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शादी होने वाली है ? अपने अनुकूलता योग को जांचे

शादी होने वाली है ? अपने अनुकूलता योग को जांचे - Check Marriage Horoscope

शादी होने वाली है ? अपने अनुकूलता योग को जांचे

विवाह को हिन्दू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय माना जाता है. हिन्दू धर्म में , शादी केवल दो लोगों के बीच का संबंध नही होता बल्कि दो परिवारों के बीच का बंधन होता है. इस निष्कर्ष तक आने में बहुत सारे चीजो को जांचना परखना पड़ता है , शुरुआत जाति से की जाती है , पारिवारिक पृष्ठभूमि, पेशा, संस्कृति और बहुत कुछ. इन सब के बीच में कुंडली-मिलान सबसे जरूरी काम है जो ज्यादातर हिन्दू परिवारों द्वारा की जाती है.

अतः ये कुंडली-मिलान है क्या ? क्या ये उचित है ? क्या यह सच में आपके वैवाहिक-जीवन पर प्रभाव डालता है ? क्या इसके सिन्धांत विश्वास करने योग्य है?

हमारे पास आपके सारे सवालों के जवाब है !

कुंडली क्या है ?

वैदिक ज्योतिष प्रणाली के अनुसार व्यक्तिगत होरोस्कोप ( राशिचक्र ) बनता है. ये व्यक्ति के जन्म तिथि , जन्म समय और जन्म – स्थान पर जैसे कारकों पर निर्भर करता है. इन कारकों को ध्यान में रखते हुए कुंडली बहुत-से महत्वपूर्ण विशेषताओं के विस्तारपूर्वक उल्लेख जैसे राशिचक्र चिन्ह, नक्षत्र, प्रबल सितारे , वर्ण , गुना और भी बहुत कुछ से बनाया जाता है. किसी व्यक्ति के ग्रहों की स्थिति के गहन गणितीय गणना के विज्ञान से उस व्यक्ति का भविष्य पता चलता है.

विवाह कैसे ठीक की जाती है ??

विवाह के लिए दूल्हा और दुल्हन के कुंडलियों का गहन अध्ययन किया जाता है. गुण – मिलान की प्रक्रिया आठ भागों में एक-एक कर के जांची जाती है और कुछ निश्चित अंको के स्थिति पैदा की जाती है जिसे बाद में एकसाथ जोड़कर कुल गणना दी जाती है.

गणना अनुकूलता ऐसे जाती है –

अगर गुणों की संख्या 18 से नीचे है तो –  अगर गुणों के बीच की संख्या 18-24 हों तो युगल असंगत होते है – अगर दूल्हा-दुल्हन के गुणों की संख्या 25-32 है तो उनका विवाह औसत होता लेकिन वो स्वीकार्य है – विवाह के लिए चुनाव तब बहुत ही अच्छा हो जाता, जब गुणों की संख्या 32 से ऊपर हो – दूल्हा-दुल्हन एकसमान स्वाभाव के होते है और ये सबसे उत्तम जोड़ा होता है.

आइए, अब बात करते है 8 अलग-अलग जांचो के बारे में बात करते है.

राशिचक्र – मिलान जाँच

वर्ण (1 अंक ) – पेशेवर स्वाभाव और अनुकूलता को इंगित करता है. वास्य ( 2 अंक ) – आपसी स्नेह और जोडों के बीच को रोमांटिक लव को प्रकट करता है. तारा ( 3 अंक ) – जोडों की उम्र दर्शाता है. योनी ( 4 अंक) – आकर्षणशीलता और एक-दुसरे को संतुष्ट के सन्दर्भ में शारीरिक अनुकूलता को प्रदर्शित करता है. मैत्री ( 5 अंक ) – आपसी रूचि , पसंद और नापसंद के आधार पर जोडों के बीच मित्रता को बढ़ाने की योग्यता को प्रकाशित करता है. गण ( 6 अंक ) – व्यक्ति के आधारभूत स्वाभाव को दर्शाता है. भकूट ( 7 अंक ) – आपके लग्न पर आधारित भावात्मक अनुकूलता को प्रकट करता है.  नाड़ी ( 8 अंक)  – शारीरिक अनुकूलता और बच्चे पैदा करने की योग्यता को इंगित करता है.

इस तरह , यह योग 36 गुणों का होता है. आइए, देखते है यह गणना कैसे की जाती है.

गुण-मिलान गणना

गुण जाँच 1 – वर्ण जाँच

यह लोगों के आधारभूत गुणों और योग्यताओं को 4 श्रेणी में विभाजित करने पर निर्भर करता है. समझते है की ,आपके  राशि चिन्ह के अनुसार आप किस श्रेणी से संबंध रखते है.

ब्राह्मण और पुजारी – कर्क (cancer), वृश्चिक (scorpio) और मीन (pisces). क्षत्रिय या worriors – मेष (aries), सिंह (leo) और धनु (sagittarius). वैश्य या मर्चेंट – वृषभ (taurus), कन्या (virgo) और मकर (capricorn). क्षुद्र और laborers – मिथुन (gemini) , तुला (libra) और कुंभ (aquarius).

