चतुर्थी कैलेंडर २०२०

माना जाता है कि हिंदू पंचांग की चौथी तिथि को चतुर्थी कहा जाता हैं। यह तिथि महीने में दो बार आती है। एक पूर्णिमा के बाद और एक अमावस्या के बाद। बताया जाता है कि पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को कृष्ण पक्ष की चतुर्थी और साथ ही अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को शुक्ल पक्ष की चतुर्थी कहा जाता है। चतुर्थी साल में २४ बार आती है जिसकी सारी सुची आपको इस चतुर्थी कैलेंडर में देखने को मिलेगी|

चतुर्थी  तिथियां २०२०

आइए जानते है इस साल के चतुर्थी कैलेड़र २०२० की तिथियों के बारे में जो कुछ इस प्रकार है-

दिनांक पक्ष चतुर्थी
मंगलवार, १४ जनवरी कृष्ण पक्ष लोहड़ी
बुधवार, २९ जनवरी शुक्ल पक्ष
बुधवार, १२ फरवरी कृष्ण पक्ष द्विजप्रिया संकष्टी चतुर्थी
गुरुवार, २७ फरवरी शुक्ल पक्ष विनायक चतुर्थी
शुक्रवार, १३ मार्च कृष्ण पक्ष
शनिवार, २८ मार्च शुक्ल पक्ष विनायक चतुर्थी
शनिवार, ११ अप्रैल कृष्ण पक्ष विकट संकष्टी चतुर्थी
सोमवार, २७ अप्रैल शुक्ल पक्ष विनायक चतुर्थी
सोमवार, ११ मई कृष्ण पक्ष
मंगलवार, २६ मई शुक्ल पक्ष विनायक चतुर्थी
मंगलवार, ९ जून कृष्ण पक्ष
गुरुवार, २५ जून शुक्ल पक्ष
गुरुवार, ९ जुलाई कृष्ण पक्ष
शुक्रवार, २४ जुलाई शुक्ल पक्ष विनायक चतुर्थी
शुक्रवार, ७ अगस्त कृष्ण पक्ष हेरम्बा संकष्टी चतुर्थी
शनिवार, २२ अगस्त शुक्ल पक्ष गणेश चतुर्थी
रविवार, ६ सितंबर कृष्ण पक्ष चतुर्थी श्राद्ध
रविवार, २० सितंबर शुक्ल पक्ष विनायक चतुर्थी
मंगलवार, ६ अक्टूबर कृष्ण पक्ष
मंगलवार, २० अक्टूबर शुक्ल पक्ष विनायक चतुर्थी
बुधवार, ४ नवंबर कृष्ण पक्ष वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी, करवा चौथ
बुधवार, १८ नवंबर शुक्ल पक्ष नागुला चविथि, विनायक चतुर्थी
शुक्रवार, ४ दिसंबर कृष्ण पक्ष नौसेना का दिन
शुक्रवार, १८ दिसंबर शुक्ल पक्ष विनायक चतुर्थी

लोहड़ी

लोहड़ी 

लोहड़ी एक बहुत ही प्यारा और पंजाबी लोक महोत्सव है जिसे पंजाब में सिखों और हिंदुओं के द्वारा हर साल 13 जनवरी को मनाया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन पौष मास की अंतिम रात्रि और मकर संक्रान्ति की पूर्व संध्या होती है| किसान इस दिन रबी की फसल जैसे मक्का, तिल, गेहूँ, सरसों, चना आदि को अग्नि के पास समर्पण करते है साथ ही भगवान के सामने रख कर पूजते है|

आपको बता दें कि इस दिन लोग शाम के समय इस त्योहार को बहुत ही प्यार और भाईचारे के साथ मिलकर लोकगीत गाते है| साथ ही किसी खुली जगह पर लकड़ी और उपलों  से आग जलाकर उसके चारों तरफ उसकी परिक्रमा करते है| केवल इतना ही नहीं बल्कि इस दिन ढोल और नगाड़े भी बजाए जाते है इसके साथ-साथ डांस, भांगड़ा और गिद्दा भी आपको देखने को मिलता है. इस दिन आग के चारों तरफ बैठकर रेवड़ी, गजक और मूंगफलियों  का भी आंनद लिया जाता है| साथ ही इसे प्रसाद के तौर में सभी लोगो को बांटा जाता है| कहा जाता है कि जिस घर में नयी नयी शादी या बच्चे का जन्म होता है वहां पर खासतोर पर लोहड़ी के बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है.

