिए तैयार किए गए हैं। साथ ही आपको बता दें कि पारंपरिक लंगर दिन पर आयोजित किए जाते हैं और अग्रवाल समुदाय के सदस्य यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रसाद भक्तों और अन्य लोगों के बीच वितरित किया जाता है जो महाराजा अग्रसेन जयंती समारोह का एक हिस्सा होते हैं।

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