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राधा कुंड स्नान 2021: तिथि, विधि और महत्व

वृंदावन के नजदीक ही पश्चिम में राधा कुंड व्रज स्थित है। जिसे सबसे पवित्र स्थानों में से जाना जाता है। यह राधा कुंड परिक्रमा रोड पर एक पहाड़ी पर स्थित है, जिसे भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया था। आपको बता दें कि श्याम कुंड और राधा कुंड दोनों एक दूसरे के पास ही स्थित हैं साथ ही ऐसा माना जाता है कि उनकी रचना से जुड़ी कई कहानियां हैं। यह तालाब, श्याम कुंड और राधा कुंड मोर की आंखों जैसे दिखते हैं। 

इस साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाले अहोई अष्टमी के दिन राधा कुंड स्नान 28 अक्टूबर 2021 पड़ रहा है।   

राधा कुंड स्नान की पूजा विधि

अहोई अष्टमी के दिन राधा कुंड स्नान का अनुष्ठान करना बेहद शुभ और फायदेमंद माना जाता है। पर्यवेक्षक पवित्र राधा कुंड को कद्दू, माला और प्रसाद चढ़ाते हैं। मध्यरात्रि के समय, भक्त कुंड में गोता लगाते हैं या स्नान करते हैं और उसके बाद श्याम कुंड में स्नान करते हैं।

- इस पूजा की शुरुआत अहोई अष्टमी वाले दिन होती है।

- उस दिन रात को श्री राधा कुंड के पास दीया जलाया जाता है।

- और राधा रानी को याद किया जाता है। 

- राधा रानी की पूजा करके उनको प्रणाम करें

- उसके बाद अपनी इच्छा राधा रानी के सामने रखकर प्रार्थना करें।

- आप अपने मन में राधा रानी के लिए सच्ची भावना रखें। 

- यह सब होने के बाद आप ठीक 12 बजे अपने साथी के साथ राधा कुंड में स्नान करें।

- स्नान करने के बाद सीताफल दान करें। 

राधा कुंड स्नान का महत्व

हिंदू शास्त्रों में कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाले अहोई अष्टमी के दिन, जिन शादीशुदा लोगो को संतान नहीं होती, वह लोग अगर सच्चे मन से राधा रानी की पूजा करने के बाद कुंड में स्नान करते है तो उस दंपति की झोली भर जाती है। साथ ही इस दिन दंपति निर्जला व्रत भी रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि द्वापर युग से यह परंपरा चली आ रही है। साथ ही यह राधा कुंड इतना चमत्कारी है कि सच्ची श्रद्धा रखने वालों से राधा रानी प्रसन्न रहती हैं साथ ही अच्छे और सुंदर संतान प्राप्त होती हैं। आपको बता दें कि जिस दंपत्ति की इच्छा पूरी हो जाती है वह अपनी संतान के साथ वापस इस कुंड में स्नान करने जरूर आते हैं। ऐसा कहा जाता है कि दुनिया के किसी भी कोने से अगर सच्ची मन से भावना रखकर कोई दंपत्ति इस कुंड में स्नान करने आता है तो उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है।

राधा कुंड स्नान की कहानी

राधा कुंड का निर्माण भगवान कृष्ण ने अरिस्तासुर को मारने के बाद हुआ था, जो कि एक बैल रूपी राक्षस था। माना जाता है कि बैल धर्म का प्रतीक है क्योंकि यह गाय के परिवार से संबंधित है। इसलिए राधारानी और गोपीयों के अनुसार भगवान कृष्ण ने बैल को मार कर धार्मिक अपराध किया था। राधा जी ने कृष्ण से सभी पवित्र नदियों में स्नान करके स्वयं को शुद्ध करने के लिए कहा। आखिर में राधारानी को खुश करने के लिए, भगवान कृष्ण ने सभी पवित्र स्थानों का पानी एक ही स्थान पर एकत्र किया। कृष्णा ने अपने कमल चरणों को जमीन पर मारा जिससे उस स्थान पर सभी अलौकिक और पवित्र नदियों का पानी एकत्रित हो गया, और उस समय से, यह स्थान श्याम कुंड के रूप में जाना जाता है। यह देखकर, राधारानी ने अपनी चूड़ियों के साथ जमीन खोदकर श्याम कुंड के पास एक और कुंड बनाया। सभी पवित्र जल निकायों ने राधा जी से अनुरोध किया कि वे बनाए गए कुंड में प्रवेश करें। इसलिए, इस तरह राधा कुंड बनाया गया था। राधा कुंड के तट पर, राधा रानी के आठ प्रमुख सखियों के नाम पर कुल आठ कुंड भी स्थित हैं।

टिप्पणियाँ

  • 26/10/2021

    Radha kund me mahane se pehle kya ko petha deya jata h. Kya uski koi pujan bhi kya jata h. Ya nahi ya esea hi de deya jata h. Please ?? help me .

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