arkadaşlık sitesi porno adana escort कालाष्टमी व्रत कथा !-- Facebook Pixel Code -->

शिव पुराण में ऐसा उल्लेख है कि देवताओं ने ब्रह्मा और विष्णु जी से बारी-बारी से पूछा कि ब्रह्मांड में सबसे श्रेष्ठ कौन हैं. इस सवाल के जवाब में दोनों ने स्वयं को सर्व शक्तिमान और श्रेष्ठ बताया. इस बात पर दोनों के बीच युद्ध होने लगा. देवताओं ने यह दृश्य देखकर वेदशास्त्रों से इसका जवाब मांगा. वेदशास्त्रों से देवताओं को उत्तर मिला कि जिनके भीतर चराचर जगत, भूत, भविष्य और वर्तमान समाया हुआ है अनादि अंनत और अविनाशी हो, वह कोई और नहीं बल्कि भगवान रूद्र यानी कि भोलेनाथ ही हैं. लेकिन ब्रह्मा जी यह मानने को तैयार नहीं थे और उनके 5वें मुख ने भगवान शंकर के बारे में बुरा-भला कहना शुरू कर दिया. यह सब देखकर वेद बहुत दुखी हुए. तभी दिव्यज्योति के रूप में रूद्र प्रकट हो गए



ब्रह्मा जी रुद्र के प्रकट होने के बाद भी आत्ममुग्ध रहे और खुद की तारीफ करते रहे. रूद्र को कहा तुम मेरे ही सिर से पैदा हुए हो और ज्यादा रुदन करने के कारण मैंने तुम्हारा नामरुद्ररख दिया. तुम्हें मेरी सेवा करनी चाहिए और मेरी आज्ञा का पालन करना चाहिए. ब्रह्मा जी की बातें सुनकर भगवान शंकर नाराज हो गए और क्रोध में ही उन्होंने भैरव को उत्पन्न किया. भगवान शंकर ने भैरव को आदेश दिया कि तुम ब्रह्मा पर शासन करो. यह बात सुनकर भैरव ने अपने बाएं हाथ की सबसे छोटी अंगुली के नाखून से ब्रह्मा के 5वें सिर को काट दिया. ब्रह्मा के 5वें सिर ने ही भगवान शंकर के लिए अपशब्द कहा था. इसके बाद भगवान शंकर ने भैरव को काशी जाने के लिए कहा और ब्रह्म हत्या से मुक्ति प्राप्त करने का रास्ता बताया. भगवान शंकर ने उन्हें काशी का कोतवाल बना दिया. इसलिए आज भी काशी में भैरव कोतवाल के रूप में पूजे जाते हैं. विश्वनाथ के दर्शन से पहले इनका दर्शन होता है. अन्यथा विश्वनाथ का दर्शन अधूरा माना जाता है

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