चंद्र ग्रहण 2020: तिथि, प्रभाव, क्या करें और क्या नहीं

चंद्र ग्रहण (चन्द्र ग्रहण) तभी होता है जब चंद्रमा पृथ्वी के पीछे लंबवत दिशा में होता है ताकि पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़े। यह पूर्णिमा तीथि (पूर्णिमा) को होता है। 2020 में, चंद्र ग्रहण चार बार होता है।

2020 चंद्र ग्रहण तिथियां

इस साल के सभी उपच्छाया चंद्र ग्रहण हैं। साल का पहला चंद्र ग्रहण 10 जनवरी को था। दसरा चंद्र ग्रहण 5 जून को था उसके ठीक एक महीने बाद यानी 5 जुलाई को फिर से चंद्र ग्रहण का नजारा देखने को मिलेगा और साल का आखिरी चंद्र ग्रहण 30 नवंबर को दिखाई देगा।

खगोलीय घटनाओं के अनुसार, इस वर्ष में 6 ग्रहण पड़ेंगे। जून का महीना बहुत खास होता है; चूंकि इस महीने में दो ग्रहण हैं, चंद्र ग्रहण (05 जून) और सूर्य ग्रहण (21 जून)। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ये ग्रहण देश और दुनिया में अशांति की स्थिति पैदा कर सकते हैं।

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चंद्र ग्रहण के प्रभाव

आपको चंद्र ग्रह के समय बीज मंत्र ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः का 108 बार जाप करना होता है। इसके साथ-साथ चावल और सफेद तिल का दान करें साथ ही अपने से बड़ों का आशीर्वाद जरूर लें। क्योंकि यह उपच्छाया ग्रहण मंगल की राशि वृश्चिक और बुध ग्रह के नक्षत्र ज्येष्ठा में घटित हो रहा होता है तो ऐसी स्थिति में बुध से प्रभावित लोग जैसे की जो लोग कला, व्यापार, बैंकिंग, मीडिया और गायन करते हैं ऐसे लोगों को भगवान गणेश का ध्यान करना चाहिए और ग्रहण खत्म होने के बाद अन्न दान जरूर करें।

चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें

आप सभी को पता है कि सूर्य ग्राह की तुलना में चंद्र ग्रहण हानिकारक नहीं है क्योंकि हम चंद्र ग्रहण को आसानी से अपनी नग्न आँखों से देख सकते हैं। लेकिन हमें कुछ नियमों का पालन करने की आवश्यकता है जिनसे हम इससे किसी भी प्रभाव से छुटकारा पा सकते हैं।

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ग्रहण काल में क्या नहीं कर सकते है

  1. तेल लगाना, भोजन करना, जल पीना, सोना, बाल बनाना, संभोग करना, मंजन करना, कपड़े धोना, ताला खोलना आदि यह सब ग्रहण के समय नहीं करना चाहिए।
  2. भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने सालों तक वह नरक में रहता है।
  3. ग्रहण के समय पर सोने से व्यक्ति बीमार हो जाता है। मल त्यागने से पेट में कृमि रोग, मालिश या उबटन लगाने से कुष्ठ रोग और स्त्री प्रसंग से अगले जन्म में सूअर की योनि मिलती है।
  4. चंद्र ग्रहण में 3 घंटे पहले भोजन नहीं करना चाहिए। बूढ़े व्यक्ति, बच्चे और बीमार इंसान 1 घंटे पहले भोजन खा सकते हैं।
  5. ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूलों को नहीं तोड़ना चाहिए।
  6. स्कंद पुराण के अनुसार, ग्रहण के समय पर दूसरे का अन्न खाने से 12 सालों का एकत्र हुआ सारे पुण्य नष्ट हो जाता है।
  7. ग्रहण में कोई भी शुभ या नया काम शुरू नहीं करना चाहिए।

ग्रहण काल में क्या कर सकते है

  1. ग्रहण लगने से पहले स्नान करें और फिर भगवान की पूजा करें, इसके साथ-साथ यज्ञ और जाप करना चाहिए।
  2. ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरत मंदों को वस्त्र दान देने से पुण्य प्राप्त होता है।
  3. ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम जप अवश्य करें|
  4. स्नान करके उचित व्यक्ति को दान करने का विधान माना गया है।
  5. ग्रहण खत्म होने के बाद रखा हुआ पानी और अन्न फेंक देना चाहिए। उसके बाद नया भोजन पकाया जाता है और ताजा पानी भरकर पीया जाता है।
  6. सूर्य या चंद्र ग्रहण ग्रहण पूरा होने पर उसका शुद्ध बिम्ब देखकर ही भोजन करना चाहिए।
  7. ग्रहण काल में छूए हुए वस्त्र आदि की शुद्धि के लिए ग्रहण खत्म होने के बाद धो लेने चाहिए तथा खुद भी वस्त्रसहित स्नान कर लेना चाहिए।
  8. कुंडली में ग्रहों के पुरुषोचित संयोग के बुरे प्रभावों से छुटकारा पाने के लिए चंद्र ग्रहण के दौरान पूजा करें; जैसे ‘काल सर्प दोष‘।

हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण

हिंदू धर्म के अनुमार चंद्रग्रहण के पीछे राहु व केतु का प्रभाव होता है। समुद्र मंथन के दौरान देवताओं व दानवों के बीच अमृत पाने के लिए युद्ध चल रहा था। अमृत का सेवन देवताओं को करवाने के लिए भगवान विष्णु ने एक सुंदर कन्या का रूप धारण कर अमृत बांटने लगे। इसी के चलते एक असुर देवताओं के बीच में जाकर बैठ गया। उन्होंने जैसे ही अमृत को हासिल कर लिया तब भगवान सूर्य व चंद्रमा को इस बात का पता चल गया था। तब सूर्य व चंद्रमा ने इसकी जानकारी भगवान विष्णु को दी तो उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से उसकी गर्दन धड़ से अलग कर दी। अमृत पीने की वजह से वह मरा नहीं तथा उसका सिर व धड़ अलग होकर राहु तथा केतु नाम से प्रसिद्ध हो गए। इस घटना की वजह से राहु व केतु सूर्य और चंद्रमा को ग्रहण के रूप में लगते हैं।

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