नवरात्री पूजन विधि स्वयं करें |

नवरात्री पूजन विधि स्वयं करें | Navratri Vrat Katha

नवरात्री पूजन विधि स्वयं करें |

नवरात्री की रस्में बहुत ही मंगलकारी मानी जाती है जो देवी दुर्गा की सबसे प्रभावशाली शक्तियाँ हमें प्रदान करती है. आमतौर पर नवरात्री का त्यौहार उत्तरी भारत के लोगों द्वारा मनाया जाता है. यह नौ दिनों की पूजा बहुत ही पवित्र होती है जिसमें देवी के नौ रूपों की आराधना की जाती है. आजकल के व्यस्त दिनचर्या में आप नवरात्री के सभी मौलिक पूजा विधि को स्वयं ही अपने घर पर कर सकते है. पूजा सामग्री की विस्तृत सूची तथा पूजा की एक के बाद एक होने वाली विधि का नीचे वर्णन किया गया है.

नवरात्री के लिए पूजन सामग्री

Navratri Puja Vidhi at home

देवी दुर्गा का चित्र अथवा मूर्ति, सप्तशती किताब, एक लाल चुन्नी या साड़ी, एक कलश जल, आम के पत्ते और नारियल, ताजी दूब(घास) और फूल, चन्दन की रोली, तिलक के लिए लाल पवित्र पाउडर, लौंग, इलायची, सिन्दूर, अबीर, गुलाल, चावल, सुपारी, पान के पत्ते, पंचामृत, धुप, दीया, कपूर और माचिस, ताजे फल और मिठाइयाँ, झुवारा – नवरात्री के सबसे पहले दिन मिट्टी का चौड़े मुंह वाला एक बड़ा-सा मटका लें , उसमे थोड़ा बालू डालें और फिर उसमे जौ या सफ़ेद बीज जो एक रात पहले ही भिंगो कर रखा गया हों, उसे रोप दें. प्रति दिन उसपर हल्के-हल्के पानी के छींटे डाले और अंकुरित होने के लिए थोड़े समय के लिए सूर्य की रौशनी(धूप) में रखें.

क्रमशः पूजन विधि

घटा स्थापना

एक चौकी पर देवी दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें और मिट्टी के मटके में बोये हुए जौ को चौकी के नजदीक ही रखें. मुहूर्त्त के दौरान घटा स्थापना की जाती है.

घटा स्थापना मुहूर्त्त = 06:13 से 08:10
अवधि = 1 घंटा 56 मिनट

कलश स्थापित करें

कलश में जल भरें और फिर उसमे थोड़े पुष्प, एक सिक्का, और पांच आम के पत्ते डालें. ढक्कन से इसे ढँक कर उसके ऊपर थोड़ा कच्चा चावल रखें और फिर एक कच्चे नारियल को लाल कपड़े में लपेट कर चावल के ऊपर रखें. घटा स्थापना की विधि पूर्ण हुई.

देवी की पूजा

सबसे पहले मूर्ति के सामने एक दीप प्रज्जवलित करें. पंचोपचार के साथ कलश या घट की की पूजा करे. पंचोपचार अर्थात , पांच वस्तुओं से देवता की पूजा करना, जैसे- सुगंधी (इत्र) , पुष्प, धुप, दीपक तथा नैवेद्यं. इन पांच वस्तुओं को घड़े में उपस्थित देवताओं को अर्पित करें.

चौकी स्थापना

आपको देवी दुर्गा को स्थापित करने और उनका आह्वाहन करने की आवश्यकता है. इसके लिए, चौकी पर लाल रंग के कपड़े को बिछाएं. चारों तरफ से उसे मौली से लपेट दें. अब चौकी पर देवी दुर्गा की फोटो अथवा प्रतिमा स्थापित करें.

दुर्गा पूजा

कुछ जरूरी मंत्रोच्चार तथा प्रार्थना करें और देवी दुर्गा को आमंत्रित कर अपने घर को ज्योतिमान करने के लिए उनका आह्वाहन करें. लोग देवी से नौ दिनों तक अपने घर में रहने के लिए प्रार्थना करते है. देवी को पुष्प, चन्दन, सिन्दूर, भोग, दीप और भी बहुत कुछ अर्पित करने के साथ सामान्य पूजा की विधि समाप्त हो जाती है. पंचोपचार की विधि भी यहाँ की जाती है जहा आपको देवी को पांच वस्तुयें अर्पित करने की आवश्यकता होती है.

दुर्गा माता की आरती

पूजा की थाली और घंटी अपने हाथों में लें. आरती गायें तथा साथ ही घंटी भी बजाए. आरती पूर्ण होने के बाद , सबसे पहले आरती देवी दुर्गा को दें उसके बाद घट(कलश) और उसमें उपस्थित सभी देवताओं को दें. संध्याकाळ में पुनः आरती विधि को दुहराए. यह प्रक्रिया पुरे नौ दिनों तक जारी रखें. बहुत सारे लोग नौ दिनों तक व्रत रखते है और कुछ लोग प्रथम और अंतिम दिन ही व्रत रखते है.

नौ देवियों को प्रसाद के लिए निमंत्रित करें

नवरात्री के नौवें दिन , लोग स्वादिष्ट पकवान तैयार करके 5 से 12 वर्ष की नौ कन्याओं को जिन्हें देवी के नौ रूपों के रूप में आमंत्रित किया जाता है, उन्हें भोजन कराते है. यह विधि कन्यापूजन के नाम से जानी जाती है. भोजन के पश्चात्, वे उन्हें भेंट भी प्रदान करते है.

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