दूल्हा का वर्ण, दुल्हन के वर्ण से अधिक होना चाहिए. यह 1 अंक लायेगा अन्यथा 0 होगा.

गुण जाँच 2- वास्य जाँच

आप कौन-से वास्य है निर्भर करता है आपके राशि चिन्ह पर.

मानव (human)- मिथुन (Gemini), कन्या (Virgo), तुला (Libra), धनु (Sagittarius) की पहले 15 दशा, कुंभ (Aquarius). वनचर(wild) – सिंह (Leo). चतुष्पदा (Quadruped) – मेष (Aries), वृषभ (Taurus), धनु (Sagittarius) की दूसरी 15 दशा , मकर (Capricorn) की पहली 15 दशा. जलचर (Water) – कर्क (Cancer), मीन (Pisces) , मकर (Capricorn) की दूसरी 15 दशा. कीट (Insect) – वृश्चिक (Scorpio).

वास्य जाँच के 4 नियम है-

चतुष्पदा , मानव और जलचर समूह , वनचर समूह के वास्य है. चतुष्पदा, जलचर और कीट समूह, मानव समूह के वास्य है. जलचर चिन्ह मानव चिन्ह के भोजन होते है. चतुष्पदा चिन्ह वनचर चिन्ह के भोजन होते है.

इसलिए , आप यहाँ अपनी गणना कैसे तय करेंगे.

2 अंक – अगर दूल्हा-दुल्हन दोनों के पास एकसमान समूह है , उदाहरण के लिए – दोनों ही चतुष्पदा हों.

1 अंक – अगर किसी एक व्यक्ति का समूह वास्य हों , उदाहरण के लिए , अगर दुल्हन का समूह चतुष्पदा हो और दुल्हे का समूह मानव हो.

1/२ अंक – अगर एक व्यक्ति का समूह दुसरे का भोजन हो, उदाहरण के लिए, अगर दुल्हन जलचर हों और दूल्हा मानव हों.

0 अंक – अगर दुल्हन या दूल्हा में से कोई भी वास्य नही हो दुसरे के लिए.

गुण जाँच 3 – तारा जाँच

जन्म समय के आधार पर तारों को देखना. कुल 27 नक्षत्र होते है जिन्हें 3 समूह में और 9 श्रेणियों के रूप में विभाजित किया गया है.

ये 9 समूह है –

जन्म या जन्म तारासंपत , ताराविपत, ताराक्षेम या छेम ताराप्रत्यारी तारासाधक तारावध तारामित्र ताराअतिमित्र

तारा अंक दुल्हन के जन्म तारे से लेकर दुल्हे के जन्म तारे तक की गणना कर के बांटा जाता है और फिर इस अंक को 9 से विभाजित कर दिया जाता है. फिर वैसा ही काम दुल्हे के जन्म सितारे से लेकर दुल्हन के जन्म सितारे तक की गणना की जाती है.

3 अंक- अगर दोनों की गणना का शेष सम हो.

1.5 अंक – अगर सिर्फ एक की गणना का शेष सम हो.

0 अंक – अगर दोनों के ही गणना का शेष विषम हो.

गुण जाँच 4- योनी जाँच

आपके नक्षत्र तय करते है की आप कौन-से जानवर है. ये रोचक है.

अश्व (horse) – अश्विनी ,

शतभिषागज (Elephant) – भरणी,

रेवातिमेषा (Ram) – कृत्तिका,

पुश्यसर्प (Serpent) – रोहिणी,

मृगशिरास्वः (Dog) – आर्द्र,

मूलामर्जरह (Cat) – पुनर्वसु,

अश्लेशामुशिका (Rat) – माघ.प.

फाल्गुनीगौ (Cow) – उ.फाल्गुनी,उ.

भाद्रपदमहिष (Buffalo) – हस्त,

स्वातिव्याग्रह (Tiger) – चित्रा,

विशाखाम्रिग (Deer) – अनुराधा,

ज्येष्ठवानर (Monkey) – प.अषाढ़,

श्रवणनकुल (Mongoose) – उ.आषाढ़,

अभिजित्सिंह (Lion) – धनिष्ठ , प.भाद्रपद

प्राचीन ज्योतिष दूसरों के त्तरफ हर जानवर के व्यवहार पर प्रकाश डालते थे. इनमे से 5 व्यवहारिक श्रेणियां नीचे वर्णित है.

4 अंक – स्वाभाव योनी – संकेत देते है की ये जानवर एकसमान है. ऐसे विवाह उत्तम माने जाते है.

3 अंक – मैत्रीपूर्ण योनी – संकेत देता है की ये जानवर एक-दुसरे के तरफ मित्रतापूर्ण व्यवहार रखते है.

2 अंक – निष्पक्ष योनी – संकेत देते है ये जानवर एक-दुसरे के प्रति उदासीन होते है.

