एकादशी तिथि 2021 | एकादशी कैलेंडर

हिंदू धर्म में एकादशी को आध्यात्मिक दिन माना जाता है और इसे आंशिक उपवास के द्वारा मनाया जाता है। मान्यता है कि हिंदू पंचांग की ग्यारहवी तिथि को एकादशी कहा जाता है| इस वर्ष २५ एकादशियां होगीं। यहाँ 2021 में आने वाली सभी एकादशी(एकादशी कैलेंडर 2021) की सूची दी गई है।

एकादशी तिथि 2021

2021 के सभी 25 एकादशियों की तिथियां; इस प्रकार है –

दिनांक पक्ष एकादशी
शनिवार, 09 जनवरी कृष्ण पक्ष सफला एकादशी
रविवार, 24 जनवरी शुक्ल पक्ष पौष पुत्रदा एकादशी
रविवार, 07 फरवरी कृष्ण पक्ष षटतिला एकादशी
मंगलवार, 23 फरवरी शुक्ल पक्ष जया एकादशी
मंगलवार, 09 मार्च कृष्ण पक्ष विजया एकादशी
गुरुवार, 25 मार्च शुक्ल पक्ष आमलकी एकादशी
बुधवार, 7 अप्रैल कृष्ण पक्ष पापमोचनी एकादशी
शुक्रवार, 23 अप्रैल शुक्ल पक्ष कामदा एकादशी
शुक्रवार, 07 मई कृष्ण पक्ष वरूथिनी एकादशी
शनिवार, 22 मई शुक्ल पक्ष मोहिनी एकादशी
05 – 06 जून कृष्ण पक्ष अपरा एकादशी
सोमवार, 21 जून शुक्ल पक्ष निर्जला एकादशी
सोमवार, 05 जुलाई कृष्ण पक्ष योगिनी एकादशी
मंगलवार, 20 जुलाई शुक्ल पक्ष देवशयनी एकादशी, आषाढ़ी एकादशी
बुधवार, 04 अगस्त कृष्ण पक्ष कामिका एकादशी
बुधवार, 18 अगस्त शुक्ल पक्ष श्रवणपुत्र एकादशी
शनिवार, 03 सितंबर कृष्ण पक्ष अजा एकादशी
शुक्रवार, 17 सितंबर शुक्ल पक्ष पारस एकादशी
शनिवार, 02 अक्टूबर कृष्ण पक्ष इंदिरा एकादशी
शनिवार, 16 अक्टूबर शुक्ल पक्ष पापांकुशा एकादशी
सोमवार, 01 नवंबर कृष्ण पक्ष रमा एकादशी
रविवार, 14 नवंबर शुक्ल पक्ष देवोत्थान एकादशी, प्रबोधिनी एकादशी
मंगलवार, 30 नवंबर कृष्ण पक्ष उत्पन्ना एकादशी
मंगलवार, 14 दिसंबर शुक्ल पक्ष मोक्षदा एकादशी
गुरुवार, 30 दिसंबर कृष्ण पक्ष सफला एकादशी

एकादशी का महत्व और निरीक्षण क्यों करना है

कहा जाता है कि एकादशी को हरी वासर के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत को वैष्णव और गैर-वैष्णव दोनों ही समुदायों के द्वारा मनाया जाता है| एकादशी व्रत में हवन, यज्ञ, वैदिक कर्म-कांड कराने से भी अधिक फल मिलता है। कहा जाता है कि यह व्रत रखने से हमारे पूर्वज या पितरों को स्वर्ग की प्राप्ति हो जाती है। स्कन्द पुराण में भी एकादशी व्रत के महत्व के बारें में बताया गया है। अगर कोई इस व्रत को रखता है तो उसे एकादशी वाले दिन गेहूं, मसाले और सब्जियों का उपयोग करना होता है।

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एकादशी व्रत के नियम

विष्णु - एकादशी व्रत

एकादशी व्रत रखने के बहुत ही कठोर नियम होते है| बताया जाता है कि जो लोग इस व्रत को रखते है वो लोग एकादशी तिथि से पहले सूरज उगने से लेकर अगले दिन सूरज उगने से पहले तक ये एकादशी उपवास रखते है। इस व्रत को किसी भी लिंग और आयु के लोग अपनी इच्छा के अनुसार रख सकते है।

एकादशी व्रत करने वाले लोगों को दशमी के दिन कुछ जरूरी नियमों का पालन करना होता है जो कि एकादशी के एक दिन पहले होती है। कहा जाता है कि दशमी वाले दिन से ही श्रद्धालुओं को मांस-मछली, प्याज, मसूर की दाल और शहद जैसे खाद्य-पदार्थों को नहीं खाना चाहिए। याद रखें कि आपको रात के समय भोग-विलास से दूर रहना होगा, साथ ही पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का भी पालन करना होता है।

आपको बता दें कि एकादशी वाले दिन आप दांत साफ़ करने के लिए लकड़ी के दातून इस्तेमाल नही कर सकते। यह इस्तेमाल करने की जगह आप नींबू, जामुन या फिर आम के पत्तों को लेकर चबा लें और अपने हाथों से अपने गले को साफ कर लें। इस दिन आप पेड़ के पत्ते को भी नहीं तोड़ सकते, इसीलिए आप वहां के आस पास गिरे हुए पत्तों का उपयोग करें और अगर आप पत्तों का इतज़ाम नहीं कर पाते है तो आप सादे पानी से कुल्ला कर लें। साथ ही नहानें के बाद आप मंदिर में जाकर गीता का पाठ पढ़ लें या अगर आप यह भी नहीं कर पाते है तो आप  पंडित जी होते है उनसे गीता का पाठ सुन सकते है। सच्चे और साफ मन से ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र जाप करें। भगवान विष्णु का स्मरण और उनकी पूजा करें। अगर आप दान करते है तो आप के लिए बहुत अच्छा होगा है साथ ही इसकी मान्यता भी बहुत होती है इसीलिए आप अपनी इच्छा के अनुसार दान करें।

एकादशी के बाद द्वादशी होती है, एकादशी के अगले दिन को द्वादशी माना जाता है । द्वादशी दशमी में कुछ भी अगल नही होता और यह भी बाकी दिनों की तरह ही होता है। कहा जाता है कि इस दिन सुबह – सुबह जल्दी नहाकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है इसके साथ – साथ रोज कि तरह खाना खाकर इस व्रत को पूरा लें। कहा जाता है कि ब्राह्मणों को मिठाई और साथ में दक्षिणा आदि देना अच्छा होता है। केवल ये याद रखें कि श्रद्धालु त्रयोदशी आने से पहले ही इस व्रत का पूरा कर लें। इस दिन ये कोशिश करें कि एकादशी व्रत का नियम का पालन करें और इसमे गलती से भी कोई चूक नहीं होनी चाहिए।

अन्य महत्वपूर्ण तिथियां: पूर्णिमा तिथिअमावस्या तिथि और संक्रांति तिथि

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