कहा जाता है कि यह एक अन्य कहानी के अनुसार कंस ने भगवान् श्री कृष्ण को मानने के लिए लोहिता नामक राक्षसी को भेजा था जिसका वध कृष्ण ने खेल खेल में कर दिया था| माना जाता है कि लोहिता के वध की ख़ुशी में लोगो द्वारा लोहड़ी का त्यौहार मनाया जाता है| कहा जाता है कि लोहड़ी मनाने की मान्यता शिव और सती से भी जुड़ी हुई है| एक कथा के अनुसार माता सती के आग में समर्पित होने के कारण लोहड़ी के दिन अग्नि जलाई जाती है|

गणेश चतुर्थी

गणेश चतुर्थी

भारत एक ऐसा देश जहां पर अनेक प्रकार के त्योहार मनाए जाते है| यहां पर धार्मिक पहचान के साथ-साथ आपको संस्कृति भी जानने को मिलेगी। भारत एक ऐसा देश है जहां पर अलग-अलग त्योहार किसी न किसी रूप में मनाए जाते है। जैसे कि पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा आज पूरे देश में प्रचलित है उसी तरह महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी का उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है और अब देखा जाए तो पूरे देश भर में गणेश चतुर्थी को मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी का यह त्योहार लगभग दस दिनों तक चलता है जिसकी वजह से इसे गणेशोत्सव भी कहा जाता है। उसी के साथ-साथ आपको बता दें कि उत्तर भारत में गणेश चतुर्थी को भगवान श्री गणेश की जयंती के रूप में मनाया जाता है। आपको बता दे कि गणेश जी को ऋद्धि-सिद्धि व बुद्धि का दाता भी कहा जाता है। माना जाता है कि गुरु शिष्य परंपरा के चलते इसी दिन से विद्याध्ययन का शुभारंभ भी होता था। इस दिन को बच्चे डण्डे बजाकर खेलते भी हैं। इसी की वजह से कुछ क्षेत्रों में इसे डण्डा चौथ भी कहा जाता है।

गणेश प्रतिमा की स्थापना व पूजा

गणेश चतुर्थी वाले दिन स्नान आदि कर के गणेश जी की प्रतिमा बनाई जाती है। आपको बता दे कि ये प्रतिमा सोने, तांबे, मिट्टी या गाय के गोबर से अपने सामर्थ्य के अनुसार बनाई जाती है। इसके बाद एक साफ कलश लें और उसमे जल भरकर उसे साफ कपड़े से बांध लें। उसके बाद इसके ऊपर गणेश की मूर्ति की स्थापना की जाती है। बताते है कि इसके बाद मूर्ती पर सिंदूर चढ़ाकर षोडशोपचार कर के उसकी पूजा कि जाती है। गणेश जी को दक्षिण अर्पित कर उन्हें 21 लड्डूओं का भोग लगाया जाता है। गणेश कि मूर्ति के पास पांच लड्डू को रखा जाता है और बाकी ब्राह्मणों में बांट दिया जाता हैं। गणेश जी की पूजा शाम के समय में करनी चाहिये यह बहुत अच्छा माना जाता है। पूजा खत्म होने के बाद अपना नज़र नीची रखते हुए चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिये। साथ ही आपको बता दें कि इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन खिलाने के बाद उन्हें दक्षिणा भी देनी होती है।

करवा चौथ

करवा चौथ

देखा गया है कि भारत में हिंदू धर्मग्रंथों, पौराणिक ग्रंथों और शास्त्र आदि के अनुसार हर महीने कोई न कोई उपवास, कोई न कोई त्यौहार आदि आते ही है इसके साथ-साथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी वाले दिन जो उपवास रखा जाता है तो उसका सुहागिन स्त्रियों के लिये बहुत अधिक महत्व होता है। आपको बता दें कि इस दिन करवा चौथ का व्रत रखा जाता है। कहा जाता है कि इस दिन अगर सुहागिन स्त्रियां व्रत रखती है तो उनके पति की उम्र लंबी होती है साथ ही उनका गृहस्थ जीवन बेहद सुख होने लगता है। जबकि पूरे भारत देश में हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोग बड़ी ही धूम-धाम से इस त्यौहार को मनाते हैं साथ ही उत्तर भारत खासकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश आदि में तो आपको इस दिन बहुत ही अलग नजारा देखने को मिलता है। करवाचौथ वाले दिन कथाओं का दौर होता है उसी के साथ-साथ दूसरी तरफ जैसे ही दिन ढलते लगता है तभी विवाहिताओं की नज़रें चांद को देखने के लिये बेताब होने लगती हैं। औक जैसै ही चांद निकल जाता है वैसे ही आपने देखा होगा कि घरों की छतों का नजारा बहुत ही अलग होता है। आपको बता दें कि करवाचौथ का व्रत सुबह सूरज उगने से पहले ही 4 बजे के बाद शुरु हो जाता है और रात को चंद्र के दर्शन के बाद ही व्रत को खोला जाता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान श्री गणेश की पूजा की जाती है इसके साथ-साथ करवाचौथ व्रत की कथा भी सुनी जाती है।

चतुर्थी में अन्य त्योहार

चतुर्थी में और भी अनेक त्योहार होते है जिनको अलग-अलग नामो से जाना जाता है और इन त्योहारों के नाम कुछ इस प्रकार है – द्विजप्रिया संकष्टी चतुर्थी, विनायक चतुर्थी, विकट संकष्टी चतुर्थी, हेरम्बा संकष्टी चतुर्थी, चतुर्थी श्राद्ध, वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी, नागुला चविथि, और नौसेना के दिन का बहुत महत्व होता है आपको बता दें कि चतुर्थी को पूरे नियमों के साथ और सच्चे मन से किया जाना चाहिए|

अन्य महत्वपूर्ण तिथियां: पंचमी तिथि और षष्ठी तिथि