अटल बिहारी वाजपेयी जन्मकुंडली

अटल बिहारी वाजपेयी जन्मकुंडली - Atal Bihari Vajpayee Kundli, Age, Birth

अटल बिहारी वाजपेयी कुंडली और राशिफल (ज्योतिषाचार्य सुनील बरमोला जी द्वारा)

नाम

:

अटल बिहारी वाजपेयी

जन्म तिथि

:

25 दिसंबर 1924

जन्म का समय

:

05:45 AM

जन्म स्थान

:

ग्वालियर ( मध्य प्रदेश )

भारत वर्ष को नई दिशा शक्ति को देने वाले एवं कविताओं के माध्यम से समाज को प्रफुलित करने वाले ऐसे महान पूजनियाँ आदरणीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का जन्म 25 दिस्ंबर 1924 को उनके कर्म और सत्य पुरुष होने के कारण एवं उनकी जमकुन्डली पर रिसर्च करने के बाद उनका जन्म समय प्रातः काल ठीक 5 बजकर 45 मिनट पर मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में हुआ था। ज्योतिष शास्त्र के द्वारा वाजपेयी जी का जन्म में ज्येष्ठा नक्षत्र व वृश्चिक लग्न वृश्चिक राशि में हुआ था। लग्नेश मंगल का कुंडली के राजयोग कारक ग्रहों में से एक शुभ फल दायी कुंडली के पंचम भाव में मीन राशि में विराज मान हो कर उपस्थित है।
अटल जी के जन्मकुंडली में अष्टकवर्ग के लग्न में ही सर्वाधिक 37 बिंदु हैं, जो अटल जी का व्यक्तित्व निखारने में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। इन्हीं प्रभावशाली श्रेष्ठतम बिंदुओं के फलस्वरूप भाग्येश एवं लग्नेश ने इन्हें भारत रत्न जैसे श्रेष्ठतम नागरिक सम्मान से अलंकृत किया। इन्हीं दशमेश चंद्रमा की अंतरदशा के मध्य उन्हें सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान से अलंकृत करने की घोषणा भी की गई।
वहीं द्वितीय भाव में सूर्य और पंचम भाव में विराजमान पृथ्वी पुत्र मंगल ने इन्हें अदम्य साहसी और शत्रुमर्दी बनाया। पंचम भाव के स्वामी शनि का लग्न में होना दत्तक संतान के योग भी बनाता है, जो इनके जीवन में कहीं-कहीं दृष्टिगोचर होता है। लेकिन गौर करें तो कुंडली में प्रमुख भूमिका निभाने वाले ग्रह जनता के कारक शनि, चंद्रमा राजनीति के कारक राहु मुख्य हैं। अटल जी का जीवन शनि राहु और चंद्रमा के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। शनि ने इन्हें जनप्रिय बनाया तो वहीं राजनीति में प्रखरता राहु के प्रभाव के चलते आई।

अटल बिहारी वाजपेयी जी की शिक्षा-दीक्षा –

अटल बिहारी वाजपेयी एक प्रसिद्ध भारतीय राजनेता हैं अटल बिहारी वाजपेयी जी ने अपनी प्राथमिक शिक्षा अपने जन्मस्थान से प्राप्त की और बाद में उन्होंने स्नातकोत्तर की पढ़ाई उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के डीएवी कॉलेज से राजनीति विज्ञान स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त किया और उसी दौरान 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल हो गए और राजनीती में अपना सहयोग देने लगे। जिन्होंने भारत वर्ष को एक शक्ति शैली देश बना कर भारत वर्ष को एक उँचाहियों तक पहुँचाने में अपने जीवन का सम्पूर्ण समय न्यौछावर किया अटल बिहारी वाजपेयी जो भारत के 10 वें प्रधान मंत्री थे।जनादेशों के माध्यम से भारत के प्रधान मंत्री पद पर कब्जा कर वह एकमात्र ऐसे प्रधान मंत्री बने जिन्होंने भारत वर्ष को इतना सशक्त किया की भारत वर्ष का नाम पुरे विश्व धरोवर में गूंजने लगा । प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के बाद श्री वाजपेयी प्रधान मंत्री रहे हैं जो दो बार लगातार चुनावों में विजयी हैं।

