इस दिवाली पांच फैशनेबल रंगोली जरुर आजमायें

दिवाली पर हमलोग अपने घरो को अनेको तरह की दीपक, रंग–बिरंगे मोमबत्तिया, सुंदर सुंदर दीयों और उत्तम प्रकार की आकर्षक रंगोलियो से सजाते है! हम मुख्य रूप से यहाँ देखेंगे की इन उत्सवों में हम अपने “रंगोली” को कैसे अधिक  आकर्षक, शानदार शोभायमान बनाये और इसी तरह से हम इसे अत्यंत आकर्षक तरीके से पेश करने के लिए कड़ी मेहनत करते है. खासतौर पर लड़कियां अपने हाथो से विभिन्न सामग्रियों, शैलियों और भव्य तरीके से आकर्षक  रंगोली बनाने की चेष्टा करती है.

किवदंतियों में कहते है की अनेक प्रकार के पत्थरों से रंगोली बनाने के परम्परा सबसे पहले ‘महाराष्ट्रीयन’ लोगों द्वारा आरम्भ की गई और फिर भारत के विभिन्न राज्यों में यह आगे बढ़ता गया. यहाँ हम आपको विसंगत सामग्रियों और कल्पनाओं को प्रयोग में लाते हुए आकर्षक और शानदार रंगोली बनाने के कुछ प्रभावशाली तरीके बता रहे है.

फूलों की रंगोली

यह रंगोली के सबसे प्रसिद्ध और आसान रूपों में से एक है. हम एक बड़े घेरे वाले रंगोली बनाने के लिए बहुत सारे गाढे घेरे बना सकते है. हमलोग इन्हें एकाकी डिज़ाइन में बनाने के लिए गूगल पर विभिन्न प्रकार के मनोहर रंगोली को देख सकते है. इसके बीच में सुन्दर दीये रखकर कुछ नया प्रयोग कर सकते है और इसे हर तरह से सबसे अनोखा बना सकते है.

मनका और लकड़ी की रंगोली

अगर हमलोग कुछ कलात्मक और मन को मोह लेने वाले रंगोली ढूंढ रहे है तो घर के विभिन्न कोनों और किनारों में मनोहर रंगोली बनाने के लिए, हमें लकड़ी के ‘शिलाखंदो’ और कलात्मक ‘मनको’ का अवश्य प्रयोग करना चाहिए. अगर हम चाहे तो, बाजार से कृत्रिम रंगोली के समूह को खरीदकर अपने दरवाजें पर सजा सकते है.

अनाजों की रंगोली

बीते हुए समय में, लोग भारतीय परम्परा और संस्कृति को शानदार तरीके से दर्शाने के लिए, चावल, आटा, हल्दी और विभिन्न प्रकार के अनाजों से प्राचीन सुन्दर रंगोली बनाते थे. तथापि, अक्सर लोग जमीन पर रचना करने के लिए रंगीन चावल का प्रयोग करते थे. चावल भी एक सामग्री है और इससे  पतला घोल (पेस्ट) बनाकर सादा सफ़ेद रंगोली बनायी जाती थी.

कृत्रिम रंगोली

रंगोली एक ‘कला’ है और ‘रंग’ एक शानदार सांचे  के गठन में एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है ! इस प्रकार की रंगोली किशोरों और युवाओ के बीच काफी व्यवहारकृत  और प्रचलित हो गई है ! यह दुकानों में उपलब्द्ध है और हमलोग इसे ऑनलाइन भी खरीद सकते है !

तैरनेवाली रंगोली

कभी कभार हमारे घरों  में हमें रंगोली बनाने  के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता ! इस स्थिति में , हम तैरनेवाली (फ्लोटिंग) रंगोली का  विकल्प चुन सकते है. ये वाटर रंगोली एक आकर्षक रूप प्रदर्शित कर सकते है यदि ये अलग अलग मोमबती , फूल और आयल लैंप के साथ हो ! रंगोलियों  के ये समूह  पानी के कटोरे में तैरते है और उपर से देखने में काफी आकर्षक लगते है  !

Fashionable Rangoli

आइये एक नजर डालते है रंगोली के विभिन्न नामो पर जो भारत के विभिन्न राज्यों को प्रदर्शित करते है

उड़ीसा :  रंगोली को ‘ ओसा ‘केनाम से जानते है.

तमिलनाडु :  रंगोली को ‘कोलम’ के नाम से जाना जाता है.

केरला : फूलो द्वारा पुविदल – रंगोली ! (पोकलम ).

बंगाल : चावल के पेस्ट द्वारा रंगोली और  इसे अल्पना के रूप में जाना जाता है .

आंध्र प्रदेश :  रंगोली को ‘मुगू’ नाम दिया गया है .

अल्मोरा : गढ़वाल : रंगोली को ‘अल्पना ‘ के नाम से जाना जाता है .

कर्नाटका :  रंगोली को रंगोली के नाम से जाना जाता है .

राजस्थान : रंगोली को ‘मन्दाना’ के नाम से जाना जाता है .

तमिलनाडु : रंगोली को ‘कोलम’ के नाम से जाना जाता है.

महाराष्ट्र :  रंगोली को ‘रंग्वाल्ली ‘कहा जाता है .

गुजरात :  रंगोली को ‘साथिया’ कहा जाता है.

हमारे भारतीय संस्कृति, परम्परा, रिवाज और रंग हाथों में हाथ डाले चलते है और रंगोली आजकल के समय में सबसे खुबसूरत उदाहरणों में से एक हो गई है. यह एक प्राचीन परम्परा है और इसी रीति से यह ज्यादातर भारतियों द्वारा प्रयोग में लायी जाती है, इसलिए की ऐसा कहा जाता है की यह परिवारों में सकारात्मकता और सौभाग्य लाती है. यह रहनेवालों के लिए भी हृदयग्राही और चित्ताकर्षक माहौल बनाती है. जैसा की हम सब जानते है दिवाली बिना पटाखों, दीयों, रंगोलियों और दिवाली पूजन के अधूरी है. आप इनमें से किसी भी प्रकार के सुन्दर ढंगों की रंगोली बना सकते है या अन्यथा आप खुद की कल्पना से रंगोली बना सकते है. हम आपसभी को सुरक्षित और खुशहाल दिवाली की शुभकामनाएं देते है !!

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