Home कैलेंडर एकादशी 2022 तिथि | एकादशी कैलेंडर

एकादशी 2022 तिथि | एकादशी कैलेंडर

एकादशी तिथियां हिंदुओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं; खासतौर पर वे जो इन दिनों व्रत रखते हैं। इस एकादशी कैलेंडर में आपको सभी 24 एकादशी 2022 तिथियां और मुहूर्त मिलेंगे।

एकादशी को हिंदू धर्म में बहुत ही शुभ दिन माना जाता है और यह भगवान विष्णु को समर्पित है। ग्यारहवें चंद्र दिन दो चंद्र चरणों (कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष) में से प्रत्येक को एकादशी कहा जाता है। हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार; इस साल 24 एकादशी मनाई जाएगी।

सभी एकादशी 2022 तिथियां, तिथि और समय नीचे दिए गए हैं।

एकादशीदिनांक और तिथिसमय (मुहूर्त)
पौष पुत्रदा एकादशी
वैकुंठ एकादशी
गुरुवार, 13 जनवरी
पौष, शुक्ल एकादशी
प्रारंभ – 04:49 PM, 12 जनवरी
समाप्त – 07:32 PM, 13 जनवरी
षटतिला एकादशीशुक्रवार, 28 जनवरी
माघ, कृष्ण एकादशी
प्रारंभ – 02:16 AM, 28 जनवरी
समाप्त – 11:35 PM, 28 जनवरी
जया एकादशीशनिवार, 12 फरवरी
माघ, शुक्ल एकादशी
प्रारंभ – 01:52 PM, 11 फरवरी
समाप्त – 04:27 PM, 12 फरवरी
विजया एकादशीशनिवार, 26 फरवरी
फाल्गुन, कृष्ण एकादशी
प्रारंभ – 10:39 AM, 26 फरवरी
समाप्त – 08:12 AM, 27 फरवरी
आमलकी एकादशीसोमवार, 14 मार्च
फाल्गुन, शुक्ल एकादशी
प्रारंभ – 10:21 AM, 13 मार्च
समाप्त – 12:05 PM, 14 मार्च
पापमोचनी एकादशीसोमवार, 28 मार्च
चैत्र, कृष्ण एकादशी
प्रारंभ – 06:04 PM, 27 मार्च
समाप्त – 04:15 PM, 28 मार्च
कामदा एकादशीमंगलवार, 12 अप्रैल
चैत्र, शुक्ल एकादशी
प्रारंभ – 04:30 AM, 12 अप्रैल
समाप्त – 05:02 AM, 13 अप्रैल
वरुथिनी एकादशीमंगलवार, 26 अप्रैल
वैशाख, कृष्ण एकादशी
प्रारंभ – 01:37 AM, 26 अप्रैल
समाप्त – 12:47 AM, 27 अप्रैल
मोहिनी एकादशीगुरुवार, 12 मई
वैशाख, शुक्ल एकादशी
प्रारंभ – 07:31 PM, 11 मई
समाप्त – 06:51 PM, 12 मई
अपरा एकादशीगुरुवार, 26 मई
ज्येष्ठ, कृष्ण एकादशी
प्रारंभ – 10:32 AM, 25 मई
समाप्त – 10:54 AM, 26 मई
निर्जला एकादशीशुक्रवार, 10 जून
ज्येष्ठ, शुक्ल एकादशी
प्रारंभ – 07:25 AM, 10 जून
समाप्त – 05:45 AM, 11 जून
योगिनी एकादशीशुक्रवार, 24 जून
आषाढ़, कृष्ण एकादशी
प्रारंभ – 09:41 PM, 23 जून
समाप्त – 11:12 PM, 24 जून
देवशयनी एकादशीरविवार, 10 जुलाई
आषाढ़, शुक्ल एकादशी
प्रारंभ – 04:39 PM, 09 जुलाई
समाप्त – 02:13 PM, 10 जुलाई
कामिका एकादशीरविवार, 24 जुलाई
श्रावण, कृष्ण एकादशी
प्रारंभ – 11:27 AM, 23 जुलाई
समाप्त – 01:45 PM, 24 जुलाई
श्रावण पुत्रदा एकादशीसोमवार, 8 अगस्त
श्रावण, शुक्ल एकादशी
प्रारंभ – 11:50 PM, 07 अगस्त
समाप्त – 09:00 PM, 08 अगस्त
आजा एकादशीमंगलवार, 23 अगस्त
भाद्रपद, कृष्ण एकादशी
प्रारंभ – 03:35 AM, 22 अगस्त
समाप्त – 06:06 AM, 23 अगस्त
पार्श्व एकादशीमंगलवार, 6 सितंबर
भाद्रपद, शुक्ल एकादशी
प्रारंभ – 05:54 AM, 06 सितंबर
समाप्त – 03:04 AM, 07 सितम्बर
इंदिरा एकादशीबुधवार, 21 सितंबर
अश्विना, कृष्ण एकादशी
प्रारंभ – 09:26 PM, 20 सितंबर
समाप्त – 11:34 PM, 21 सितंबर
पापंकुशा एकादशीगुरुवार, 6 अक्टूबर
अश्विना, शुक्ल एकादशी
प्रारंभ – 12:00 PM, 05 अक्टूबर
समाप्त – 09:40 AM, 06 अक्टूबर
रमा एकादशीशुक्रवार, 21 अक्टूबर
कार्तिका, कृष्ण एकादशी
प्रारंभ – 04:04 PM, 20 अक्टूबर
समाप्त – 05:22 PM, 21 अक्टूबर
देवउठना एकादशीशुक्रवार, 4 नवंबर
कार्तिका, शुक्ल एकादशी
प्रारंभ – 07:30 PM, 03 नवंबर
समाप्त – 06:08 PM, 04 नवंबर
उत्पन्ना एकादशीरविवार, 20 नवंबर
मार्गशीर्ष, कृष्ण एकादशी
प्रारंभ – 10:29 AM, 19 नवंबर
समाप्त – 10:41 AM, 20 नवंबर
मोक्षदा एकादशीशनिवार, 3 दिसंबर
मार्गशीर्ष, शुक्ल एकादशी
प्रारंभ – 05:39 AM, 03 दिसंबर
समाप्त – 05:34 AM, 04 दिसंबर
सफला एकादशीसोमवार, 19 दिसंबर
पौष, कृष्ण एकादशी
प्रारंभ – 03:32 AM, 19 दिसंबर
समाप्त – 02:32 AM, 20 दिसंबर

