तारापीठ मंदिर

देश: इंडिया

राज्य : पश्चिम बंगाल

इलाका / शहर / गांव:

पता :V.I.P Road, Tarapith, Birbhum, West Bengal 731233, India

परमेश्वर : देवी

वर्ग : प्रसिद्ध मंदिर

दिशा का पता लगाएं : नक्शा

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तारापीठ मंदिर

ऋषि वशिष्ठ ने इस स्थान पर तारा के रूप में देवी सती को देखा था और इसलिए तब से उनकी पूजा की जाती है। काली घाट शक्तिपीठ के साथ ही पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में में एक और शक्तिपीठ स्थापित है जो माँ तारा देवी को समर्पित है। स्थानीय भाषा में तारा का अर्थ होता है आँख और पीठ का अर्थ है स्थल अत: यह मंदिर आँख के स्थल के रूप में पूजा जाता है पुराण कथाओ के अनुसार माँ सती के नयन (तारा ) इसी जगह गिरे थे और इस शक्तिपीठ की स्थापना हुई। यह मंदिर तांत्रिक क्रियाकलापो के लिए भी जाना जाता है। प्राचीन काल में यह जगह चंदीपुर के नाम से पुकारी जाती है अब इसे तारापीठ कहते है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार भगवान शिव ने ब्रह्मांड को बचाने के लिए ब्रह्माण्ड महासागरों द्वारा उभरा जहर पी लिया था, अपने गले में तीव्र जलने से छुटकारा पाने के लिए, सती - तारा के रूप में स्तन ने शिव को अपने गले में जहर के प्रभाव से छुटकारा दिलाया। एक और स्थानीय वर्णन यह है कि वशिष्ठ ने सती की पूजा के लिए यह जगह चुना क्योंकि इसे पहले ही तारापीथ के नाम से जाना जाता है।

मंदिर तक कैसे पहुंचे:

तारापीठ कोलकाता से 264 किमी की दूरी पर, शांतिनिकेतन से 96 किमी, दुर्गापुर से 116 किमी, देवघर से 150 किमी और मायापुर से 205 किमी दूर है।

बस द्वारा: राज्य की स्वामित्व वाली बसें तारापीथ को कोलकाता के एस्प्लानेड / धर्मतल्ला बस स्टैंड या पड़ोसी शहरों के साथ जोड़ती हैं।

हवाई जहाज द्वारा: निकटतम हवाई अड्डा तालापिथ से 225 किमी की दूरी पर कोलकाता में है। कोई हवाई अड्डे से तारापीठ तक टैक्सी सेवाओं का लाभ उठा सकता है। कोलकाता, मुंबई और अन्य प्रमुख हवाई अड्डे से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

ट्रेन द्वारा: निकटतम रेलवे स्टेशन रामपुर से लगभग 9 किमी की दूरी पर रामपुरहट है। तारापीठ से टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं। रामपुरहट हावड़ा और सियालदाह से जुड़ा हुआ है।

इतिहास:

तारापीठ मंदिर ना ही ज्यादा बड़ा है ना ही छोटा है। मंदिर निर्माण में मुख्यत: संगमरमर मार्बल काम में लिए गये है।  छत ढ़लानदार है, जिसे ढोचाला कहते है। मंदिर में द्वार अच्छी तरह से सुन्दर कारिगरी का भारतीय कला का नमुना पेश करते है।

माँ तारा की मूर्ति के मुख पर तीन आँखे है और मुख सिंदुर से रंगा हुआ है। साथ ही हर अनुपम छवि सजाई जाती है। पास ही शिव प्रतिमा है। मंदिर में प्रसाद के रूप में माँ की स्नान कराई जाने वाली जल , शराब का प्रसाद दिया जाता है।

पूजा समय

सोमवार-रविवार

प्रातः काल- 06:00

सांय काल- 09:00

इतिहास

पूजा समय

दिन सुबह शाम
Monday-Sunday 06:00 Am 09:00 Pm

नक्शा

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