अटल बिहारी वाजपेयी का राष्ट्रीय कार्य-काल –

1996 में उन्होंने एक संक्षिप्त कार्यकाल के लिए प्रधान मंत्री के रूप में कार्य किया। बाद में 1 9 मार्च
1998 को उन्होंने भारत के प्रधान मंत्री के रूप में प्रभारी और फिर 13 अक्टूबर, 1999 को एक नई गठबंधन सरकार के प्रमुख रूप में लगातार दूसरे कार्यकाल, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन एक महान राजनेता होने के अलावा, वह अपने “मेरी संसद यात्रा” (चार खंडों में) “मेरी इक्कायन कवितायन” से स्पष्ट रूप से एक महान लेखक भी हैं। “संकल्प काल”, “शक्ति-से-शांति”, “भारत की विदेश नीति के नए आयाम” (1977-79 के दौरान विदेश मामलों के मंत्री के रूप में दिए गए भाषणों का संग्रह), “जन सांग और मुसलमान”, “संसद मीन किशोर दशक “(हिंदी) (संसद में भाषण – 1 9 57-199 2 – तीन खंड) और” अमर आग है “(कविताओं का संग्रह) 1 99 4। कारगिल में स्थिति को संभालने के बाद, भारतीय मिट्टी से घुसपैठियों को पीछे छोड़ दिया।

पुरस्कारों की एक लंबी सूची है-

1992 में पद्म विभूषण, लोकमान्य तिलक पुरुसुकर और भारत रत्न। 1 99 4 में सर्वश्रेष्ठ संसद के लिए गोविंद बल्लभ पंत पुरस्कार। 1993 में कानपुर विश्वविद्यालय ने उन्हें मानद डॉक्टरेट ऑफ फिलॉसफी के साथ सम्मानित किया। एक उत्साही पाठक और एक महान वक्ता के पास भारतीय संगीत और नृत्य की ओर एक प्राकृतिक प्रवृत्ति है

अटल बिहारी वाजपेयी की वर्तमान समय की स्थिति –

अटल बिहारी वाजपेयी के सेहत की बात करें तो इनकी कुंडली में मई 2018 के आरंभ से ही शनि की महादशा आरंभ हुई और इस समय साढ़ेसाती भी चल रही है। इसलिए शनि की साढ़ेसाती एवं दशा और बृहस्पति का गोचर इन्हें शारीरिक कष्ट प्रदान कर रहा है, जो कि अक्तूबर 2018 तक जारी रहेगा। वर्तमान समय में इन पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम 200 दिन पैनिक रहेगा क्योंकि मनुष्य के जीवन में चलने वाली 2700 दिन की साढ़ेसाती का अंतिम समय 200 दिन का वास प्राणी के गुदा स्थान पर रहता है, जो वर्तमान में वृश्चिक राशि वालो पर चल रहा है। किंतु यदि वृश्चिक राशि वालों पर किसी भी प्रकार से शनि की महादशा अंतरदशा, प्रत्यंतर दशा या सूक्ष्म दशा भी चल रही होगी तो उनके लिए यह समय अत्यंत कष्टकारक रहेगा। यह इतना कष्टकारक रहता है कि दशा समाप्ति के बाद भी मनुष्य उससे भयभीत रहता है।

उन्होंने कई कविताएं लिखीं और समय-दर-समय उन्हें संसद और दूसरे मंचों से पढ़ा भी. उनका कविता संग्रह ‘मेरी इक्वावन कविताएं’ उनके समर्थकों में खासा लोकप्रिय है. इस मौके पर पेश हैं, उनकी चुनिंदा कविता…

कदम मिलाकर चलना होगा

बाधाएं आती हैं आएं, घिरें प्रलय की घोर घटाएं |

पावों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं |

निज हाथों में हंसते-हंसते, आग लगाकर जलना होगा |

कदम मिलाकर चलना होगा.

हास्य-रूदन में, तूफानों में, अगर असंख्यक बलिदानों में |

उद्यानों में, वीरानों में, अपमानों में, सम्मानों में |

उन्नत मस्तक, उभरा सीना, पीड़ाओं में पलना होगा |

कदम मिलाकर चलना होगा.

उजियारे में, अंधकार में, कल कहार में, बीच धार में |

घोर घृणा में, पूत प्यार में, क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में |

जीवन के शत-शत आकर्षक,अरमानों को ढलना होगा |

कदम मिलाकर चलना होगा.

सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ, प्रगति चिरंतन कैसा इति अब |

सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ, असफल, सफल समान मनोरथ |

सब कुछ देकर कुछ न मांगते, पावस बनकर ढलना होगा |

कदम मिलाकर चलना होगा.

कुछ कांटों से सज्जित जीवन, प्रखर प्यार से वंचित यौवन |

नीरवता से मुखरित मधुबन, परहित अर्पित अपना तन-मन |

जीवन को शत-शत आहुति में, जलना होगा, गलना होगा |

क़दम मिलाकर चलना होगा.

 

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