दिवाली – छठे दिन – भैया दूज / यम द्वितीय

भैया दूज – जैसा की नाम से ही पता चल रहा “भाई” मतलब भाई और “दूज” मतलब दूसरा , अर्थात भाई और बहन के बीच के बंधन का त्यौहार जिसे द्वितीय तिथि पर मनाते है.

नेपाल में, इसे भाई टीका के रूप में मनाते है, बंगाल में इसे भाई फोंता कहा जाता है, गुजरात , महाराष्ट्र और गोवा में इसे भाई बीज / भयैया बीज के नाम से जानते है.

2017 में शुभ समय

 

diwali 2017

भाई दूज टीका मुहूर्त = 1 बजकर 18 मिनट से 3 बजकर 38 मिनट

समय सीमा = 2 घन्टे 20 मिनट

द्वितीय तिथि आरम्भ = 21 अक्टूबर 2017 को 1 बजकर 37 मिनट पर

द्वितीय तिथि समाप्ति = 22 अक्टूबर 2017 को 3 बजकर 0 मिनट पर

 

भाई दूज के पीछे की दंतकथा

भाई दूज “यम द्वितीय” के नाम से भी जाना जाता है. ऐसी मान्यता है की इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने जाते है.

एक अन्य पौराणिक कथा में कहते है की कृष्ण द्वारा राक्षस नरकासुर के वध के बाद सुभद्रा ने अपने भाई कृष्ण का हार्दिक अभिनन्दन किया . उन्होंने श्री कृष्ण का स्वागत मिठाईयों और फूलों के साथ किया और कृष्ण के माथे पर तिलक लगाई.

भाई दूज की रस्में

भाई दूज की संध्या पर, बहनें अपने भाइयों के लिए तरह-तरह के व्यजंन और मिठाइयाँ बनाती है. अपने भाई के आने पर, बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारती है. बहनें अपने भाइयों के लंबी उम्र की प्रार्थना करती है.

बंगाल में, बहनें उपवास रखती है और अपने भाई के माथे पर घी, चन्दन और काजल से बना तिलक लगाती है. खीर और नारियल लड्डू इस त्यौहार के पारंपरिक मिष्ठान हैं.

आजकल , भाई और बहनों के बीच एकदूसरे को भेंट भी दी जाती है जो उनके आपस के प्रेम और स्नेह को दर्शाता है.

भाई दूज का महत्त्व :

यह दिन और यह परम्परा इस बात का व्यक्त करता है की भाई अपनी बहन की हमेशा रक्षा करेगा. साथ ही , यह भी दर्शाता है की बहनें अपने भाइयों की लंबी और खुशहाल जिंदगी की दिल से प्रार्थना करती है.

 

भाई दूज की ढेर सारी शुभकामनाये !!!!

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