arkadaşlık sitesi porno adana escort izmir escort porn esenyurt escort ankara escort bahçeşehir escort चैत्र नवरात्रि 2022 का सातवाँ दिन: माँ कालरात्रि और महा सप्तमी पूजा !-- Facebook Pixel Code -->

नवरात्रि 2022 का सातवां दिन: माँ कालरात्रि और महा सप्तमी पूजा

नवरात्रि का सातवाँ दिन(महा सप्तमी) को देवी कालरात्रि के साथ-साथ देवी सरस्वती की पूजा होती है। इस दिन लोग उत्सव पूजा की भी व्यवस्था करते हैं। नवरात्रि के सातवें दिन देवी कालरात्रि की पूजा की जाती है। उसे नवदुर्गा का सबसे क्रूर अवतार माना जाता है और उसे अज्ञानता को नष्ट करने और ब्रह्मांड से अंधेरा दूर करने के लिए जाना जाता है।

चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन
अन्य नाममहा सप्तमी
2022 तारीखशुक्रवार, 8 अप्रैल
तिथिचैत्र सुक्ल पक्ष सप्तमी
देवीमाँ कालरात्रि
पूजाकालरात्रि पूजा
मंत्र'ओम देवी कात्यायनाय नमः'
फूलकृष्ण कमल
रंगहरा

2022 सभी नवरात्रि का सातवां दिन

दिन 7 माघ गुप्त नवरात्रि: मंगलवार, 8 फरवरी
दिन 7 चैत्र नवरात्रि: शुक्रवार, 8 अप्रैल
दिन 7 आषाढ़ गुप्त नवरात्रि: बुधवार, 6 जुलाई
दिन 7 शारदीय नवरात्रि: रविवार, 2 अक्टूबर


एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता,

लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥


नवरात्र के सातवें दिन माँ भगवती दुर्गा के कालरात्रि रूप की पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार बुरी शक्तियों से पृथ्वी को बचाने और पाप को फैलने से रोकने के लिए मां ने अपने तेज से इस रूप को उत्पन् किया था इनका रंग काला होने के कारण ही इन्हें कालरात्रि कहा गया और असुरों के राजा रक्तबीज का वध करने के लिए देवी दुर्गा ने अपने तेज से इन्हें उत्पन्न किया था। इनकी पूजा शुभ फलदायी होने के कारण इन्हें 'शुभंकारी' भी कहते हैं।

माँ कालरात्रि कि पौराणिक मान्यता   

मान्यता है कि माता कालरात्रि की पूजा करने से मनुष्य समस्त सिद्धियों को प्राप्त कर लेता है।  माता कालरात्रि पराशक्तियों (काला जादू) की साधना करने वाले जातकों के बीच बेहद प्रसिद्ध हैं। मां की भक्ति से दुष्टों का नाश होता है और हर प्रकार की ग्रह बाधाएं दूर हो जाती हैं।

देवी कालरात्रि का शरीर रात के अंधकार की तरह काला है इनके बाल बिखरे हुए हैं और इनके गले में विधुत की माला है. इनके चार हाथ हैं जिसमें इन्होंने एक हाथ में खड्ग और एक हाथ में लोहे का कांटा धारण किया हुआ है. इसके अलावा इनके दो हाथ वरमुद्रा और अभय मुद्रा में है। इनके तीन नेत्र है तथा इनके श्वास से अग्नि निकलती है. कालरात्रि का वाहन गर्दभ(गधा) है।

मां कालरात्रि की कथा

पौऱणक कथा के अनुसार दैत्य शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा रखा था. इससे चिंतित होकर सभी देवतागण शिव जी के पास गए। शिव जी ने देवी पार्वती से राक्षसों का वध कर अपने भक्तों की रक्षा करने को कहा। शिव जी की बात मानकर पार्वती जी ने दुर्गा का रूप धारण किया और शुंभ-निशुंभ का वध कर दिया. परंतु जैसे ही दुर्गा जी ने रक्तबीज को मारा उसके शरीर से निकले रक्त से लाखों रक्तबीज उत्पन्न हो गए। इसे देख दुर्गा जी ने अपने तेज से कालरात्रि को उत्पन्न किया। इसके बाद जब दुर्गा जी ने रक्तबीज को मारा तो उसके शरीर से निकलने वाले रक्त को कालरात्रि ने अपने मुख में भर लिया और सबका गला काटते हुए रक्तबीज का वध कर दिया।

नवरात्रि का सातवाँ दिन आरती

कालरात्रि जय जय महाकाली। काल के मुंह से बचाने वाली॥
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा। महाचंडी तेरा अवतारा॥
पृथ्वी और आकाश पे सारा। महाकाली है तेरा पसारा॥
खड्ग खप्पर रखने वाली। दुष्टों का लहू चखने वाली॥
कलकत्ता स्थान तुम्हारा। सब जगह देखूं तेरा नजारा॥
सभी देवता सब नर-नारी। गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥
रक्तदन्ता और अन्नपूर्णा। कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥
ना कोई चिंता रहे ना बीमारी। ना कोई गम ना संकट भारी॥
उस पर कभी कष्ट ना आवे। महाकाली माँ जिसे बचावे॥
तू भी भक्त प्रेम से कह। कालरात्रि माँ तेरी जय॥

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टिप्पणियाँ

  • 23/10/2020

    Everyday of Navarathri iam reading this page .... really very informative and devine powers of Goddesses Durga maatha history learnt in detail .......

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