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सोम प्रदोष व्रत 2022 तिथियां, व्रत कथा और विधि

सोम प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि को प्रदोष काल के दौरान मनाया जाता है। यदि प्रदोष व्रत सोमवार को पड़ता है, तो इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है।
अन्य नामसोम प्रदोषम
तिथित्रयोदशी
दिन सोमवार
देवताभगवान शिव
तिथियाँ14 फरवरी 2022
28 फरवरी 2022
11 जुलाई 2022
25 जुलाई 2022
21 नवंबर 2022
05 दिसंबर 2022
विधिपूजा, उपवास, जागरण, दान, और प्रार्थना
लाभइच्छापूर्ति और घर में शांति

यदि प्रदोष व्रत सोमवार को पड़ता है, तो इसे सोम प्रदोष व्रत या सोम प्रदोषम कहा जाता है। सोम प्रदोषम का बहुत ही महत्व होता है। इस दिन व्रत को पूरा करने से सभी मनोकामनांए पूरी होती हैं। सोम प्रदोष व्रत कथा इस प्रकार है।

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सोम प्रदोष व्रत कथा

सोम प्रदोष व्रत

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक एक नगर में एक ब्राह्मणी रहती थी। उसके पति का स्वर्गवास हो गया था। उसका कोई आश्रयदाता नहीं था इसलिए प्रातः होते ही वह अपने पुत्र के साथ भीख मांगने निकल पड़ती थी। भिक्षा से ही वह स्वयं और उसके पुत्र का पेट पालती थी। एक दिन ब्राह्मणी घर लौट रही थी तो राह में उसे एक लड़का घायल अवस्था में कराहता हुआ मिला। ब्राह्मणी दयावश उसे अपने घर ले आई। वह लड़का विदर्भ का राजकुमार था। शत्रु सैनिकों ने उसके राज्य पर आक्रमण कर उसके पिता को बंदी बना लिया था और राज्य पर नियंत्रण कर लिया था इसलिए वह मारा-मारा फिर रहा था। राजकुमार ब्राह्मण-पुत्र के साथ ब्राह्मणी के घर में रहने लगा। एक दिन अंशुमति नामक एक गंधर्व कन्या ने राजकुमार को देखा तो वह उस पर मोहित हो गई। अगले दिन अंशुमति अपने माता-पिता को राजकुमार से मिलाने लाई। उन्हें भी राजकुमार भा गया। कुछ दिनों बाद अंशुमति के माता-पिता को शंकर भगवान ने स्वप्न में आदेश दिया कि राजकुमार और अंशुमति का विवाह कर दिया जाए। उन्होंने वैसा ही किया। ब्राह्मणी प्रदोष व्रत करती थी। उसके व्रत के प्रभाव और गंधर्वराज की सेना की सहायता से राजकुमार ने विदर्भ से शत्रुओं को खदेड़ दिया और पिता के राज्य को फिर से प्राप्त कर खुशी से रहने लगा। राजकुमार ने ब्राह्मण-पुत्र को अपना राजा बनाया। ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत के महात्म्य से जैसे राजकुमार और ब्राह्मण-पुत्र के दिन फिरे, वैसे ही शंकर भगवान अपने सभी भक्तों के दिन भी फेरते हैं। अतः सोम प्रदोष का व्रत करने वाले सभी भक्तों को यह कथा जरुर पढ़नी अथवा सुननी चाहिए।

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लाभ: सोम प्रदोष व्रत सभी इच्छाओं को पूरा करने और घर में शांति लाने में मदद करता है।

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