प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों में से एक, गंगा किनारे बसे बाबा काशी विश्वनाथ जी के भव्य ज्योतिर्लिंग का रहस्य

प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों में से एक, गंगा किनारे बसे बाबा काशी विश्वनाथ जी के भव्य ज्योतिर्लिंग का रहस्य

भुववाराणसीतु भुवनत्रया सारभूत

रम्या नृनाम सुगतिदाखिल सेव्यामना

अत्रगाता विविधा दुष्कृतकारिणोपि

पापाक्ष्ये वृजासहा सुमनाप्रकाशशः

काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मंदिर पिछले कई हजारों वर्षों से वाराणसी में स्थित है। काशी विश्‍वनाथ मंदिर का हिंदू धर्म में एक विशिष्‍ट स्‍थान है। ऐसा माना जाता है कि एक बार इस मंदिर के दर्शन करने और पवित्र गंगा में स्‍नान कर लेने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आदि शंकराचार्य, सन्त एकनाथ रामकृष्ण परमहंस, स्‍वामी विवेकानंद, महर्षि दयानंद, गोस्‍वामी तुलसीदास सभी का आगमन हुआ हैं। यहि पर सन्त एकनाथ जी ने वारकरी सम्प्रदाय का महान ग्रन्थ श्री एकनाथी भागवत लिखकर पुरा किया और काशी नरेश तथा विद्वतजनो द्वारा उस ग्रन्थ कि हाथी पर से शोभायात्रा खुब धुम-धाम से निकाली गयी।महाशिवरात्रि की मध्य रात्रि में प्रमुख मंदिरों से भव्य शोभा यात्रा ढोल नगाड़े इत्यादि के साथ बाबा विश्वनाथ जी के मंदिर तक जाती है। बाबा विश्वनाथ जी क मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थापित सबसे प्रसिद्ध हिन्दू मंदिरों में से एक है, जो भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर पवित्र नदी गंगा के पश्चिमी तट पर बना हुआ है और साथ ही भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहाँ भगवान शिव की मुख्य प्रतिमा को विश्वनाथ का नाम दिया गया है, जिसका अर्थ ब्रह्माण्ड के शासक से होता है।

kashinath jyotirling

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।

उज्जयिन्यां महाकालम्ॐकारममलेश्वरम्॥१॥

परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमाशंकरम्।

सेतुबंधे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥२॥

वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यंबकं गौतमीतटे।

हिमालये तु केदारम् घुश्मेशं च शिवालये॥३॥

एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।

सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥४॥

कहा जाता है की ज्योतिर्लिंग में ही भगवान शिव की आधा सच छुपा हुआ है, जिसे वे प्रकट भी हुए थे। सूत्रों के अनुसार शिव के 64 प्रकार है, लेकिन आपको ज्योतिर्लिंग के बारे में सोचकर ज्यादा विचलित होने की कोई जरुरत नही है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से सभी ज्योतिर्लिंग का अपना एक अलग नाम है।लेकिन भगवान के शिव के सभी ज्योतिर्लिंगों में उनका एक लिंग जरुर होता है जो उनके अनंत रूप  को दर्शाता है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग गुजरात के सोमनाथ, आंध्रप्रदेश के मल्लिकार्जुन, मध्यप्रदेश के उज्जैन के महाकालेश्वर, मध्यप्रदेश के ओम्कारेश्वर, हिमालय के केदारनाथ, महाराष्ट्र के भिमशंकर, उत्तर प्रदेश के वाराणसी के विश्वनाथ, महाराष्ट्र के त्रिंबकेश्वर, वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग, देवघर के देवगढ़, झारखण्ड, गुजरात के द्वारका के नागेश्वर, तमिलनाडु के रामेश्वरम के रामेश्वर और महाराष्ट्र के औरंगाबाद के ग्रिश्नेश्वर में है। काशी विश्वनाथ के मंदिर के पास गंगा नदी के किनारे पर बने मणिकर्णिका घाट को शक्ति पीठ के नाम से भी जाना जाता है, वहाँ लोग उर्जा पाने के लिए भी भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते है। कहा जाता है की सती देवी की मृत्यु के बाद भगवान शिव मणिकर्णिका से होते हुए ही काशी विश्वनाथ आए थे।

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