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शुक्र प्रदोष व्रत 2022 तिथियां, व्रत कथा और विधि

शुक्र प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि को प्रदोष काल के दौरान मनाया जाता है। यदि प्रदोष व्रत शुक्रवार को पड़ता है, तो इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है।
अन्य नामभृगु वारा प्रदोषम
तिथित्रयोदशी
दिनशुक्रवार
देवताभगवान शिव
तिथियाँ13 मई 2022
27 मई 2022
23 सितंबर 2022
07 अक्टूबर 2022
विधिपूजा, उपवास, जागरण, दान, और प्रार्थना
लाभशादी के लिए बहुत मददगार। जीवन में भाग्य और विलासिता लाता है

यदि प्रदोष व्रत शुक्रवार को पड़ता है तो इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। इसे भृगुवारा प्रदोषम भी कहा जाता है। इस व्रत रखना विवाह के लिए बहुत सहायक होता है। यह जीवन में भाग्य और सुख भी लाता है। शुक्र प्रदोष व्रत की कथा इस प्रकार है;

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शुक्र प्रदोष व्रत कथा

shukra pradosh vrat

प्राचीनकाल की बात है, एक नगर में तीन मित्र रहते थे – एक राजकुमार, दूसरा ब्राह्मण कुमार और तीसरा धनिक पुत्र। राजकुमार व ब्राह्मण कुमार का विवाह हो चुका था। धनिक पुत्र का भी विवाह हो गया था, किन्तु गौना शेष था। एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे। ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा- ‘नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है।’ धनिक पुत्र ने यह सुना तो तुरन्त ही अपनी पत्‍नी को लाने का निश्‍चय किया।

माता-पिता ने उसे समझाया कि अभी शुक्र देवता डूबे हुए हैं। ऐसे में बहू-बेटियों को उनके घर से विदा करवा लाना शुभ नहीं होता। किन्तु धनिक पुत्र नहीं माना और ससुराल जा पहुंचा। ससुराल में भी उसे रोकने की बहुत कोशिश की गई, मगर उसने जिद नहीं छोड़ी। माता-पिता को विवश होकर अपनी कन्या की विदाई करनी पड़ी।

ससुराल से विदा हो पति-पत्‍नी नगर से बाहर निकले ही थे कि उनकी बैलगाड़ी का पहिया अलग हो गया और एक बैल की टांग टूट गई। दोनों को काफी चोटें आईं फिर भी वे आगे बढ़ते रहे। कुछ दूर जाने पर उनकी भेंट डाकुओं से हो गई। डाकू धन-धान्य लूट ले गए। दोनों रोते-पीटते घर पहूंचे। वहां धनिक पुत्र को सांप ने डस लिया। उसके पिता ने वैद्य को बुलवाया। वैद्य ने निरीक्षण के बाद घोषणा की कि धनिक पुत्र तीन दिन में मर जाएगा।

जब ब्राह्मण कुमार को यह समाचार मिला तो वह तुरन्त आया। उसने माता-पिता को शुक्र प्रदोष व्रत करने का परामर्ष दिया और कहा- ‘इसे पत्‍नी सहित वापस ससुराल भेज दें। यह सारी बाधाएं इसलिए आई हैं क्योंकि आपका पुत्र शुक्रास्त में पत्‍नी को विदा करा लाया है। यदि यह वहां पहुंच जाएगा तो बच जाएगा।’ धनिक को ब्राह्मण कुमार की बात ठीक लगी। उसने वैसा ही किया। ससुराल पहुंचते ही धनिक कुमार की हालत ठीक होती चली गई। शुक्र प्रदोष के माहात्म्य से सभी घोर कष्ट टल गए।

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लाभ: शुक्र प्रदोष व्रत विवाह के लिए बहुत सहायक होता है। यह जीवन में भाग्य और विलासिता भी लाता है।

अन्य प्रदोष व्रत

रवि प्रदोष व्रत (भानु प्रदोषम)
सोम प्रदोष व्रत (सोम प्रदोषम)
मंगल प्रदोष व्रत (भौम प्रदोषम)
बुद्ध प्रदोष व्रत (सौम्य वारा प्रदोषम)
गुरु प्रदोष व्रत (गुरु वारा प्रदोषम)
शनि प्रदोष व्रत (शनि प्रदोषम)

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