arkadaşlık sitesi porno adana escort izmir escort porn esenyurt escort ankara escort bahçeşehir escort सर्वपितृ अमावस्या: पितृ पक्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन !-- Facebook Pixel Code -->

सर्वपितृ अमावस्या: पितृ पक्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन

सर्व पितृ अमावस्या पितृ पक्ष का अंतिम दिन है और इस अवधि का सबसे महत्वपूर्ण दिन भी है। इसे सर्वपितृ अमावस्या, सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या, पितृ अमावस्या, पेड्डला अमावस्या, महालय अमावस्या या महालय के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष सर्व पितृ अमावस्या 06 अक्टूबर बुधवार को पड़ रही है।

जानिए कैसे है सर्वपितृ अमावस्या पितरों को मोक्ष देना का सबसे महत्व पूर्ण दिन-

पितृ पक्ष की अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या कहते हैं। इस तिथि पर कुल के सर्व पितरों को उद्देशित कर श्राद्ध करते हैं। वर्ष भर में सदैव पितृ पक्ष की अन्य तिथियों पर श्राद्ध करना संभव हो, तब भी इस तिथि पर सबके लिए श्राद्ध करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि पितृ पक्ष की यह अंतिम तिथि है।


आश्विन के 'कृष्ण पक्ष' को पितृ पक्ष कहते हैं। यह पक्ष पितरों को प्रिय है। पितृ पक्ष की कालावधि में पितर पृथ्वी के निकट आते हैं। इन अतृप्त आत्माओं को (पितरों को) शांत करने के लिए इस काल में श्राद्ध विधि की जाती है। इस पक्ष में पितरों का महालय श्राद्ध करने से वे वर्ष भर तृप्त रहते हैं।

क्यों है श्राद्ध के लिए अमावस्या बहु-महत्वपूर्ण -

यह बहुत महत्वपूर्ण बात है। जिस तिथि में आपके पूर्वज का देहावसान हुआ है उसी तिथि में श्राद्ध करना चाहिए। यदि आपको तिथि ज्ञात नहीं है या किसी कारणवश उस तिथि को श्राद्ध नहीं कर पाते हैं तो पितृ अमावस्या, जिसे पितृ विसर्जन भी कहते हैं, को श्राद्ध कर सकते हैं। इसे सर्व पितृ श्राद्ध तिथि या योग भी कहा जाता है।

महिलाओं के लिए मातामही श्राद्ध अर्थात नवमी तिथि अधिक महत्वपूर्ण है। श्राद्ध अपने घर पर या नदी के तट पे या गया जी में करें। श्राद्ध कर्म के दिन व्रत रहकर भोजन बनाके ब्राम्हणों को खिलाने के बाद ही भोजन करें। श्राद्ध कर्म से पितरों का आशीर्वाद आपको खुशहाल रखेगा।

उसी प्रकार, शास्त्र में बताया गया है कि श्राद्ध के लिए अमावस्या की तिथि अधिक योग्य है, जबकि पितृ पक्ष की अमावस्या सर्वाधिक योग्य तिथि है।

पितृ पक्ष की अमावस्या पितरों के नाम की धूप देने से मन, शरीर और घर में शांति की स्थापना होती है। रोग और शोक मिट जाते हैं। गृहकलह और आकस्मिक घटना-दुर्घटना नहीं होती। घर के भीतर व्याप्त सभी तरह की नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकलकर घर का वास्तुदोष मिट जाता है।

ग्रह-नक्षत्रों से होने वाले छिटपुट बुरे असर भी धूप देने से दूर हो जाते हैं। श्राद्ध पक्ष में 16 दिन ही दी जाने वाली धूप से पितृ तृप्त होकर मुक्त हो जाते हैं तथा पितृ दोष का समाधान होकर पितृयज्ञ भी पूर्ण होता है।

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