नवरात्रि का छठा दिन - कात्यायनी पूजा विधि, आरती और मंत्र

चैत्र नवरात्रि दिन 6
Katyayani Devi
दिनांकरविवार, 18 अप्रैल 2021
तिथि
अश्विन सुक्ल पक्ष षष्ठी
देवी
मां कात्यायनी
पूजा
कात्यायनी पूजा
मंत्र
'ओम देवी कात्यायनाय नमः'
फूल
गेंदे का फूल
रंग
हरा

माँ कात्यायनी नवदुर्गा का छठा रूप है। यह भी माना जाता है कि उसकी पूजा करने से कुंडली में ग्रहों के सभी नकारात्मक प्रभावों को मिटाने में मदद मिल सकती है। 2021 में, चैत्र नवरात्रि का छठा दिन  रविवार, 18 अप्रैल को और शारदीय नवरात्रि षष्ठी सोमवार, 11 अक्टूबर 2021 को पड़ रहे हैं।

2021 नवरात्रि छठा दिन का विवरण

- पसंदीदा फूल: गेंदे का फूल

- दिन का रंग: हरा

- देवता: मां कात्यायनी

- मंत्र: 'ओम देवी कात्यायनाय नमः'

- पूजा तिथि: नवरात्रि (षष्ठी) के 6 वें दिन

- सत्तारूढ़ ग्रह: बृहस्पति (बृहस्पति)

- दिन 6 माघ गुप्त नवरात्रि: बुधवार, 17 फरवरी 2021
- दिन 6 चैत्र नवरात्रि: रविवार, 18 अप्रैल 2021
- दिन 6 आषाढ़ गुप्त नवरात्रि: शुक्रवार, 16 जुलाई 2021
- दिन 6 शारदीय नवरात्रि: सोमवार, 11 अक्टूबर 2021

कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि।

नन्द गोपसुतं देविपतिं मे कुरु ते नमः॥

नव दुर्गा स्वरूपों में माँ कात्यायनी देवी का छठाँ स्वरुप का महत्व

नवदुर्गा के छठवें स्वरूप में माँ भगवती कात्यायनी की पूजा की जाती है। माँ कात्यायनी का जन्म कात्यायन ऋषि के घर हुआ था अतः इनको कात्यायनी कहा जाता है। इनकी चार भुजाओं मैं अस्त्र शस्त्र और कमल का पुष्प है, इनका वाहन सिंह है. ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं, गोपियों ने कृष्ण की प्राप्ति के लिए इनकी पूजा की थी। विवाह में आरही बाधाओं के लिए माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है, योग्य और मनचाहा पति इनकी कृपा से प्राप्त होता है ज्योतिष में बृहस्पति का सम्बन्ध इनसे माना जाता है।

माँ कात्यायनी देवी का स्वरूप सोने के समाना चमकीला है। चार भुजा धारी माँ कात्यायनी सिंह पर सवार हो कर  एक हाथ में तलवार और दूसरे में अपना प्रिय पुष्प कमल लिये हुए बैठी है। तथा अन्य दो हाथ वरमुद्रा और अभयमुद्रा में हैं। इनका वाहन सिंह हैं। देवी कात्यायनी के नाम और जन्म से जुड़ी एक कथा प्रसिद्ध है।

हमारे ऋषि मुनियों में एक  श्रेष्ठ कात्य गोत्र के  ऋषि महर्षि कात्यायन जी थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। मां भगवती को पुत्री के रूप में पाने की इच्छा रखते हुए उन्होंने पराम्बा माँ भगवती  की कठोर तपस्या की। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें पुत्री का वरदान दिया। कुछ समय बीतने के बाद राक्षस महिषासुर का अत्याचार अत्यधिक बढ़ गया। तब त्रिदेवों के तेज से एक सोने के सामान चमकीली और चतुर्भजाओं वाली एक कन्या ने जन्म लिया और उसका वध कर दिया। कात्य गोत्र में जन्म लेने के कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ गया।

मां कात्यायनी अविवाहित कन्याओं के लिए विशेष फलदायिनी मानी गई हैं। जिन कन्याओं के विवाह में विलम्ब या परेशानियां आती है तो वह माँ कात्यायनी के चतुर्भुज रूप की आराधना कर माँ का आशीर्वाद प्राप्त कर अपने मांगलिक कार्य को पूर्ण करती है  शिक्षा प्राप्ति के क्षेत्र में प्रयासरत भक्तों को माता की अवश्य उपासना करनी चाहिए। माँ कात्यायनी देवी के पूजन में मधु का विशेष महत्व है। इस दिन प्रसाद में मधु यानि शहद का प्रयोग करना चाहिए। इसके प्रभाव से साधक सुंदर रूप प्राप्त करता है।

आरती

जय जय अम्बे जय कात्यायनी। जय जग माता जग की महारानी॥
बैजनाथ स्थान तुम्हारा। वहावर दाती नाम पुकारा॥
कई नाम है कई धाम है। यह स्थान भी तो सुखधाम है॥
हर मन्दिर में ज्योत तुम्हारी। कही योगेश्वरी महिमा न्यारी॥
हर जगह उत्सव होते रहते। हर मन्दिर में भगत है कहते॥
कत्यानी रक्षक काया की। ग्रंथि काटे मोह माया की॥
झूठे मोह से छुडाने वाली। अपना नाम जपाने वाली॥
बृहस्पतिवार को पूजा करिए। ध्यान कात्यानी का धरिये॥
हर संकट को दूर करेगी। भंडारे भरपूर करेगी॥
जो भी माँ को भक्त पुकारे। कात्यायनी सब कष्ट निवारे॥

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