1 अंक – शत्रु योनी – संकेते देते है की ये जानवर आपस में शत्रु है.

0 अंक – कट्टर शत्रु योनी – संकेत देते है की ये जानवर कट्टर शत्रु है. ऐसा विवाह अत्यंत बुरा होता है.

गुण जाँच 5 – मैत्री जाँच

दूल्हा और दुल्हन के ग्रहों के सम्बन्ध पर निर्भर करता है. नीचे भगवान् के ग्रह दिए गए है.

सूर्य चंद्रमा मंगल बुध वृहस्पति शुक्र शनि

5 अंक- अगर दो ग्रह एकसमान हो या मित्र हों.

4 अंक- अगर एक ग्रह मैत्रीपूर्ण हो और दूसरा उदासीन हों .

3 अंक – अगर दोनों ही ग्रह उदासीन हों.

1 अंक – अगर एक ग्रह मैत्रीपूर्ण हो लेकिन दूसरा शत्रुतापूर्ण सोच रखता हों.

1/2 अंक – अगर एक ग्रह उदासीन हो लेकिन दूसरा उसे शत्रु के रूप में देखता हों.

कोई अंक नहीं – अगर दोनों ग्रह एक-दुसरे को शत्रु मानते हों.

गुण जाँच 6 – गण जाँच

समझे की नक्षत्र के हिसाब से आपकी क्या प्रकृति है.

देवता ( दानी, अध्यात्मिक, पुन्यशीलता प्रदर्शित करता हों, और भौतिकवादी ना हों) – अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्यमि, हस्त, स्वाति, अनुर्ध, सर्वांम, रेवतीमनुष्य और मानव ( अध्यात्मिक और भौतिकवाद के बीच में एकसमान संतुलित) – भरणी, रोहिणी, आर्द, पूर्व फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढा, पूर्व भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद, राक्षस या दानव ( हावी रहने वाला, स्वयं की चाहने वाले, अध्यातम की अपेक्षा बहुत अधिक भौतिकवादी ) – कृत्तिका, आश्लेषा, माघ, चित्रा, विशाका, जेष्ठ, मूला, धनिस्ता, शतभिषा.

अंको के लिए सयोंग नीचे दिए गये है.

6 अंक – अगर दूल्हा और दुल्हन एक ही गण से हों.

5 अंक – अगर दुल्हन मनुष्य हों और दूल्हा देवता.

3 अंक – अगर दुल्हन देवता और दूल्हा मनुष्य हों.

3 अंक – अगर दुल्हन मनुष्य हों और दूल्हा राक्षस हों.

1 अंक – अगर दुल्हन देवता हों और दूल्हा राक्षस हों.

0 अंक – अगर दुल्हन राक्षस हों और दूल्हा देवता हों.

0 अंक – अगर दुल्हन राक्षस हों और दूल्हा मनुष्य हों.

गुण जाँच 7 – भकूट जाँच

दूल्हा और दुल्हन के राशि के बीच की दुरी के अनुसार उनके आत्मीयता का स्तर निश्चित किया जा सकता है.

संभावित सयोंग और समूह नीचे दिए गये है.

सौभाग्यशाली ( दुखी भकूट ) : 1/1, 1/7, 3/11, 4/10.

असौभाग्यशाली ( दुष्ट भकूट ) : 2/12, 5/9, 6/8

अगर जोड़ा सौभाग्यशाली भकूट का निर्माण करते है तो उनका अंक 7 होगा अन्यथा वे कोई भी अंक नही पाएंगे जिसे भकूट दोष के रूप में जाना जाता है.

गुण जाँच 8 – नाड़ी जाँच

अपने नक्षत्र के हिसाब से देखिये की आप किस समूह में है.

अदि और वता – अश्विनी, आर्द्र, पुनर्वसु, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठ, मूल, शतभिषा, पूर्व भाद्रपदमध्य या पित्त – भरिणी, मृगशिरा, पुष्यमि, पूर्व फाल्गुनी, चित्रा, अनुर्ध, पूर्वाषाढ़ा, धनिस्था , उत्तरा भाद्रपदअन्त्य या कफा – कृतिका, रोहिणी, आश्लेषा, उत्तराषाढ़ा, माघ, स्वाति, विशाखा , उत्तराषाढ़ा, श्रावणी, रेवती.

जोडों की नाड़ी कभी भी एकसमान नही होनी चाहिए. अगर दोनों की नाड़ीया मिल जाती है तो उनसे जन्म लेने वाला बच्चा अस्वस्थ या अप्रकृत(असामान्य) होगा. इस स्थिति में मिलने वाला अंक शून्य होता है.

अगर जोडों की नाड़ी भिन्न है तो 8 अंक मिलते है.

यह थोड़ा लंबा और जटिल तो है लेकिन फिर भी रोचक है ! आप इसे एक बार खुद से प्रयास कीजिये . मजेदार है !

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