नवरात्रों की पौराणिक कथाऐं

मार्कण्डेय पुराण के अनुसार नवरात्रि और दुर्गा पूजा से जुडी है। नवरात्रि के पीछे संपूर्ण पौराणिक संबंध महिषासुर की हार के साथ है। अध्याय 81 से 93 पूरी कहानी  है और इसे देवमाहत्म्य के रूप में जाना जाता है। लोग दुर्गा काल के दौरान देवी की पूजा करने के लिए इस पुराण को पढ़ते हैं।

Mahishasura Emerge


माँ देवी ने कैसे किया महिषासुर का वद्ध:

दो भाई रम्भा और करम्भा थे जिन्होंने शक्तियों अनेकों शक्तियों  को हासिल करने के लिए गंभीर तपस्या का अभ्यास किया था, इंद्र को इतनी गंभीर तपस्या से धमकी दी गई थी क्योंकि उन्होंने 'करभा' भाइयों में से एक को मार डाला था। इसने रम्भा  में बदला लेने की आग को जन्म दिया और इसलिए वह अपनी तपस्या में और अधिक कठोर हो गया। उनकी पूजा कई देवताओं से प्रभावित हुई है और उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं है।

एक बार रामभा मादा भैंस से प्रेम करने लग गयी  और उसके साथ रहने लग गयी। इस बीच, एक पुरुष भैंस आया और रामभा की हत्या कर दी।

इस घटना ने महिला गर्भवती भैंस को आग  में कूद गई, ठीक उसी समय  आधे भैंस और आधा इंसान 'महिषासुर' प्रकट हुआ।


Goddess Durga


महिषासुर सृष्टिकर्ता ब्रम्हा का महान भक्त था और ब्रम्हा जी ने उन्हें वरदान दिया था कि कोई भी देवता या दानव उसपर विजय प्राप्त नहीं कर सकता। महिषासुर बाद में स्वर्ग लोक के देवताओं को परेशान करने लगा और पृथ्वी पर भी उत्पात मचाने लगा। उसने स्वर्ग पर एक बार अचानक आक्रमण कर दिया और इंद्र को परास्त कर स्वर्ग पर कब्ज़ा कर लिया तथा सभी देवताओं को वहाँ से खदेड़ दिया। देवगण परेशान होकर त्रिमूर्ति ब्रम्हा, विष्णु और महेश के पास सहायता के लिए पहुँचे। सारे देवताओं ने फिर से मिलकर उसे फिर से परास्त करने के लिए युद्ध किया परंतु वे फिर हार गये।

कोई उपाय पाक देवताओं ने उसके विनाश के लिए दुर्गा का सृजन किया जिसे शक्ति और पार्वती के नाम से भी जाना जाता है। देवी दुर्गा ने महिषासुर पर आक्रमण कर उससे नौ दिनों तक युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध किया। इसी उपलक्ष्य में हिंदू भक्तगण दस दिनों का त्यौहार दुर्गा पूजा मनाते हैं और दसवें दिन को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है। जो बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है।

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