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अष्टमी 2022 तिथि | अष्टमी कैलेंडर

हिंदू पंचांग की आठवीं तिथि को अष्टमी कहा जाता हैं। ये तिथि महिनें में दो बार आती है। पूर्णिमा के बाद और अमावस्या के बाद आती है। साथ ही पूर्णिमा के बाद आने वाली अष्टमी को कृष्ण पक्ष की अष्टमी और अमावस्या के बाद आने वाली अष्टमी को शुक्ल पक्ष की अष्टमी कहा जाता है। आइये अब देखना ये है कि अष्टमी कैलेंडर 2022 में कौन सी तिथि कब-कब आती है|

आइए जानते है इस साल के अष्टमी कैलेड़र 2022 की तिथियों के बारे में जो कुछ इस प्रकार है-

अष्टमी तिथि2022 दिनांकत्यौहार और व्रत
पौष शुक्ल अष्टमीसोमवार, 10 जनवरीबनाड़ा अष्टमी, मासिक दुर्गाष्टमी
माघ कृष्ण अष्टमीमंगलवार, 25 जनवरीकालाष्टमी
माघ शुक्ल अष्टमीमंगलवार, 8 फरवरीभीष्म अष्टमी, मासिक दुर्गाष्टमी
फाल्गुन कृष्ण अष्टमीगुरुवार, 24 फरवरीकालाष्टमी, जानकी जयंती
फाल्गुन शुक्ल अष्टमीगुरुवार, 10 मार्चमासिक दुर्गाष्टमी
चैत्र कृष्ण अष्टमीशुक्रवार, 25 मार्चशीतला अष्टमी, बासौदा, कालाष्टमी
चैत्र शुक्ल अष्टमीशनिवार, 9 अप्रैलमासिक दुर्गाष्टमी
वैशाख कृष्ण अष्टमीशनिवार, 23 अप्रैलकालाष्टमी
वैशाख शुक्ल अष्टमीसोमवार, 9 मईमासिक दुर्गाष्टमी, बगलामुखी जयंती
ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमीसोमवार, 23 मईकालाष्टमी (22 मई)
ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमीबुधवार, 8 जूनधूमावती जयंती, मासिक दुर्गाष्टमी
आषाढ़ कृष्ण अष्टमीमंगलवार, 21 जूनकालाष्टमी
आषाढ़ शुक्ल अष्टमीगुरुवार, 7 जुलाईमासिक दुर्गाष्टमी
श्रवण कृष्ण अष्टमीगुरुवार, 21 जुलाईकालाष्टमी (20 जुलाई)
श्रवण शुक्ल अष्टमीशुक्रवार, 5 अगस्तमासिक दुर्गाष्टमी
भाद्रपद कृष्ण अष्टमीशुक्रवार, 19 अगस्तजन्माष्टमी, दही हांडी, कालाष्टमी
भाद्रपद शुक्ल अष्टमीरविवार, 4 सितंबरराधा अष्टमी, मासिक दुर्गाष्टमी
अश्विन कृष्ण अष्टमीरविवार, 18 सितंबरअष्टमी श्राद्ध, जिवितपुत्रिका व्रत, कालाष्टमी
अश्विन शुक्ल अष्टमीसोमवार, 3 अक्टूबरदुर्गा अष्टमी
कार्तिक कृष्ण अष्टमीसोमवार, 17 अक्टूबरअहोई अष्टमी, कालाष्टमी
कार्तिक शुक्ल अष्टमीमंगलवार, 1 नवंबरगोपाष्टमी, मासिक दुर्गाष्टमी
मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमीबुधवार, 16 नवंबरकालभैरव जयंती
मार्गशीर्ष शुक्ल अष्टमीबुधवार, 30 नवंबरमासिक दुर्गाष्टमी
पौष कृष्ण अष्टमीशुक्रवार, 16 दिसंबरकालाष्टमी
पौष शुक्ल अष्टमीशुक्रवार, 30 दिसंबरबनाड़ा अष्टमी, मासिक दुर्गाष्टमी

