Home हिंदू त्योहार सावित्री व्रत विशेष – सावित्री और सत्यवान की सच्ची प्रेमकथा

सावित्री व्रत विशेष – सावित्री और सत्यवान की सच्ची प्रेमकथा

सतयुग काल में, एक राजा और रानी (सावित्री और सत्यवान) थे जिनकी कोई संतान नही थी. बहुत प्रयास के बाद, वे एक शक्तिशाली ऋषि के पास आये. उन्होंने राजा और रानी को एक पुत्र का वरदान दिया लेकिन बाद में पाया की दंपति को पूर्व जन्म में भगवान् द्वारा श्राप मिला हुआ है. अपने आशीर्वाद को निष्फल करने के लिए उन्होंने अपने वरदान को उपांतरित कर दिया ! पुत्र तो जन्म लेगा ; किन्तु अत्यंत कम समय के लिए जीवित रह पायेगा.

दुखी और हताश राजा और रानी अपने राजमहल में वापस आ गए. कुछ दिनों के पश्चात्, रानी ने एक अत्यंत सुन्दर और बुद्धिमान पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम ‘सत्यवान’ रखा गया. दुर्भाग्य ने राजा और रानी को पुनः पराजित किया और वे अपने राज्य को शत्रु द्वारा खो दिए. उन्होंने एक जंगल में रहना शुरू किया.

एक बार, एक सुन्दर राजकुमारी जिसका नाम सावित्री था , उस जंगल में भ्रमण के लिए आयी जहाँ उन्होंने एक सुन्दर नौजवान को लकड़ी काटते हुए पाया. वह उसके प्यार में पड़ गई और उसके बारे में पता करने लगी. हालांकि, राजकुमारी उसके अल्पायु होने के बारे में जानती थी, वो तुरंत ही अपने महल लौटी और उससे विवाह करने के लिए अपने माता-पिता से आग्रह की. वह दिन भी आया जब दो आत्माओं का मिलन हुआ और सावित्री और सत्यवान का विवाह हुआ.

सावित्री ने सभी ऐशोआराम का त्याग कर सत्यवान के साथ जंगल में जीवन व्यतीत करना आरंभ किया. अपने पति के शीघ्र मृत्यु के बारे में जानकर, उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ भगवान् शिव और देवी पार्वती की आरधना करना आरंभ किया. दिन बीतते गए, और फिर वह दिन आया जब सत्यवान को जाना था. सावित्री अपने पति के मृत्यु के भय से सदा अपने पति के साथ जंगल में उसके कार्य के दौरान साथ रहती थी. एक दिन, जब सत्यवान लकड़ी काट रहा था, उसके ह्रदय में तेज पीड़ा हुई और मृत्यु हो गई. सावित्री टूट गई जब उसने एक घने अंधकार छाया को समीप आते देखा और यह पाया की वह भगवान् यम थे. सावित्री ने यम से सत्यवान के जीवन को लौटा देने की याचना की. उसने कहा, “मेरे प्राणों को भी उनके साथ ले जाएँ अन्यथा मैं आपको उन्हें ले जाने नहीं दूंगी.” इससे भगवान यम प्रसन्न हुए और सावित्री को 3 इच्छाओं का वरदान दिया. सावित्री बचपन से ही अपने चालाक व्यवहार के लिए जानी जाती थी. हमेशा सही निर्णय लेने के लिए वो काफी होशियार और बुद्धिमान थी. नीचे उनकी 3 इच्छाएं दी गई है !!

 

 

  • पहला – उन्होंने पहले अपने सास-ससुर की आँखों की रौशनी मांगी. जब उन्होंने जंगल में रहना शुरू किया तब उसके बाद वे अंधे हो गये थे.
  • दूसरा – उसने सत्यवान के खोये हुए राज्य को वापस माँगा.
  • तीसरा – उसने आने वाले दिनों में अपनी 100 संतानों की मांग की.

भगवान् यम पहले से ही सावित्री से प्रभावित थे और इसी कारण वो उसकी तीनों इच्छाओ को मानने से हिचकिचाये नहीँ. तब उन्होंने कहा, “हे देवी! अब मुझे आपके पति की आत्मा को साथ ले जाने की आज्ञा दें.”

सावित्री मुस्कुराई और कहा,” हे देव ! आपने मुझे 100 पुत्रों को जन्म देने का वरदान दिया है. अब यह मेरे पति के बिना कैसे संभव है? “

 

 

भगवान् यम इस बात से चकरा(भ्रमित) गये, लेकिन जवाब में उन्होंने उन्हें 400 वर्ष सुख से जीने का वरदान दिया. उन्होंने कहा, “ भविष्य में , जो भी विवाहित स्त्री इस दिन उपवास रखेगी और बरगद के वृक्ष की पूजा करेगी , वो अपने पति की लंबी आयु का वरदान प्राप्त करेगी.”

अतः हम इससे क्या सीखते है ? सावित्री का अपने पति के प्रति समपर्ण और प्यार कुछ असंभव जैसा था. इसी प्रकार, जब हम किसी किसी कार्य को लेकर कड़ी मेहनत करते है तो उसमे सफलता प्राप्त होती है.

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