जानिये श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव की अद्भुद रहस्यमयी कथा

जानिये श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव की अद्भुद रहस्यमयी कथा - Krishna Janmashtami

जानिये श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव की अद्भुद रहस्यमयी कथा

श्री कृष्ण के जन्मदिवस को भक्त बड़े ही प्रेम भाव से कृष्ण जन्माष्टमी मनाते हैं। जानते हैं आज भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव की पौराणिक कथायें- हिन्दू धर्म के अनुसार इस चारा चार जगत में  एक बार ईश्वरीय माया से जिस कारागार की कोठरी में देवकी और वासुदेव कैद थे, अचानक एकदिन वह प्रकाशमान हो उठा और शंख, चक्र, गदाधारी भगवान विष्णु प्रकट हुए । उन्हें देख दोनों के सारे कष्ट दूर हो गए थे ।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी पौराणिक कथा :-

भगवान विष्णु ने कहा, वासुदेव मैं तुम्हारे संतान के रूप में जनम लूंगा और तुम मुझे अपने मित्र नन्द और यशोदा के पास वृंदावन छोड़ आना, साथ ही यशोदा की घर जन्मी बेटी को यहाँ ले आना और कंस को दे देना । दोनों ने उनके चरण छू आशीर्वाद लिए । और  वासुदेव ने वैसा ही किया जैसा उन्हें भगवान विष्णु ने करने को कहा था । जैसे ही देवकी ने नन्हे कृष्ण को जन्म दिया, वासुदेव उन्हें एक टोकरी में रख वृंदावन के लिए निकल पढ़े । वह दिन आलौकिक था, सारे कारागार के पहरेदार सो रहे थे । यमुना नदी में भयंकर तूफान था । ज्यूँ ही वासुदेव यमुना को पार करने लगे, नदी ने उन्हें रास्ता दे दिया । उस तूफान और बारिश के बीच नन्हे कृष्ण की रक्षा के लिए शेषनाग भी पहुँच गए ।  वह दृश्य अत्यंत अद्भुत था । भगवान् स्वयं पृथ्वी पर आये थे, दुष्टों के दमन के लिए ।

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वासुदेव ने नन्द और यशोदा के पास नन्हे कृष्ण को छोड़ा और उनकी नवजात बेटी को ले वृन्दावन से मथुरा की ओर चल पढ़े । उनके मन में भी तूफान उठा हुआ था । जैसे ही वह वापस कारागार में पहुंचे द्वार फिर खुल गए और बन्ध भी हो गए । कंस को ज्यूँ ही पता चला की आठवें संतान का जन्म हो चूका है, वह कारागार की तरफ भगा । कोठारी में पहुँचते ही उसने बच्ची को उठा कर दूर फेंकना चाहा , परंतु तभी उस बच्ची ने दुर्गा का रूप लिया और कंस को कहा – अरे मुर्ख, जो तेरा वध करेगा, वह जन्म लेकर वृंदावन में पहुँच चूका है। तेरा अंत अब समीप है।

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