नरसिम्हा जयंती – आधे मानव , आधे भगवान् शेर.

भगवान् नरसिम्हा को भगवान् विष्णु का सबसे अविश्वसनीय अवतार कहा जाता है. वह धरती पर इस अवतार में बुराई का नाश करने और अच्छाई लाने के लिए आये थे. यह हिन्दुओं के महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक है और यह शुक्ल पक्ष के 14वें दिन के वैशाख चतुर्दशी को मनाया जाता है. विष्णु भक्त इस दिन व्रत भी रखते है. भगवान् नरसिम्हा भगवान् विष्णु के चौथे अवतार थे. नरसिम्हा जयंती के दिन भगवान विष्णु राक्षस हिरण्यकश्यप के वध के लिए , नरसिम्हा आधे शेर और आधे मानव के रूप में अवतरित हुए थे.

 

मध्याहन संकल्प समय = 10 बजकर 58 मिनट से 1 बजकर 38 मिनट

नरसिम्हा जयंती सांयकाल पूजा समय = 4 बजकर 18 मिनट से 6 बजकर 57 मिनट

समय सीमा = 2 घंटे 39 मिनट

नरसिम्हा जयंती के लिए पारण का समय = 5 बजकर 38 मिनट से शुरू

पारण के दिन चतुर्दशी सूर्य उदय के पहले ही समाप्त हो जायेगा

चतुर्दशी तिथि आरंभ = 8 मई 2017 को 10 बजकर 16 मिनट से

चतुर्दशी तिथि समाप्ति = 10 मई 2017 को 1 बजकर 7 मिनट पर

 

नरसिम्हा जयंती के पीछे की पौराणिक कथा

 

narasimha jayanti

एक बार एक राक्षस था जो स्वयं की प्रशंसा करनेवाला भगवान् बन गया था. वह सोचता था की लोगों को नियंत्रित करने की उसकी शक्तियाँ और क्षमतायें उसे सर्वशक्तिमान के रूप में परिचित कराने के लिए काफी थी. उसने लोगों को स्वयं को उनका भगवान् मानने के लिए बलपूर्वक मजबूर किया और किसी भी अन्य भगवान् की पूजा करने की बजाय स्वयं की पूजा करने के लिए बाध्य किया. लोगों पर उसके द्वारा होने वाले अत्याचारों और शोषण की कहानियाँ हर कोई अच्छी तरह से जानता था. पूर्व में घोर तपस्या के कारण उसे भगवान् ब्रह्मा से वरदान प्राप्त था की ना ही उसे कोई जानवर मार सके और ना ही कोई मानव. उसे ना ही किसी हथियार द्वारा मारा जा सके और ना ही दिन में ना रात में.

पुरे राज्य में, केवल एक ही व्यक्ति था जो हिरण्यकश्यप के कहने की परवाह नही करता था और वो भगवान् विष्णु का महान भक्त था. और वह उसका स्वयं का पुत्र प्रह्लाद था. वह एक छोटा बालक था जो केवल 8 वर्ष का था, लेकिन फिर भी उसे अच्छे और बुरे की समझ थी.

उस दुष्ट ने कई बार अपने पुत्र की हत्या करने का प्रयास किया लेकिन हर बार भगवान् विष्णु ने अपने महान भक्त को बचा लिया. जैसा की हिरण्यकश्यप को वरदान प्राप्त था की उसे कोई मानव अथवा जानवर नहीं मार सकता, इसलिए भगवान् विष्णु ने एक ऐसा शरीर धारण किया जो मानव और जानवर युक्त था और उस दुष्ट का वध तब किया जब उसने अपने पुत्र की हत्या करने का अंतिम प्रयास किया. भगवान् विष्णु के इस अवतार को नरसिंह कहते है.

नरसिम्हा जयंती का महत्व

 

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जिस समय अवधि में भगवान् नरसिम्हा उस दुष्ट का विनाश करने के लिए धरती पर अवतरित हुए उसे अत्यधिक शुभ माना जाता है. इस समय को काफी लाभ देने वाला माना जाता है अगर हम नरसिम्हा व्रत करते है.

  • अच्छा स्वास्थ्य लाभ मिलता है और स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों का निवारण होता है.
  • यह हमें खतरों, दुष्टों और भूत-प्रेत से बचाता है.
  • यह एक महा अध्यात्मिक विकास और मोक्ष प्रदान करने वाला है.
  • यह सिद्धि और मोक्ष लाता है.
  • यह मुसीबत में शत्रुओं से बचाता है.
  • यह कोर्ट के मामलों में विजय दिलाता है.
  • यह शत्रुओं के ऊपर विजय प्राप्त करने में सहायता करता है.
  • यह बच्चों के अध्यात्मिक प्रेरणा में सहायता करता है.
  • यह मह्ताव्कांक्षी आय को स्थिर करता है.
  • यह पारिवारिक सौभाग्य और शांति के लिए काफी लाभदायक है.
  • यह हमें जीवन में सफलता और समृद्धि प्रदान करता है.

