माना जाता है माता अंजनी के उदर से हनुमान जी पैदा हुए। उन्हें बड़ी जोर की भूख लगी हुई थी इसलिये वे जन्म लेने के तुरंत बाद आकाश में उछले और सूर्य को फल समझ खाने की ओर दौड़े उसी दिन राहू भी सूर्य को अपना ग्रास बनाने के लिये आया हुआ था लेकिन हनुमान जी को देखकर उन्होंने इसे दूसरा राहु समझ लिया। तभी इंद्र ने पवनपुत्र पर वज्र से प्रहार किया जिससे उनकी ठोड़ी पर चोट लगी उसमें टेढ़ापन गया इसी कारण उनका नाम भी हनुमान पड़ा। इस दिन चैत्र शुक्ल पक्ष माह की पूर्णिमा होने से इस तिथि को हनुमान जयंती के रुप में मनाया जाता है। मंगलवार के दिन भगवान श्री हनुमान जी का जन्म दिवस होने के विषय में एक कथा प्रसिद्ध है:




व्रत कथा:

कहते है, कि जब अग्नि देव से मिली खीर, राजा दशरथ ने अपनी तीनों रानियों को बांट दी, तो कैकेयी के हाथ में से एक चील ने झपट्टा मारकर कुछ खीर मुंह में ले ली, और वापस उड गई. चील जब उडती-उडती देवी अंजना के आश्रम के ऊपर से उड रही तो, अंजना ऊपर देख रही थी. अंजना का मुंह खुला होने के कारण खीर का थोडा भाग उसके मुंह में आकर गिर गया और अनायास ही वह उस खीर को खा गई. जिससे उनके गर्भ से शिवजी के अवतार हनुमान जी ने जन्म लिया

संबंधित व्रत कथा

टिप्पणियाँ

अपनी टिप्पणी दर्ज करें



More Mantra × -
00:00 00:00