दिवाली – लक्ष्मी पूजा, दिवाली पूजा और बंगाली काली पूजा

दिपावली दो शब्द “दीप” और “अवली” से आया है जिसका अर्थ है दीयों की एक क्रम या पंक्ति. 2017 में दिवाली 19 अक्टूबर को आ रहा है. दिपावली या दिवाली लक्ष्मी पूजा हिन्दू त्यौहारों में से सबसे प्रज्जवलित और महत्वपूर्ण त्यौहार है. उत्साह और तैयारियां बहुत दिनों से चलती रहती है जो अंत में चारों तरफ दीयों की रौशनी और चमक के रूप में दिपावली के दिन को लाती है. आतिशबाजियों की रौशनी , मिठाइयाँ, दीये और पुरे परिवार का एक साथ होना, हर तरफ लोगों की खुशियों और उमंगो को दुगुना कर देता है.

हर तरफ दीये की जगमगाहट अँधेरे के ऊपर रौशनी के विजय का प्रतीक है; जैसे बुराई के ऊपर अच्छाई की जीत और जीवन से सभी नकारात्मक प्रभावों के पूर्ण रूप से नाश होने का सूचक है.

दीपावली, कार्तिक माह के “अमावस्या” को आता है जब चंद्रमा की रौशनी पूर्ण रूप से विलुप्त होती है. परम्पराएँ और रिवाजें एक क्षेत्र के दुसरे क्षेत्र से भिन्न होती है.

शुभ समय / मुहूर्त्त 2017

 

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लक्ष्मी पूजा मुहूर्त्त = 19:39 से 20:26

समय सीमा = 0 घंटा 47 मिनट

प्रदोष काल = 17:59 से 20:26

वृषभ काल = 19:39 से 21:42

अमावस्या तिथि प्रारंभ = 00:13 – 19 अक्टूबर 2017

अमावस्या तिथि अंत = 00:41 – 20 अक्टूबर 2017

प्रदोषकाल में दिवाली पूजन के लिए सबसे शुभ मुहूर्त्त तब होता है जब स्थिर्लागना प्रबल हों. ऐसी मान्यता है की स्थिर्लागना के दौरान पूजा करने से देवी लक्ष्मी आपके घर में रहती है. वृषभलग्न को स्थिरलग्न मानते है.

दिवाली पर्व के पीछे की किवदंतियाँ

 

रामायण के संबंधित

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भगवान् राम अपने वनवास काल के दौरान दुष्ट राक्षस रावण के ऊपर विजय प्राप्त किये थे. जब भगवान् राम 14 वर्षो के वनवास के बाद अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटें तो अयोध्यावासियों ने इस दिन पुरे अयोध्या में घी के दीये जलाकर उत्सव मनाया. श्री राम के स्वागत के लिए लोगों ने फूल सजायें, अपने घरों को सजायें, हजारों दीये जलायें. यह परम्परा आजतक चली आ रही है और इस कारण हम दिवाली का उत्सव मनाते है.

पांडवो की वापसी

 

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महान ग्रन्थ “महाभारत्” के अनुसार, जब पांडव 13 वर्षों के वनवास के बाद लौटें तो वह दिन ‘कार्त्तिक अमावस्या’ था. जो लोग व्यग्रता से पांडवों की वापसी की राह देख रहे थे , उन्होंने इस दिन मिट्टी के दीये जलाकर उत्सव मनाया.

समुन्द्रमंथन् – भगवान् विष्णु और देवी लक्ष्मी का विवाह

 

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हिन्दू पुराण में कहा गया है, अमर होने के लिए अमृत प्राप्ति हेतु दानवों और असुरों द्वारा समुन्द्रमंथन किया गया है. समुन्द्रमंथन् के दौरान बहुत सारी दिव्य चीजें निकली. कार्त्तिक माह के अमावस्या के दिन, देवी लक्ष्मी का आगमन हुआ और उस रात भगवान् विष्णु ने देवी लक्ष्मी से विवाह किया. इस विवाह के मौके पर ढेरों दीये जलाकर इस पावन अवसर को स्मरणीय बनाया गया.

