कभी न खत्म होने वाली निंद्रा से देवी दुर्गा का अभ्युदय

सप्तशती

देवी पूजन के नियमों की पवित्र किताब में देवी दुर्गा और नवरात्री के दौरान पालन किये जाने वाले पद्धितियो के बारे में कुछ रोचक तथ्यों की व्याख्या की गई है.

महाल्या के दिन से चार दिनों के भव्य दुर्गा पूजा की उलटी गिनती शुरू होती है. हिन्दू धर्म में, भद्रा में  नए चंद्रमा से पूर्ण चंद्रमा के होने तक के पंद्रह दिनों की अवधि को देवी काल या देवी पक्ष के नाम से जाना जाता है. हिन्दुओं का मानना है की यह अवधि किसी भी पवित्र कार्य को करने का उत्तम समय होता है.

Durga Puja on Navratri

परम्परानुसार, दुर्गा पूजा राजा सुरथा द्वारा वसंत ऋतु में की जाती थी. यही कारण है की इसे वसंत पंचमी के नाम से भी जानते है. पुराण के अनुसार, इस दिन भगवान् राम ने राक्षस रावण की हत्या करने के लिए लंका पर चढाई के पूर्व देवी दुर्गा की पूजा की थी. भगवान् राम ने देवी दुर्गा की पूजा पतझड़ काल (षष्ठी तिथि) में की थी जब सभी देवी-देवता निंद्रामग्न रहते है और इसी कारण इसे अकालिक पूजा या अकाल ‘बोधन’ के नाम से भी जानते है. उन्होंने यह पूजा देवी से सहायता प्राप्ति हेतु की थी, उन शक्तियों के लिए जो देवी के अधीन है. अति बलवान और दुष्ट राक्षस रावण को मारने के लिए इन शक्तियों की आवश्यकता थी. इसे अकाल बोधन के नाम से जाता है चूंकि यह वह समय था जब भगवान् राम ने देवी दुर्गा की आरधना की थी. ऐसा कहा जाता है की इस काल में देवी और देवता असुप्त अवस्था में होते है. यह अवधि पूस महीने में आती है और अषाढ़ के नौवें दिनों तक रहती है.

एक अन्य महत्वपूर्ण हिन्दू संस्कार जो की इस अवधि के दौरान आता है, वो पितृपक्ष है जैसे की इस काल में पितर लोगों का उदय होता हो. यह केवल पितर नही होते जो इस काल के दौरान संतुष्ट होते है बल्कि अन्य जीवित प्राणी जैसे एक-कोशिकीय जीव से लेकर वृक्ष तक इस अवधि में संतुष्ट होते है.

भगवान् राम ने शक्ति को जागृत करने के लिए यह महा पूजा षष्ठी तिथि में संध्या काल के दौरान की थी.

Durga Puja on Navratri

दुसरे दिन से ही ‘देवी पक्ष्या’ आरम्भ होता है. यह नौ दिनों की अवधि होती है जो नवरात्री के नाम से अधिक प्रसिद्ध है. यह नौ दिन, नौ देवियों और उनकी शक्तियों का निरूपण करते है.

प्रथम दिन नवरात्री : 21 सितम्बर 2017 (गुरुवार) – शैलपुत्री पूजा

द्वितीया दिन नवरात्री : 22 सितम्बर 2017 (शुक्रवार) – ब्रहाम्चारिणी पूजा

तृतीय दिन नवरात्री : 23 सितबंर 2017 (शनिवार) – चंद्रघंटा पूजा

चतुर्थ दिन नवरात्री : 24 सितंबर 2017 (रविवार) – कुष्मांडा पूजा

पंचम दिन नवरात्री : 25 सितंबर 2017 (सोमवार) – स्कंदमाता पूजा

षष्ठी दिन नवरात्री : 26 सितंबर 2017 ( मंगलवार) – कात्यायनी पूजा

सप्तमी दिन नवरात्री : 27 सितंबर 2017 (बुधवार) – कालरात्रि पूजा , सरस्वती आवाहन

अष्टमी दिन नवरात्री : 28 सितंबर 2017 (गुरुवार) – महागौरी पूजा , सरस्वती पूजा , दुर्गा अष्टमी , संधि पूजा

नवमी दिन नवरात्री : 29 सितंबर 2017 (शुक्रवार) – महा नवमी पूजा , सिद्धिद्त्री पूजा , महिषासुरमर्दिनी पूजा , नवमी होम

दशम दिन नवरात्री : 30 सितंबर 2017 (शनिवार) – विजयादशमी , दुर्गा विसर्जन , नवरात्री पारण. 

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