जानिये श्रावण पूर्णिमा क्यों है विशेष और क्यों मनाया जाता है श्रावण पूर्णिमा पर्व बड़े ही धूम धाम से

श्रावण पूर्णिमा का महत्व - श्रावण पूर्णिमा व्रत व पूजा विधि - Shravan Purnima

जानिये श्रावण पूर्णिमा क्यों है विशेष और क्यों मनाया जाता है श्रावण पूर्णिमा पर्व बड़े ही धूम धाम से

भारतीय धर्म ग्रंथों के अनुसार व अखंड ज्योतिष गणना के द्वारा हर माह के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि पूर्णिमा होती है। यह स्थिति चन्द्रमा की कलाओं पर निर्धारित दो पक्षों(अमावस्या व पूर्णिमा) में बंटी रहती है। धार्मिक रूप से पूर्णिमा तिथि बहुत ही सौभाग्यशाली मानी जाती है। इसलिये सम्पूर्ण विश्व में ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पूर्णिमा तिथि सर्वोपरी है।

क्यों पड़ा श्रावण पूर्णिमा नाम  –

भारतीय हिंदू पंचांग के अनुसार ज्योतिषशास्त्र में 27 नक्षत्र माने जाते हैं। इन्हीं नक्षत्रों में से एक नक्षत्र  है श्रवण। मान्यता है कि श्रावण पूर्णिमा को चंद्रमा श्रवण नक्षत्र में गोचररत होता है। इसलिये पूर्णिमांत मास का नाम श्रावण रखा गया और यह पूर्णिमा श्रावण पूर्णिमा कहलाती है।

श्रावण पूर्णिमा का महत्व –

हर माह की पूर्णिमाओं में से श्रावण पूर्णिमा की अपनी अलग ही विशेषता है। इस वर्ष यह दिन 26 अगस्त 2018  को आ रही है। इस दिन सम्पूर्ण भारत वर्ष में  भाई बहिनों का परम- पवित्र बंधन रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया जाता है। तथा अन्य कथाओं के अनुसार भारत के दक्षिण राज्यों में नारियली पूर्णिमा के रूप में मनाई जाती है। धार्मिक कथाओं के अनुसार इस दिन में किया गया जप-तप, दान-दक्षिणा के लिये यह तिथि श्रेष्ठ मानी ही जाती है।

श्रावण पूर्णिमा व्रत व पूजा विधि –

देखा जाय तो अपने रीती-रिवाजों के अनुसार हर राज्य इस पर्व को बड़े ही धूम धाम से मनाता है। परन्तु धार्मिक पर्व से जुड़ा यह दिन रक्षासूत्र बांधने या बंधवाने की परंपरा से जुड़ा है इस दिन बहिने भाई  की पूजा कर भाई की लम्बी उम्र व  बहिन की रक्षा के लिए पवित्र माना पर्व माना जाता है इस दिन हिन्दू व अन्य धार से जुड़े लोग भी इस रक्षा सूत्र बंधन पर्व को बड़े ही उत्साह से मानते है साथ ही सनातन धर्म से जुड़े लग भगवान विष्णु, भगवान शिव सहित देवी-देवताओं, कुलदेवताओं की पूजा कर ब्राह्मण से अपने हाथ पर पोटली का रक्षासूत्र बंधवाते हैं ।

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