ब्रजेश्‍वरी देवी मंदिर

देश: इंडिया

राज्य : हिमाचल प्रदेश

इलाका / शहर / गांव:

पता :Mandir Road, New Kangra, Kangra, Himachal Pradesh 176001, India

परमेश्वर : देवी

वर्ग : प्रसिद्ध मंदिर

दिशा का पता लगाएं : नक्शा

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ब्रजेश्‍वरी देवी मंदिर

ब्रजेश्‍वरी देवी का मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में नगरकोट नाम के स्‍थान पर स्‍थित है ब्रजेश्‍वरी देवी का मंदिर। इसीलिए इस मंदिर को नगर कोट की देवी, कांगड़ा देवी और नगर कोट धाम भी कहा जाता है। देवी के 51 शक्‍तिपीठों में से एक इस स्‍थान को अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण माना जाता है इसीलिए इसका वर्णन माता दुर्गा की स्तुति में भी किया गया है। ऐसा माना जाता है इस मंदिर का निर्माण पांडव द्वारा किया गया था।

मंदिर की कथा:-

पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी सती ने जब उनके पिता दक्ष द्वारा किये यज्ञ में अपमानित होने के कारण उसी यज्ञकुण्ड में अपने प्राण त्याग दिये थे, तब क्रोधित भगवान शंकर उनके मृत शरीर को लेकर पूरे ब्रह्मांड के चक्कर लगाते हुए तांडव करना प्रारंभ कर दिया। उनके क्रोध को शांत करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया था। उन्‍हीं अंगों में से देवी का बांया वक्ष इस स्थान पर गिरा था। तभी से ये स्‍थान देवी के शक्‍तिपीठ के रूप में स्‍वीकृत किया गया।

इस मंदिर में माता एक पिण्डी के रुप में विराजमान हैं, यहीं पर देवी की पिंडी के साथ भगवान भैरव की भी एक चमत्कारी मूर्ति स्‍थापित है। कहते हैं कि जब इस स्‍थान पर कोई मुसीबत आने वाली होती है तो भैरव की मूर्ति से आंसू और पसीना बहने लगता है। भक्‍तों का दावा है कि यहां पर ये चमत्कार कई बार देखा है। कहते हैं कि 1976-77 में इस मूर्ति में आंसू व शरीर से पसीना निकला था, उसी के बाद कांगड़ा में भीषण अग्निकांड हुआ था और काफी दुकानें जलकर राख हो गई थीं। इसके बाद से ही आपदा को टालने के लिए यहां हर वर्ष नवंबर व दिसंबर के मध्य में भैरव जयंती मनाई जाती है। इस दौरान पाठ और हवन किया जाता है।

मंदिर तक पहुँचने का मार्ग - 

हवाई जहाज द्वारा:

पर्यटक और भक्त जो हवा से उड़ते हैं, वे 'गगल' पहुंच सकते हैं, जो इस क्षेत्र का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है। यह मूल रूप से पवित्र शहर धर्मशाला से 13 किमी और कंगड़ा से 8 किमी की दूरी पर स्थित है।

रेल द्वारा:-

निकटतम रेलवे स्टेशन कांगड़ा में स्थित है जो धर्मशाला से 17 किमी की दूरी पर है। यह पठानकोट के साथ एक संकीर्ण गेज लाइन के माध्यम से जुड़ा हुआ है। निकटतम व्यापक अनुमानित रेल हेड पठानकोट पर स्थित है जो धर्मशाला से लगभग 88 किमी दूर है। और पठानकोट भारत के सभी प्रमुख शहरों / कस्बों से जुड़ा हुआ है।

सड़क / कार द्वारा:-

तीर्थयात्रियों और आगंतुक नियमित रूप से बसों और अन्य आसान परिवहन सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं, श्री वाजेश्वरी देवी मंदिर से दिल्ली, चंडीगढ़ और पठानकोट तक।

इतिहास:

पौराणिक कथाओं के अनुसार  मूल मंदिर महाभारत के समय पांडवों द्वारा बनाया गया था। और पौराणिक कथाओं का कहना है कि एक दिन पांडवों ने अपने सपनों में देवी दुर्गा को देखा और उन्होंने उन्हें बताया कि वह नागकोट गांव में स्थित हैं और यदि वे खुद को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो उन्हें मंदिर में पवित्र स्थान होना चाहिए, उसी रात उन्होंने नागकोट गांव में उनके लिए एक शानदार मंदिर बनाने का फैसला लिया। पौराणिक कथाओं का कहना है कि मुस्लिम आक्रमणकारियों ने इस मंदिर को कई बार ध्वस्त किया था। और  गजनावी ने इस मंदिर को अतीत में कम से कम 5 बार लूट लिया था, और अधिक सोने के टन और शुद्ध चांदी से बने कई भूत शामिल थे। मंदिर को विनाशकारी भूकंप से नष्ट कर दिया गया था और बाद में इसे 1909 में सरकार द्वारा पुनर्निर्मित किया गया था।

इतिहास

नक्शा

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