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सफला एकादशी २०२१

सफला एकादशी व्रत पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन किया जाता है. हिन्दू धर्म के व्रत और त्योहार शुरु होने वाले हैं। इस बार शुरूआती महीने की 09 जनवरी 2021 को सफला एकादशी पड़ रही है और साल के आख़िरी में सफला एकादशी 30 दिसंबर 2021 को है। बता दें कि सफला एकादशी साल में आती है। हालांकि आपको बता दें कि हिन्दू धर्म के सभी व्रत एवं त्योहार हिन्दू कैलेंडर की तिथियों पर आधारित होता हैं। सफलाएकादशी के दिन श्रीहरि के विभिन्न नाम और मंत्रों का उच्चारण करते है और फलों के द्वारा इनकी पूजा की जाती है। साथ ही रात को वैष्णवों के साथ नाम-संकीर्तन करते हुए जगना चाहिए। एकादशी का रात्रि में जागरण करने से जो फल प्राप्त होता है, वह हजारों वर्ष तक तपस्या करने पर भी नहीं मिलता। एकादशी व्रत सभी सुखों को देने वाले माने गए हैं।

सफला एकादशी २०२१
दिनांक शनिवार, 09 जनवरी 2021
तिथिKrishna Paksha Ekadashi
हिंदू महीनापौष
देवता भगवान विष्णु
आवृत्तिसालाना
एकादशी व्रत करने से व्यक्ति को भगवान विष्णु की कृपा भी प्राप्त होती है। आइए जानते हैं कि नववर्ष 2021 में सफला एकादशी व्रत कब पड़ रहे हैं।
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सफला एकादशी कब है?

सफला एकादशी मुहूर्त : 9 जनवरी, 2021
जनवरी को प्रातः 06:56 से प्रातः 09:04 तक
08 जनवरी 2021 को एकादशी तीथि शुरू होती है साय 09:40
एकादशी तिथि समाप्त साय  - 07:17,  09 जनवरी, 2021

सफला एकादशी मुहूर्त 30 दिसंबर, 2021
31 दिसंबर को प्रातः 06:54 से प्रातः 09:01 तक
एकादशी तीथि शुरू - 29: 2021 को प्रातः 04:12 बजे
एकादशी तीथि समाप्त - 30 दिसंबर, 2021 को दोपहर 01:40 बजे


सफला एकादशी पूजा विधि

सफला एकादशी का व्रत रखने वाले भक्त इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इस व्रत की विधि इस प्रकार है-

- सुबह के स्नान के बाद व्रत रखें और भगवान को धूप, दीप, फल और पंचामृत आदि अर्पित करना चाहिए।
- नारियल, सुपारी, आंवला अनार और लौंग आदि से भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए।
- इस दिन रात्रि में जागरण कर श्री हरि के नाम के भजन करने का बड़ा महत्व है।
- व्रत के अगले दिन द्वादशी पर किसी जरुरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन कराकर, दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करना चाहिये।

सफला एकादशी पर ये कार्य ना करें

- एकादशी के दिन बिस्तर पर नहीं, जमीन पर सोना चाहिए।
- मांस, नशीली वस्तु, लहसुन और प्याज का सेवन का सेवन न करें।
- सफला एकादशी की सुबह दातुन करना भी वर्जित माना गया है।
- इस दिन किसी पेड़ या पौधे की की फूल-पत्ती तोड़ना भी अशुभ माना जाता है।

सफला एकदशी का महत्व

सफला एकदशी का महत्व धार्मिक ग्रंथों में धर्मराज युधिष्ठिर और भगवान कृष्ण के बीच बातचीत के रूप में वर्णित है। मान्यता है कि 1 हजार अश्वमेघ यज्ञ मिल कर भी इतना लाभ नहीं दे सकते जितना सफला एकदशी का व्रत रख कर मिल सकता हैं। सफला एकदशी का दिन एक ऐसे दिन के रूप में वर्णित है जिस दिन व्रत रखने से दुःख समाप्त होते हैं और भाग्य खुल जाता है। सफला एकदशी का व्रत रखने से व्यक्ति की सारी इच्छाएं और सपने पूर्ण होने में मदद मिलती है।

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