arkadaşlık sitesi porno adana escort izmir escort porn esenyurt escort ankara escort bahçeşehir escort परमा एकादशी व्रत कथा, तिथि और पूजा विधान !-- Facebook Pixel Code -->

पुरुषोत्तम (अधिक) मास की परमा एकादशी का महात्मय

पुरुषोत्तम मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को परमा या हरिवल्लभ एकादशी कहते हैं | इस दिन नरोत्तम भगवान विष्णु की पूजा से दुर्लभ सिद्धियों की प्राप्ति होती है | जिस प्रकार संसार में चार पैरवालों में गौ, देवताओं में इन्द्रराज श्रेष्ठ हैं, उसी प्रकार मासों में पुरुषोत्तम मास उत्तम है इस मास में पंचरात्रि अत्यन्त पुण्य देनेवाली है पुरुषोत्तम मास में दो एकादशी होती है जो परमा और पद्मिनी एकादशी के नाम से जानी जाती है। इस महीने में पुरुषोत्तम एकादशी श्रेष्ठ है। उसके व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और पुण्यमय लोकों की प्राप्ति होती है इस बार परमा एकादशी 10th जून को पड़ रही है। इस दिन व्रत और दान को उत्तम बताया गया है।


परमा (हरिवल्लभ)एकाद्शी व्रत कथा

प्राचीन काल में वभ्रु वाहन नामक एक दानी तथा प्रतापी राजा था| वह प्रतिदिन ब्राह्माणों को सौ गौए दान करता था| उसी के राज्य में प्रभावती नाम की एक बाल-विधवा रहती थी| जो भगवन श्री विष्णु की परम उपासिका थी| पुरुषोतम मास में नित्य स्नान कर विष्णु तथा शंकर की पूजा करती थी| परमा एकाद्शी अर्थात हरिवल्लभा एकादशी व्रत को कई वर्षों से निरंतर करती चली रही थी| दैवयोग से राजा वभ्रुवाहन और बाल-विधवा की एक ही दिन मृ्त्यु हुई, और दोनों साथ ही धर्मराज के दरबार में पहुंचे| धर्मराज ने उठ्कर जितना स्वागत बाल-विधवा का किया, उतना सम्मान राजा का नहीं किया| राजा को अपने दान-पुन्य पर अत्यधिक भरोसा था| वह आश्चर्य चकित हुआ इसी समय चित्रगुप्त ने इसका कारण पूछा तो धर्मराज ने बाल-विधवा के द्वारा किये जाने वाले परमा एकादशी के व्रत के विषय में बताया|

परमा (हरिवल्लभ) एकादशी व्रत पूजन विधि

·  इस व्रत के दिन भगवान विष्णु का ध्यान करके उनके निमित्त व्रत रखना चाहिए।

·  एकादशी व्रत करने वाले व्यक्ति को एकाद्शी के दिन प्रात: उठना चाहिए|

·  प्रात: काल की सभी क्रियाओं से मुक्त होने के बाद उसे स्नान कार्य में मिट्टी, तिल, कुश और आंवले के लेप का प्रयोग करना चाहिए| इस स्नान को किसी पवित्र नदी, तीर्थ या सरोवर अथवा तालाब पर करना चाहिए|

·  स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करने चाहिए

·  व्रत करने वाले को घी का दीपक जलाकर फल, फूल, तिल, चंदन एवं धूप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए।

·  इस व्रत में विष्णु सहस्रनाम एवं विष्णु स्तोत्र के पाठ का बड़ा महत्व है।

·  व्रत करने वाले को जब भी समय मिले इनका पाठ करना चाहिए।

·  सात्विक भोजन करना चाहिए| सात्विक भोजन में मांस, मसूर, चना, शहद, शाक और मांगा हुआ भोजन नहीं करना चाहिए|

यह व्रत क्योकिं 24 घंटे की अवधि का होता है इसलिये कुछ कठिन होता है| परन्तु मानसिक रुप से स्वयं को इस व्रत के लिये तैयार करने पर व्रत को सहजता के साथ किया जा सकता है| उसके व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और पुण्यमय लोकों की प्राप्ति होती है।

जो लोग किसी कारण यह व्रत नहीं कर सकते उन्हें व्रत का पुण्य प्राप्त करने के लिए धर्मिक पुस्तक, अनाज, फल, मिठाई का दान करना चाहिए।

व्रत कथा

आगामी त्यौहार


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