नवरात्रि का नौंवा दिन (महा नवमी) - सिद्धिदात्री पूजा

नवरात्रि का नौंवा दिन,  देवी सिद्धिदात्री की पूजा का पालन करता है। महा नवमी पर देवी दुर्गा को महिषासुरमर्दिनी के रूप में पूजा जाता है। ऐसा माना जाता है कि महा नवमी के दिन दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध किया था। 2020 में, चैत्र नवरात्रि का नौंवा दिन (महा नवमी) गुरुवार, 02 अप्रैल को और शारदीय नवरात्रि नवमी 25 अक्टूबर 2020 को पड़ रही है।

2020 नवरात्रि का नौंवा दिन विवरण

- पसंदीदा फूल: चंपा

- दिन का रंग: मोर हरा

- देवता: देवी सिद्धिदात्री

- मंत्र: 'ओम देवी सिद्धिदात्रीयै नम:'

- पूजा तिथि: नवरात्रि का 9 वां दिन (महा नवमी)

- सत्तारूढ़ ग्रह: केतु

- दिन 9 माघ गुप्त नवरात्रि: रविवार, 02 फरवरी 2020

- दिन 9 चैत्र नवरात्रि: गुरुवार, 02 अप्रैल 2020

- दिन ९ आषाढ़ गुप्त नवरात्रि: मंगलवार, ३० जून २०२०

- दिन 9 शारदीय नवरात्रि: रविवार, 25 अक्टूबर 2020

सिद्धगन्ध र्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि
सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी ’’


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माँ सिद्धिदात्री का स्वरूप तथा महत्व

श्री दुर्गा का नवम रूप माता श्री सिद्धिदात्री है। ये सभी प्रकार की सिद्धियों की दाता हैं इसीलिए ये सिद्धिदात्री कहलाती हैं। भगवान शिव ने भी सिद्धिदात्री देवी की कृपा से ये अनेको सिद्धियां प्राप्त की थीं। सिद्धिदात्री देवी की कृपा से ही शिवजी का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण शिव अर्द्धनारीश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए।

इस देवी के दाहिनी तरफ नीचे वाले हाथ में चक्र, ऊपर वाले हाथ में गदा तथा बाईं तरफ के नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल का पुष्प ले कर सुशोभित है। इसलिए इन्हें सिद्धिदात्री कहा जाता है। अष्ट सिद्धियों से सुशोभित अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व सिद्धिदात्री की कृपा से मनुष्य सभी प्रकार की सिद्धिया प्राप्त कर मोक्ष पाने मे सफल होता है।

माता अपने भक्तों पर तुरंत प्रसन्न होती है और अपने भक्तों को संसार में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति कराती है।नवरात्री के नवें दिन भक्तों को अपना सारा ध्यान निर्वाण चक्र की ओर लगाना चाहिए। यह चक्र हमारे कपाल के मध्य में स्थित होता है। ऐसा करने से भक्तों को माता सिद्धिदात्री की कृपा से उनके निर्वाण चक्र में उपस्थित शक्ति स्वतः ही प्राप्त हो जाती है।

माँ सिद्धिदात्री आरती

जय सिद्धिदात्री माँ तू सिद्धि की दाता। तु भक्तों की रक्षक तू दासों की माता॥
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि। तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि॥
कठिन काम सिद्ध करती हो तुम। जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम॥
तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है। तू जगदम्बें दाती तू सर्व सिद्धि है॥
रविवार को तेरा सुमिरन करे जो। तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो॥
तू सब काज उसके करती है पूरे। कभी काम उसके रहे ना अधूरे॥
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया। रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया॥
सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली। जो है तेरे दर का ही अम्बें सवाली॥
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा। महा नंदा मंदिर में है वास तेरा॥
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता। भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता॥

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