विष्णु – वामन अवतार

 

Baman avatar

भगवात पुराण के अनुसार, भगवान् विष्णु ने कार्त्तिक माह के इस दिन वामन अवतार लिया और राजा बलि को पराजित किया. राजा बलि को भगवान् ब्रह्मा से अजेय होने का वरदान प्राप्त था. बलि देवताओं के प्रति बहुत क्रूर थे, लेकिन वो एक बहुत-ही उदार व्यक्ति था जो अपने स्थान पर आये किसी भी व्यक्ति को खाली हाथ लौटने नहीं देता था. जब देवता उसे पराजित करने में सक्षम नही रहें तो उन्होंने भगवान् विष्णु से सहायता के लिए आग्रह किया. तब भगवान् विष्णु ने वामन अवतार लिया और बलि के सामने कुछ दान का प्रस्ताव रखा, भगवान् विष्णु ने 3 क़दमों में भूमि माँगा. महाबली ने वचन दे दिया. भगवान् विष्णु द्वारा छले जाने पर ,विष्णु ने विशाल रूप धारण कर लिया. अपने पहले कदम में उन्होंने समस्त आकाश को ढँक लिया , अपने दुसरे कदम में उन्होंने नर्क को ढँक लिया, जब वो अपना तीसरा कदम बढ़ाने वाले थे, महाबली ने उनके आगे अपना शीश झुका दिया , क्योंकि उन्हें यह अहसास हो गया की यह तीसरा पग समस्त धरती का नाश कर देगा. भगवान् विष्णु ने अपने तीसरा कदम बढ़ा कर बलि को धरती के भीतर धकेल दिया. महाबली को वरदान मिला की वर्ष में एक बार इस दिन को उस राजा के लिए याद किया जाएगा जिसने स्वयं को धरती के भलाई के लिए समर्पित कर दिया.

काली पूजा

 

Goddess Kali and Kali chaudas

कुछ मान्यताओं के अनुसार, ऐसा कहा जाता है की माँ काली जिस समय राक्षसों का वध कर रही थी, उन्होंने अपने नियंत्रण को खो दिया और अपने राह में आने वाले हर एक प्राणी का वध करना आरम्भ कर दिया.

तब भगवान् शिव को बीच में आकर उन्हें रोकना पड़ा. उसके बाद से, इस दिन को काली पूजा के रूप में भी मनाते है.

रस्में

  • पूजा के समय चढाये जाने वाले प्रसाद को व्यवस्थित कर लें.
  • मुहूर्त्त के समय के दौरान, भगवान् गणेश और देवी लक्ष्मी की मूर्ति के साथ माँ सरस्वती की प्रतिमा को भी पूजा स्थान पर रख लें.
  • संध्याकाळ में नए कपड़े पहन लें.
  • ऐसा देखा गया है की परिवार का कोई बड़ा या फिर कोई एक सदस्य इस दिन उपवास रखता है और संध्याकाल में दीये जलने के पश्चात् ही अपना व्रत तोड़ता है.
  • मिठाइयाँ और प्रसाद बनाएं.
  • घर के प्रवेशद्वार को वन्दनवार और रंगोली से सजाएं.
  • देवी लक्ष्मी के प्रवेश को दर्शाने के लिए छोटे-छोटे पदचिन्ह बनाये.
  • सूर्य उदय से पूर्व स्नान कर लें.
  • कलश को जल और दूब से भर लें.
  • उसमें घी से भरकर बड़े दीये को जला लें, जिसे रातभर जलना चाहिए.
  • कुमकुम, चन्दन
  • चावल
  • अगरबत्ती
  • लौंग
  • इलायची
  • सुपारी
  • पंचामृत
  • फल
  • कपूर
  • धूप
  • इत्र
  • सिक्के
  • फूल
  • प्रसाद
  • माला
  • बताशे
  • पीली सरसों
  • कमल गट्टा (कमल के बीज)
  • कमल के फूल
  • प्रतिलिपि (कॉपी) , कलम
  • मौली
  • भोजन के लिए – जैसे: हलवा पूरी , इत्यादि
  • पान के पत्ते
  • प्रसाद के साथ पूजा करें और फिर पान के पत्ते के ऊपर कपूर रख कर उससे आरती करें.

माँ लक्ष्मी की आरती

 

 ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता,

तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता.

ॐ जय लक्ष्मी माता.

उमा रमा ब्रहमाणी, तुम ही जग माता,

सूर्य चंद्रमा ध्यावत नारद ऋषि गाता.

ॐ जय लक्ष्मी माता.

दुर्गारूप निरंजनी, सुख सम्पति दाता,

जो कोई तुमको ध्यावत, रिद्धि सिद्धि धन पाता.

ॐ जय लक्ष्मी माता.

तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभ दाता,

कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भाव निधि की त्राता.

ओम जय लक्ष्मी माता.

जिस घर में तुम रहती, सब सद्गुण आता,

सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता.

ॐ जय लक्ष्मी माता.

तुम बिन यग्य ना होते, वस्त्र न कोई पाता,

खान-पान का वैभव सब तुमसे आता.

ॐ जय लक्ष्मी माता.

  • घर के बाहर और भीतर दीये जलायें.
  • देवी लक्ष्मी के लिए एक बड़ा घी का दीया पूरी रात के लिए जलाएं.
  • परिवार के बड़ों का आशीर्वाद लें और भोजन ग्रहण करें.

आप सबों को सुरक्षित और खुशहाल दिवाली की शुभकामनाएं !!

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