विश्व रक्तदान दिवस (14 जून )

सम्पूर्ण विश्व में फैली हुई विश्व रक्तदान दिवस को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वर्ष 2004 में स्थापित किया गया था। वर्ष 1997 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 100 फीसदी स्वैच्छिक रक्तदान नीति की नींव डाली गयी।  जिसके तहत विश्व संगठन द्वारा यह लक्ष्य रखा था कि विश्व के प्रमुख 124 देश अपने यहाँ स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा दें। उस समय रक्त दान का उद्देश्य यह रखा गया कि सुरक्षित रक्त रक्त उत्पादों की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना और रक्तदाताओं के सुरक्षित जीवन रक्षक रक्त के दान करने के लिए उन्हें  प्रेरित करते हुए आभार व्यक्त करना है जो आज भी अपने संकल्प पर संकल्पित है। यह रक्तदान दिवस हर वर्ष 14 जून को सम्पूर्ण विश्व में मनाया जाता है। यह विश्व स्वास्थ्या संगठन सभा द्वारा 14 जून  को रक्तदान दिवस के रूप में घोषित किया गया है। वर्तमान  समय में रक्त की महिमा सभी जानते हैं। रक्त से आपकी ज़िंदगी तो चलती ही है साथ ही कितने अन्य के जीवन को भी बचाया जा सकता है। दुनिया के इस सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में अभी भी बहुत से लोग यह समझते हैं कि रक्तदान से शरीर कमज़ोर हो जाता है और उस रक्त की भरपाई होने में महिनों लग जाते हैं।

14 जून ही रक्तदाता दिवस क्यों – 

सम्पूर्ण विश्व में अक्सर बहुत कम लोग जानते हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रक्तदान दिवस को अग्रसर यानि आगे बढ़ाने) के लिए 14 जून को ही विश्व  रक्तदाता दिवस क्यों चुना। विश्वके विख्यात ऑस्ट्रियाई जीवविज्ञानी और भौतिकीविद के विद्वान  कार्ल लेण्डस्टाइनर के जन्म- 14 जून 1868 को हुआ था। इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के तहत कार्ल लेण्डस्टाइनर के जन्मदिन के अवसर पर यह दिन तय किया गया है और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वर्ष 2004 में स्थापित किया गया।

रक्तदान के सम्बन्ध में डॉक्टरों यानि चिकित्सकों के द्वारा मनुष्य शरीर पर प्रभाव –  

1 – रक्तदान के सम्बन्ध में डॉक्टरों द्वारा कहा जाता है कि , कोई भी स्वस्थ्य व्यक्ति जिसकी उम्र 16 से 60 साल के बीच हो, जो 45 किलोग्राम से अधिक वजन का हो और जिसे कोई भी बड़ी बीमारी न  हो  जैसे एचआईवी, हेपाटिटिस बी या हेपाटिटिस , वह रक्तदान कर सकता है।

2 – विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा को यह पता होना चाहिए कि मनुष्य के शरीर में रक्त बनने की प्रक्रिया हमेशा चलती रहती है और रक्तदान से कोई भी नुकसान नहीं होता बल्कि यह तो बहुत ही कल्याणकारी कार्य है जिसे जब भी अवसर मिले संपन्न करना ही चाहिए।

3 – किसी भी जातक को एक बार में जो 350 मिलीग्राम रक्त दिया जाता है, उसकी पूर्ति शरीर में चौबीस घण्टे के अन्दर हो जाती है और गुणवत्ता की पूर्ति 21 दिनों के भीतर हो जाती है। दूसरे, जो व्यक्ति नियमित रक्तदान करते हैं उन्हें हृदय सम्बन्धी बीमारियां कम परेशान करती हैं।

4 – रक्त की संरचना ऐसी है कि उसमें समाहित लाल रक्त कोशिकाएँ तीन माह में (120 दिन) स्वयं ही मर जाते हैं, लिहाज़ा प्रत्येक स्वस्थ्य व्यक्ति तीन माह में एक बार रक्तदान कर सकता है। जानकारों के मुताबिक आधा लीटर रक्त तीन लोगों की जान बचा सकता है।

5 – चिकित्सकों के मुताबिक रक्त का लम्बे समय तक भण्डारण नहीं किया जा सकता है।

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