अष्टमी 2022 पर महत्वपूर्ण त्योहार और उनकी पूजा विधि

बता दें कि हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दौरान दुर्गाष्टमी का उपवास किया जाता है। इस दिन श्रद्धालु दुर्गा माता की पूजा करते हैं और उनके लिए पूरे दिन का व्रत करते हैं। मुख्य दुर्गाष्टमी जिसे महाष्टमी कहते हैं, अश्विन माह में नौ दिन के शारदीये नवरात्रि उत्सव के दौरान पड़ती है। दुर्गाष्टमी को दुर्गा अष्टमी के रूप में भी लिखा जाता है और मासिक दुर्गाष्टमी को मास दुर्गाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है| कालाष्टमी और राधाष्टमी भी अष्टमी के सबसे महत्वपूर्ण पर्व हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी

श्री कृष्ण के जन्मदिवस को भक्त बड़े ही प्रेम भाव से कृष्ण जन्माष्टमी मनाते हैं। श्रीकृष्ण ने अपना अवतार भाद्र माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में लिया। चूंकि भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे अत: इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। आज श्री कृष्ण जन्माष्टमी कथा के बारे में जानते हैं।

मासिक दुर्गाष्टमी

मासिक दुर्गाष्टमी व्रत हर महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। बताया जाता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा करने का बहुत ही खास महत्व होता है। माना जाता है कि इस दिन सच्चे दिल और श्रद्धा से जो भी मांगते हो वो मनोकामना दुर्गा मां ज़रूर पूरा करती हैं

दुर्गाष्टमी

दुर्गाष्टमी

चैत्र नवरात्री मे अष्टमी का सबसे ज्यादा महत्व होता है| कहना है कि इसी दिन काली, महाकाली, भद्रकाली, दक्षिणकाली तथा बिजासन माता माता की पूजा करी जाती है। असल मे इन देवी को कुल की देवी कहा जाता है।

दुर्गाष्टमी की पूजा विधि

दुर्गाष्टमी वाले दिन पूरे विधि विधान से दुर्गाष्टमी पर व्रत रखने और पूजा करने से मनचाहा फल प्राप्त होता है. दुर्गाष्टमी वाले दिन सुबह उठकर जल्दी स्नान कर लेना चाहिए उसके बाद जहाँ आप पूजा करते हैं वहां पर गंगाजल डालकर उस जगह को शुद्ध कर लें। साथ ही लकड़ी के पाट पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर मां दुर्गा की प्रतिमा रखें| साथ ही धूप और दीपक को जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ पढ़ें और फिर मां की आरती करें उसके बाद हाथ जोड़कर प्रार्थना करें, दुर्गा मां आपकी सारी इच्छाओं को ज़रूर पूरा करेंगी

कालाष्टमी

महीने की कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी कहा जाता है। कृष्णपक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी या भैरवाष्टमी के रूप मनाया जाता है| आपको बता दें कि इस दिन लोग भगवान भैरव की भी पूजा भी करते हैं और व्रत भी रखते हैं. बताया जाता है कि इस व्रत में भगवान काल भैरव की उपासना कर दी जाती है| उनको शिव का पांचवा अवतार कहा जाता है. साथ ही इनके दो रूप होते है सबसे पहला बटुक भैरव, वहीं काल भैरव| बताया जाता है कि काल भैरव की पूजा करने से शनि और राहू जैसे ग्रह भी शांत हो जाते हैं. कालभैरव की पूजा करने से शत्रु बाधा और दुर्भाग्य दूर होता है और सौभाग्य जाग जाता है

राधाष्टमी त्योहार

राधाष्टमी त्योहार

भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधाष्टमी के नाम से जाना जाता है। राधाष्टमी के दिन श्रद्धालु बरसाना की ऊँची पहाडी़ पर स्थित गहवर वन की परिक्रमा करी जाती है। कहा जाता है कि इस दिन बरसाना में बहुत ज्यादा रौनक होती है। अलग-अलग प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। धार्मिक गीतों तथा कीर्तन के साथ इस उत्सव का आरम्भ किया जाता है।

अष्टमी में अन्य त्योहार

अष्टमी में और भी अनेक त्योहार होते है जिनको अलग-अलग नामो से जाना जाता है और इन त्योहारों के नाम कुछ इस प्रकार है – बनदा अष्टमी, भीष्म अष्टमी, जानकी जयंती, शीतला अष्टमी, अशोक अष्टमी, बगलामुखी जयंती, धूमावती जयंती, तुलसीदास जयंती, गोपाष्टमी, अष्टमी का बहुत महत्व होता है आपको बता दें कि अष्टमी को पूरे नियम के साथ और सच्चे मन से किया जाए तभी आपकी सारी मनोकामना पूरी होंगी।

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