साईं व्रत का विधान

साईं व्रत कोई भी कर सकता है. साईं बाबा जात-पांत या और कोई भेदभाव नहीं मानते थे. उनका कहना था, 'सबका मालिक एक है'. यह व्रत किसी भी गुरुवार को साईं बाबा का नाम लेकर शुरू किया जा सकता. सुबह या शाम को साईं बाबा की तस्वीर या मूर्ति की पूजा की जाती है. किसी आसन पर पीला कपड़ा बिछाकर उस पर साईं बाबा की तस्वीर रखें. पूजा के लिए पीले फूल या हार का प्रयोग करें. धूप-दीप जलाकर साईं व्रत की कथा पढ़ना चाहिए. पूजा के बाद प्रसाद बांटना चाहिए. प्रसाद के रूप में फल या मिठाई बांटी जा सकती है. 

शिरडी के साईं बाबा के व्रत की संख्या 9 हो जाने पर अंतिम व्रत के दिन पांच गरीब व्यक्तियों को भोजन कराना चाहिए और दान करना चाहिए. इस तरह इस व्रत का समापन होना चाहिए.

साईं व्रत की कथा

कोकिला बहन और उनके पति महेशभाई शहर में रहते थे. दोनों में एक-दूसरे के प्रति प्रेम-भाव था, परन्तु महेशभाई का स्वभाव झगड़ालू था. दूसरी तरफ कोकिला बहन बहुत ही धार्मिक स्त्री थी, भगवान पर विश्वास रखती. धीरे-धीरे उनके पति का धंधा-रोजगार ठप हो गया. कुछ भी कमाई नहीं होती थी. महेशभाई अब दिन-भर घर पर ही रहते और अब उन्होंने गलत राह पकड़ ली. अब उनका स्वभाव पहले से भी अधिक चिड़चिड़ा हो गया.

एक दिन दोपहर को एक वृद्ध महाराज दरवाजे पर आकार खड़े हो गए. चेहरे पर गजब का तेज था और आकर उन्होंने दाल-चावल की मांग की. कोकिला बहन ने दल-चावल दिए और दोनों हाथों से उस वृद्ध बाबा को नमस्कार किया. वृद्ध ने कहा साईं सुखी रखे. कोकिला बहन ने कहा महाराज सुख मेरी किस्मत में नहीं है और अपने दुखी जीवन का वर्णन किया. महाराज ने श्री साईं के व्रत के बारें में बताया 9 गुरुवार फलाहार या एक समय भोजन करना, हो सके तो बेटा साईं मंदिर जाना, घर पर साईं बाबा की 9 गुरुवार पूजा करना. साईं व्रत करना और विधि से उद्यापन करना भूखे को भोजन देना, साईं बाबा तेरी सभी मनोकामना पूर्ण करेंगे, साईं बाबा पर अटूट श्रद्धा रखना जरूरी है.

कोकिला बहन ने भी गुरुवार का व्रत लिया. 9 वें गुरुवार को गरीबों को भोजन कराया. उनके घर से कलह दूर हुए. घर में बहुत ही सुख-शांति हो गई. महेशभाई का स्वभाव ही बदल गया. उनका रोजगार फिर से चालू हो गया. थोड़े समय में ही सुख-समृधि बढ़ गई. दोनों पति-पत्नी सुखी जीवन बिताने लगे. एक दिन कोकिला बहन के जेठ-जेठानी सूरत से आए. बातों-बातों में उन्होंने बताया कि उनके बच्चे पढ़ाई नहीं करते, इसलिए परीक्षा में फेल हो गए हैं. कोकिला बहन ने 9 गुरुवार की महिमा बताई और कहा कि साईं बाबा की भक्ति से बच्चे अच्छी तरह अभ्यास कर पाएंगे. लेकिन इसके लिए साईं बाबा पर विश्वास रखना जरूरी है. साईं सबकी सहायता करते हैं. उनकी जेठानी ने व्रत की विधि बताने के लिए कहा. कोकिला बहन ने कहा उन्हें वह सारी बातें बताईं, जो खुद उन्हें वृद्ध महाराज ने बताई थी.

सूरत से उनकी जेठानी का थोड़े दिनों में पत्र आया कि उनके बच्चे साईं व्रत करने लगे हैं और बहुत अच्छे तरह से पढ़ते हैं. उन्होंने भी व्रत किया था. इस बारे में उन्होंने लिखा कि उनकी सहेली की बेटी शादी साईं व्रत करने से बहुत ही अच्छी जगह तय हो गई. उनके पड़ोसी का गहनों का डिब्बा गुम हो गया था, जो अब वापस मिल गया है. ऐसे कई अद्भुत चमत्कार हुए था. कोकिला बहन ने समझा कि साईं बाबा की महिमा अपार है.

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