एकादशी का महत्व और निरीक्षण क्यों करना है

कहा जाता है कि एकादशी को हरी वासर के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत को वैष्णव और गैर-वैष्णव दोनों ही समुदायों के द्वारा मनाया जाता है| एकादशी व्रत में हवन, यज्ञ, वैदिक कर्म-कांड कराने से भी अधिक फल मिलता है। कहा जाता है कि यह व्रत रखने से हमारे पूर्वज या पितरों को स्वर्ग की प्राप्ति हो जाती है। स्कन्द पुराण में भी एकादशी व्रत के महत्व के बारें में बताया गया है। अगर कोई इस व्रत को रखता है तो उसे एकादशी वाले दिन गेहूं, मसाले और सब्जियों का उपयोग करना होता है।

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एकादशी व्रत के नियम

एकादशी व्रत रखने के बहुत ही कठोर नियम होते है| बताया जाता है कि जो लोग इस व्रत को रखते है वो लोग एकादशी तिथि से पहले सूरज उगने से लेकर अगले दिन सूरज उगने से पहले तक ये एकादशी उपवास रखते है। इस व्रत को किसी भी लिंग और आयु के लोग अपनी इच्छा के अनुसार रख सकते है।

एकादशी व्रत करने वाले लोगों को दशमी के दिन कुछ जरूरी नियमों का पालन करना होता है जो कि एकादशी के एक दिन पहले होती है। कहा जाता है कि दशमी वाले दिन से ही श्रद्धालुओं को मांस-मछली, प्याज, मसूर की दाल और शहद जैसे खाद्य-पदार्थों को नहीं खाना चाहिए। याद रखें कि आपको रात के समय भोग-विलास से दूर रहना होगा, साथ ही पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का भी पालन करना होता है।

आपको बता दें कि एकादशी वाले दिन आप दांत साफ़ करने के लिए लकड़ी के दातून इस्तेमाल नही कर सकते। यह इस्तेमाल करने की जगह आप नींबू, जामुन या फिर आम के पत्तों को लेकर चबा लें और अपने हाथों से अपने गले को साफ कर लें। इस दिन आप पेड़ के पत्ते को भी नहीं तोड़ सकते, इसीलिए आप वहां के आस पास गिरे हुए पत्तों का उपयोग करें और अगर आप पत्तों का इतज़ाम नहीं कर पाते है तो आप सादे पानी से कुल्ला कर लें। साथ ही नहानें के बाद आप मंदिर में जाकर गीता का पाठ पढ़ लें या अगर आप यह भी नहीं कर पाते है तो आप  पंडित जी होते है उनसे गीता का पाठ सुन सकते है। सच्चे और साफ मन से ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र जाप करें। भगवान विष्णु का स्मरण और उनकी पूजा करें। अगर आप दान करते है तो आप के लिए बहुत अच्छा होगा है साथ ही इसकी मान्यता भी बहुत होती है इसीलिए आप अपनी इच्छा के अनुसार दान करें।

एकादशी के बाद द्वादशी होती है, एकादशी के अगले दिन को द्वादशी माना जाता है । द्वादशी दशमी में कुछ भी अगल नही होता और यह भी बाकी दिनों की तरह ही होता है। कहा जाता है कि इस दिन सुबह – सुबह जल्दी नहाकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है इसके साथ – साथ रोज कि तरह खाना खाकर इस व्रत को पूरा लें। कहा जाता है कि ब्राह्मणों को मिठाई और साथ में दक्षिणा आदि देना अच्छा होता है। केवल ये याद रखें कि श्रद्धालु त्रयोदशी आने से पहले ही इस व्रत का पूरा कर लें। इस दिन ये कोशिश करें कि एकादशी व्रत का नियम का पालन करें और इसमे गलती से भी कोई चूक नहीं होनी चाहिए।

अन्य महत्वपूर्ण तिथियां: पूर्णिमा तिथिअमावस्या तिथि और संक्रांति तिथि

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