ज्योतिषीय महत्व

 

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इस दिन, चंद्रमा स्वाति नक्षत्र में रहेगा जिसपर राहू का स्वामित्व होगा और राशि में तुला पर शुक्र का राज होगा जो इस दिन का मालिक भी है. शुक्र , वृषभ में स्थित हो जाएगा जो की इसका एक अन्य राशि है. शुक्र अपना भाव मंगल और शनि से प्राप्त करता है. राहू जो की मालिक ग्रह है वो भी शनि से अपना भाव प्राप्त करता है. शुक्र , सूर्य के साथ अपना राशि योगदान करता है , राहू वृहस्पति और शनि के साथ इन ग्रहों में अपने भाव रखता है. इसलिए इस दिन, सभी ग्रहों की ताकत उपस्थित रहती है. यह अध्यात्मिक और भौतिकवादी लक्ष्य को साबित करने का उपयुक्त दिन है.

स्वाति नक्षत्र हवा की ऊर्जा को साथ रखता है जो मुक्त गतिविधि रखता है और कोई बंधन नहीं होता. अतः यह दिन आपको बिना किसी बंधन के मुक्त रूप से स्थान परिवर्तन करने की स्वतंत्रता देता है और आप अपनी सभी इच्छायें पूरी कर सकते है. यह एक बहुत ही बुद्धिजीवी नक्षत्र है, यह मानसिक बाधाओं में दरार खोजता है जो आपको सांसारिक सफलता प्राप्त करने से रोकता है, तो यह दिन इसके लिए प्रार्थना करने के लिए उपयुक्त रहेगा. भौतिक सफलता प्राप्त करने और हासिल करने के लिए स्वयं को  पवित्र करने के लिए आप अध्यात्मिक अभ्युदय की गहराई में भी प्रवेश करने का भी प्रयास कर सकते है.

यह दिन सभी नकारात्मक लक्षणों- ईर्ष्या, अहंकार, ज़िद्द, मनोग्रंथि इत्यादि जैसे आंतरिक गुणों को दूर करने के लिए सही है ,जो आपको जीवन में आगे बढने से रोकते है या आगे बढने में निरोधक है.

नरसिम्हा जयंती के रिवाज

 

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  • सबसे पहले, भक्तों को ब्रहम मुहूर्त्त में सुबह उठकर स्नान कर लेना चाहिए.
  • नए या साफ़ कपड़े पहनने चाहिए.
  • नरसिम्हा जयंती के दिन लोगों को उपवास रखना चाहिए और मंदिर के दर्शन करने चाहिए , चूंकि सकारात्मकता प्राप्त करने के लिए यह अत्यंत शुभ दिन होता है.
  • लोग अपने अपने घरों में भगवान् नरसिम्हा और देवी लक्ष्मी की पूजा करते है.
  • भक्त केवल हल्का भोजन लेते है और दूसरें दिन विसर्जनं पूजा करने और ब्राहमणों को दान देने के पश्चात् व्रत तोड़ते है.
  • नरसिम्हा जयंती के व्रत में सभी प्रकार के अनाज और धान्य खाने की मनाही होती है.
  • यह त्यौहार अगर स्वाति नक्षत्र के साथ शनिवार के दिन पड़ता है तो भक्त इसे अत्यंत शुभ मानते है.
  • चूंकि यह मान्यता है की हिरण्यकश्यप का वध करने के लिए भगवान् नरसिम्हा संध्याकाळ के दौरान प्रकट हुए थे इसलिए विशाका शुक्ल चतुर्दशी के दिन संध्याकाळ में भगवान् नरसिम्हा की पूजा की जाती है.
  • गुड़ और अंकुरित चना भगवान् को भोग लगाये जाते है.
  • भक्त , भगवद् पुराण में नरसिम्हा अवतार के बारे में पढ़ते है.
  • ऐसा विश्वास है की इस दिन गरीब और जरुरतमंदो को दान देने से बहुत ही अच्छे कर्म की प्राप्ति होती है.

भगवान् नरसिम्हा के मंत्र

भगवान् नरसिम्हा को पुष्प अर्पित करते हुए नीचें दिए मंत्र का जप करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त करने में सहायता मिलती है.

नीचें दिए मंत्र का 21 बार जप करें :

श्री नरसिम्हा जय नरसिम्हा जय जय नरसिम्हा

और

उग्रं विरम महा-विष्णुम्
ज्वालानतम सर्वतो मुखम
नर्सिम्हम भिशनम भद्रम्
मृत्युअर मृत्त्युम नमम यहाम

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