नवरात्रि नवम दिवस (महा नवमी) - सिद्धिदात्री पूजा

नवरात्रि नवम दिवस,  देवी सिद्धिदात्री की पूजा का पालन करता है। महा नवमी पर देवी दुर्गा को महिषासुरमर्दिनी के रूप में पूजा जाता है। ऐसा माना जाता है कि महा नवमी के दिन दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध किया था। चैत्र नवरात्रि 2019 पर, सिद्धिदात्री पूजा 14 अप्रैल रविवार को होती है।

सिद्धगन्ध र्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि
सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी ’’


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माँ सिद्धिदात्री का स्वरूप तथा महत्व

श्री दुर्गा का नवम रूप माता श्री सिद्धिदात्री है। ये सभी प्रकार की सिद्धियों की दाता हैं इसीलिए ये सिद्धिदात्री कहलाती हैं। भगवान शिव ने भी सिद्धिदात्री देवी की कृपा से ये अनेको सिद्धियां प्राप्त की थीं। सिद्धिदात्री देवी की कृपा से ही शिवजी का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण शिव अर्द्धनारीश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए।

इस देवी के दाहिनी तरफ नीचे वाले हाथ में चक्र, ऊपर वाले हाथ में गदा तथा बाईं तरफ के नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल का पुष्प ले कर सुशोभित है। इसलिए इन्हें सिद्धिदात्री कहा जाता है। अष्ट सिद्धियों से सुशोभित अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व सिद्धिदात्री की कृपा से मनुष्य सभी प्रकार की सिद्धिया प्राप्त कर मोक्ष पाने मे सफल होता है।

माता अपने भक्तों पर तुरंत प्रसन्न होती है और अपने भक्तों को संसार में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति कराती है।नवरात्री के नवें दिन भक्तों को अपना सारा ध्यान निर्वाण चक्र की ओर लगाना चाहिए। यह चक्र हमारे कपाल के मध्य में स्थित होता है। ऐसा करने से भक्तों को माता सिद्धिदात्री की कृपा से उनके निर्वाण चक्र में उपस्थित शक्ति स्वतः ही प्राप्त हो जाती है।

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राम नवमी

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