नवरात्रि हवन घर पर कैसे करें

नवरात्रि में मां दुर्गा के हवन का बहुत महत्व होता है। ज्यादातर दुर्गाष्टमी या महानवमी के दिन यह हवन किया जाता है। हवन करने से घर की नकारात्मक शक्ति खत्म हो जाती है। आपके आसपास सकारात्मक शक्ति का संचार हो जाता है। साथ ही घर का वातावरण भी शुद्ध हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं में माना जाता है कि घर में हवन करने से शुभता में वृद्धि हो जाती है। इस हवन में हम जिन औषधीय पदार्थों की यज्ञ या हवन में अग्नि को समर्पित की जानेवाली वस्तु देते हैं क्योंकि उनकी गंध से आसपास का वातावरण बहुत स्वच्छ हो जाता है। हवन एक वैदिक कर्मकांड है, जिसे आज भी लोग मानते है नवरात्रि में हवन किया जाता है।

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अब हम आपको नवरात्रि की हवन साम्रगी और हवन की विधि बताने जा रहे हैं, जिससे आप खुद घर पर हवन कर सकते हैं। दुर्गाष्टमी या महानवमी से एक दिन पहले आपको हवन साम्रगी को एकत्र करने की आवश्यकता है। आइए जानते हैं कि हवन करने में किन-किन चीजों की जरूरत होगी और इसकी विधि क्या होती है।

नवरात्रि हवन साम्रगी

आम की लकड़ी, तना और पत्ता, पीपल का तना और छाल, बेल, नीम, पलाश, गूलर की छाल, चंदन की लकड़ी, अश्वगंधा, ब्राह्मी, मुलैठी की जड़, कर्पूर, तिल, चावल, लौंग, गाय का घी, गुग्गल, लोभान, इलायची, शक्कर और जौ। इसके अलावा एक सूखा नारियल या गोला, कलावा या लाल रंग का कपड़ा और एक हवन कुंड।

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नवरात्रि हवन विधि

अष्टमी या नवमी की पूजा के चलते आप हवन कुंड को एक साफ स्थान पर स्थापित करना होगा। हवन सामग्री को एक बड़े पात्र में मिलाकर रख दें। इसके बाद आम की लकड़ी और कपूर को हवन कुंड में रखें और आग उज्जवल कर लें। इसके साथ आपको इन मंत्रों से हवन को शुरू होगा।

ओम आग्नेय नम: स्वाहा।
ओम गणेशाय नम: स्वाहा।
ओम गौरियाय नम: स्वाहा।
ओम नवग्रहाय नम: स्वाहा।
ओम दुर्गाय नम: स्वाहा।
ओम महाकालिकाय नम: स्वाहा।
ओम हनुमते नम: स्वाहा।
ओम भैरवाय नम: स्वाहा।
ओम कुल देवताय नम: स्वाहा।
ओम स्थान देवताय नम: स्वाहा।
ओम ब्रह्माय नम: स्वाहा।
ओम विष्णुवे नम: स्वाहा।
ओम शिवाय नम: स्वाहा।
ओम शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे।
सर्व स्थार्ति हरे देवि नारायणी नमस्तुते।।

इन मंत्रों के बाद आप एक गोला लें और इसे लाल कपड़े में लपेट लें या फिर गोले पर कलावा को बांध दें। फिर पान, सुपारी, लौंग, बतासा, पूरी, खीर या अन्य प्रसाद उस गोले पर रखकर हवन कुंड में बीच में स्थापित कर दें। और पूर्ण आहुति मंत्र का उच्चारण करें- ओम पूर्णमद: पूर्णमिदम् पुर्णात पूण्य मुदच्यते, पुणस्य पूर्णमादाय पूर्णमेल विसिस्यते स्वाहा।

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इसके बाद कुछ दक्षिणा स्वरूप रुपये माता के नाम से अर्पित करें। और फिर मां दुर्गा की आरती करना शुरू कर दें। फिर उस आरती को पूरे घर में ले जाएं और परिवार के सभी सदस्यों को इसमें शामिल कर लें। इस प्रकार आप हवन पूरी तरह से युक्त कर लेंगे।

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