ज्येष्ठ अमावस्या व्रत – 2018 पूजा विधि व व्रत महत्व

अमावस्या के पश्चात चंद्र दर्शन से शुक्ल पक्ष का आरंभ होता है तो पूर्णिमा के पश्चात कृष्ण पक्ष की शुरूआत होती है। कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन जब चंद्रमा बिल्कुल भी दिखाई नहीं देता तो वह दिन अमावस्या का होता है। वैसे तो सभी अमावस्या धर्म कर्म के कार्यों के लिये शुभ होती हैं लेकिन ज्येष्ठ अमावस्या का विशेष महत्व है। जानें ज्येष्ठ(जेठ) अमावस्य का महत्व व व्रत पूजा विधि|

अमावस्या से प्रारंभ होने वाले पक्ष को शुक्ल पक्ष कहा जाता है, क्योंकि इस पुरे समय में चंद्रमा की रोशनी धीरे-धीरे बढती है जिसे एक वरदान के कारण चंद्रमा ने खो दिया था। शुक्ल पक्ष के बाद पूर्णिमा आती है और उसके बाद कृष्ण पक्ष जिसके 15 दिनों में चंद्रमा की रोशनी कम होती है और फिर अमावस्या आती हिन्दू धर्म में मौनी अमावस्या को बहुत ही शुभ माना जाता है जो की माघ के महीने में आती है। यहाँ हम आपको वर्ष 2018 में आने वाली सभी अमावस्या की तिथि और दिन बता रहे है।

अमावस्या तिथि आरंभ – 19:46 बजे (14 मई 2018)

अमावस्या तिथि समाप्त – 17:17 बजे (15 मई 2018)

ज्येष्ठ अधिक मास अमावस्या 13 जून बुधवार को है। 

ज्येष्ठ अमावस्या व्रत व पूजा विधि (JYESHTHA AMAVASYA VRAT POOJA VIDHI)

  • ज्येष्ठ अमावस्या का व्रत नर और नारी दोनों के लिए है
  • इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठे, नित्यकर्म से निवृत होकर पवित्र नदियों गंगा, यमुना अथवा सरोवरों में स्नान करे
  • सूर्य देव को अर्घ्य दे और प्रवहित धारा में तिल प्रवाहित करें
  • तत्पश्चात, पीपल वृक्ष में जल का अर्घ्य दे
  • शनि देव की पूजा तेल, तिल और दीप जलाकर करें
  • शनि चालीसा का पाठ करे तथा भगवान शनि देव की मंत्र जाप करें
  • यम देवता की पूजा भी की जाती है।
  • पूजा के पश्चात सामर्थ्यनुसार दान-दक्षिणा अवश्य देनी चाहिये।

ज्येष्ठ अमावस्या व्रत महत्व

ज्येष्ठ अमावस्या को न्याय प्रिय ग्रह शनि देव की जयंती के रूप में मनाया जाता है। शनि दोष से बचने के लिये इस दिन शनिदोष निवारण के उपाय विद्वान ज्योतिषाचार्यों के करवा सकते हैं। इस कारण ज्येष्ठ अमावस्या का महत्व बहुत अधिक बढ़ जाता है। इतना ही नहीं शनि जयंती के साथ-साथ महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिये इस दिन वट सावित्री व्रत भी रखती हैं। इसलिये उत्तर भारत में तो ज्येष्ठ अमावस्या विशेष रूप से सौभाग्यशाली एवं पुण्य फलदायी मानी जाती है।

अमावस्या को किसी भी कार्य को करने के लिए शुभ नहीं माना जाता लेकिन आध्यात्मिक तौर पर अमावस्या का खास महत्व होता है। इस दिन अपने पूर्वजों की पूजा करने और गरीबों को दान पुण्य करने से पापों का नाश होता है। बहुत से श्रद्धालू इस दिन पवित्र जल में स्नान करके व्रत भी रखते है। बहुत से लोग इसे स्नान-दान की अमावस्या के रूप में भी पूजते है। ऐसे तो सभी अमावस्या को एक ही रूप में जाना जाता है लेकिन सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है।

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