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मंगल प्रदोष व्रत 2022 तिथियां, व्रत कथा और विधि

मंगल प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि को प्रदोष काल के दौरान मनाया जाता है। यदि प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ता है, तो इसे मंगल प्रदोष व्रत कहा जाता है।
अन्य नामभौम प्रदोषम
तिथित्रयोदशी
दिनमंगलवार
देवताभगवान शिव
तिथियाँ15 मार्च 2022
29 मार्च 2022
09 अगस्त 2022
विधिपूजा, उपवास, जागरण, दान, और प्रार्थना
लाभस्वास्थ्य समस्याओं और ऋण से राहत

यदि प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ता है तो इसे मंगल प्रदोष व्रत और भौम प्रदोषम कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने से स्वास्थ्य के मुद्दों और कर्ज से मुक्ति दिलाता है। यह दिन बहुत ही महत्पूर्ण माना जाता है। मंगल प्रदोष व्रत कथा इस प्रकार है,

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मंगल प्रदोष व्रत कथा

Mangal Pradosh Vrat

वैसे तो इस व्रत से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं। इन्हीं में से एक कथा के अनुसार, एक गांव में एक ब्राह्मणी अपने बेटे के साथ रहती थी। वह बेहद गरीब थी। वो हमेशा प्रदोष व्रत करती थी। वो अपने बेटे के साथ रोज भीख मांगती थी। एक दिन रास्ते में इसे एक राजकुमार घायल अवस्था में मिला जिसका नाम विदर्भ था। उस राजकुमार पर पड़ोसी राज्य ने आक्रमण कर दिया था। साथ ही उसका राज्य भी हड़प लिया था। वहीं, उसे बीमार बना दिया था। ब्राह्मणी ने उसकी हालत देखी और उसे घर ले आई। ब्राह्मणी ने उसकी खूब सेवा की। एक दिन वो राजकुमार ठीक हो गया। कुछ समय पश्चात ब्राह्मणी दोनों बालकों को लेकर देव मंदिर गई। वहां उसकी भेंट ऋषि शाण्डिल्य से हुई। ऋषि शाण्डिल्य ने ब्राह्मणी को विदर्भ के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यह विदर्भ देश के राजा का पुत्र है। राजा युद्ध में मारे गए थे और उनकी माता की भी अकाल मृत्यु हो गई थी। ऋषि शाण्डिल्य ने ब्राह्मणी को प्रदोष व्रत करने के लिए कहा। इसके बाद से ही ब्राह्मणी ने अपने दोनों बालकों के साथ प्रदोष व्रत करना शुरू किया। कुछ समय बाद उसकी शादी एक गंधर्व पुत्री से हो गयी। गंधर्व की सहायता से राजकुमार विदर्भ ने अपना राज्य फिर से हासिल कर लिया। राजकुमार ने ब्राह्मणी के बेटे को मंत्री बना लिया। इस तरह प्रदोष व्रत के फल से न ब्राह्मणी को गरीबी से मुक्ति दिलाई और राजकुमार को भी उसका खोया राज्य वापस कर दिया।

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लाभ: मंगल प्रदोष व्रत से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और कर्ज से मुक्ति मिलती है।

अन्य प्रदोष व्रत

रवि प्रदोष व्रत (भानु प्रदोषम)
सोम प्रदोष व्रत (सोम प्रदोषम)
बुद्ध प्रदोष व्रत (सौम्य वारा प्रदोषम)
गुरु प्रदोष व्रत (गुरु वारा प्रदोषम)
शुक्रा प्रदोष व्रत (भृगु वारा प्रदोषम)
शनि प्रदोष व्रत (शनि प्रदोषम)

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