महामाया मंदिर

देश: इंडिया

राज्य : असम

इलाका / शहर / गांव:

पता :Mahamaya Temple Alupara PT.2 Bogribari, Assam 783349 India

परमेश्वर : देवी

वर्ग : प्रसिद्ध मंदिर

दिशा का पता लगाएं : नक्शा

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महामाया मंदिर

भारत वर्ष के आसाम राज्य में स्थित माँ महामाया का भव्य मंदिर है माना जाता है कि जो भजि भक्त मंदिर की चौखट पर आया वो खाली हाथ कभी भी नहीं गया। जितनी अनोखी इस मंदिर की मान्यता है। उतनी अनोखी इस मंदिर की कहानी है। यहां बैठी मां महामाया देवी के आशीर्वाद से हर संकट दूर हो जाता है। कुंवारी लड़कियों को सौभाग्य की प्राप्ति होती है। लोगों के सभी कष्ट दूर हो जाते है।

माया मंदिर स्नान घाट: 
मुख्य महामाया मंदिर से कुछ किलोमीटर दूर स्थित महामाया देवी की पूजा करने के लिए आगंतुक और पर्यटक महामाया सनांगत  मंदिर भी जाते हैं और जाते हैं। पिछले दिनों में, यह एक धारणा है कि इस स्थान पर देवी स्नान करती थी। यही कारण है कि, उस समय से, इस स्थान को महामाया सनाघाट के नाम से जाना जाने लगा।

महामाया की पौराणिक कथा:
देवी मां के इस मंदिर को 51 शक्ति पीठ में एक माना जाता है। आदिशक्ति मां महामाया देवी की पवित्र पौराणिक नगरी रतनपुर का इतिहास प्राचीन एवं गौरवशाली है। त्रिपुरी के कलचुरियों की एक शाखा ने रतनपुर को अपनी राजधानी बनाकर दीर्घकाल तक छत्तीसगढ़ में शासन किया। राजा रत्नदेव प्रथम ने मणिपुर नामक गांव को रतनपुर नाम देकर अपनी राजधानी बनाया। श्री आदिशक्ति मां महामाया देवी मंदिर का निर्माण राजा रत्नदेव प्रथम द्वारा 11वी शताब्दी में कराया गया था। मंदिर के निर्माण की है कुई किवदंतिया में राजादेव रत्नदेव प्रथम मणिपुर नामक गांव में रात्रि विश्राम एक वट वृक्ष पर किया। अर्धरात्रि में जब राजा की आंख खुली तब उन्होंने वट वृक्ष के नीचे आलौकिक प्रकाश देखा यह देखकर चमत्कृत हो गए कि वहां आदिशक्ति श्री महामाया देवी की सभा लगी हुई है। इतना देखकर वे अपनी चेतना खो बैठे। सुबह होने पर वे अपनी राजधानी तुम्मान खोल लौट गए और रतनपुर को अपनी राजधानी बनाने का निर्णय लिया। 1050 में श्री महामाया देवी का भव्य मंदिर निर्मित कराया। माना जाता है कि नवरात्र में यहां की गई पूजा निष्फल नहीं जाती है। नगर शैली में बना है मंदिर का मंडप नगर शैली में बने मंदिर का मण्डप 16 स्तम्भों पर टिका हुआ है। भव्य गर्भगृह में मां महामाया की साढ़े तीन फीट ऊंची दुर्लभ प्रस्तर प्रतिमा स्थापित है। मान्यताओं के अनुसार मां की प्रतिमा के पृष्ठ भाग में मां सरस्वती की प्रतिमा है जो विलुप्त मानी जाती है।

पूजा समय:  

सुबह: 06:00 Am

सांय: 08:30 Pm

इतिहास

पूजा समय

दिन सुबह शाम
e 6.00 AM 8.30 PM

नक्शा

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