arkadaşlık sitesi porno adana escort चैत्र नवरात्रि 2022 का तीसरा दिन: चंद्रघंटा देवी पूजा, आरती और मंत्र !-- Facebook Pixel Code -->

नवरात्रि 2022 का तीसरा दिन - चंद्रघंटा पूजा

नवरात्रि का तीसरा दिन देवी आदि शक्ति के एक विशिष्ट रूप को समर्पित है। इस दिन नवदुर्गा के चंद्रघंटा अवतार की पूजा की जाती है। चंद्रघंटा देवी को आध्यात्मिक और आंतरिक शक्ति की देवी कहा जाता है।

चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन
2022 तारीखसोमवार, 4 अप्रैल
तिथिचैत्र सुक्ल पक्ष तृतीया
देवीमाँ चंद्रघंटा
पूजाचंद्रघंटा पूजा
मंत्र'ओम देवी चंद्रघंटायै नम:'
फूलकमल
रंगसफेद

सभी 2022 नवरात्रि दिवस 3 तिथियां

- तीसरा दिन माघ गुप्त नवरात्रि: शुक्रवार, 4 फरवरी
- तीसरा दिन चैत्र नवरात्रि: सोमवार, 4 अप्रैल
- तीसरा दिन आषाढ़ गुप्त नवरात्रि: शनिवार, 2 जुलाई
- तीसरा दिन शारदीय नवरात्रि: बुधवार, 28 सितंबर

पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता।

प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता  

या देवी सर्वभूतेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।


आरती

जय माँ चन्द्रघण्टा सुख धाम। पूर्ण कीजो मेरे काम॥
चन्द्र समाज तू शीतल दाती। चन्द्र तेज किरणों में समाती॥
मन की मालक मन भाती हो। चन्द्रघण्टा तुम वर दाती हो॥
सुन्दर भाव को लाने वाली। हर संकट में बचाने वाली॥
हर बुधवार को तुझे ध्याये। श्रद्दा सहित तो विनय सुनाए॥
मूर्ति चन्द्र आकार बनाए। शीश झुका कहे मन की बाता॥
पूर्ण आस करो जगत दाता। कांचीपुर स्थान तुम्हारा॥
कर्नाटिका में मान तुम्हारा। नाम तेरा रटू महारानी॥
भक्त की रक्षा करो भवानी।

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मां चंद्रघंटा पूजा

नवदुर्गा की तीसरी शक्ति चंद्रघंटा माँ हैं नवरात्रि में तीसरे दिन चंद्रघंटा माँ देवी की पूजा-आराधना की जाती है। देवी का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन-आराधन कर साधक का मन 'मणिपूर' चक्र में प्रविष्ट होता है। माँ चंद्रघंटा की कृपा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं, दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है तथा विविध प्रकार की दिव्य ध्वनियाँ सुनाई देती हैं। ये क्षण साधक के लिए अत्यंत सावधान रहने के होते हैं।

माँ चंद्रघंटा पूजा का महत्व

कहा जाता है कि हमें निरंतर उनके पवित्र विग्रह को ध्यान में रखकर साधना करना चाहिए। उनका ध्यान हमारे  पृथ्वीलोक और परलोक दोनों के लिए कल्याणकारी और सद्गति देने वाली है। चंद्रघंटा देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है। इसीलिए इस देवी को चंद्रघंटा कहा गया है। इनके शरीर का रंग सोने के समान बहुत चमकीला और दस भुजाएं हैं। वे खड्ग और अन्य अस्त्र-शस्त्र से विभूषित हैं। 

सिंह पर सवार इस देवी की मुद्रा युद्ध के लिए उद्धत रहने की है। इनके  घंटे के  भयानक ध्वनि से अत्याचारी दानव-दैत्य और राक्षस कांप जाते हैं। नवरात्रि में तीसरे दिन इसी देवी की पूजा का महत्व है। चंद्रघंटा देवी की कृपा से भक्तों को अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं। दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है और कई तरह की ध्वनियां सुनाईं देने लगती हैं। माँ सदैव अपने भक्तों को सभी बाधाओं से दूर रखती है और जीवन में ख़ुशी प्रदान करती है।

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