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Amalaki Ekadashi 2022: आमलकी एकादशी में करें इन 7 नियमों का पालन, निष्फल नहीं होगा व्रत

आमलकी एकादशी का व्रत 14 मार्च दिन सोमवार को है. आमलकी एकादशी के दिन व्रत रखने और पूजा करने से स्वर्ग की प्राप्ति होती है. मृत्यु के बाद व्यक्ति को जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है. वह मोक्ष को प्राप्त करके श्रीहरि विष्णु (Lord Vishnu) के चरणों में स्थान पाता है. यदि आप आमलकी एकादशी व्रत रखते हैं, तो आपको कुछ नियमों का पालन करना होगा क्योंकि यह अन्य एकादशी व्रतों से थोड़ा सा भिन्न है. आइए जानते हैं आमलकी एकादशी व्रत के महत्वपूर्ण नियमों (Important Rules) के बारे में.

आमलकी एकादशी व्रत के नियम

  1. आमलकी एकादशी व्रत में आंवले के पेड़ के नीचे पूजा करने का विधान है. इस व्रत में आंवले के पेड़ की भी पूजा करते हैं. इस पेड़ में सभी देवताओं का वास होता है.
  2. आमलकी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के अवतार परशुराम जी की ​पूजा करते हैं. यदि आपके पास उनकी तस्वीर नहीं है, तो परेशान न हों, भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं.
  3. आमलकी एकादशी पूजा के समय आपको आंवला का भी भोग श्रीहरि को लगाना चाहिए. आंवले के पेड़ की उत्पत्ति के समय भगवान विष्णु ने कहा था कि यह पेड़ और इसका फल उनको अति प्रिय है.
  4. जो लोग आमलकी एकादशी व्रत रहेंगे, उनको भी आंवले का सेवन करना चाहिए. इस व्रत में आंवले को प्रमुखता दी गई है, इसलिए इसे आंवला एकादशी भी कहते हैं.
  1. पूजा के समय आमलकी एकादशी व्रत कथा का पाठ या श्रवण जरुर करना चाहिए. कोई भी व्रत उसके कथा के श्रवण के बिना पूर्ण नहीं माना जाता है क्योंकि उसका पाठ करने से उसके महत्व का पता चलता है.
  2. आमलकी एकादशी के दिन पवित्रता और सात्विकता का ध्यान रखें. पवित्रता का अर्थ मन, कर्म और वचन से है. मन में किसी से प्रति गलत भाव न रखें, दूसरों को बुरा न बोलें और न ही गलत कार्य करें.
  1. पूजा के समय आमलकी एकादशी व्रत कथा का पाठ या श्रवण जरुर करना चाहिए. कोई भी व्रत उसके कथा के श्रवण के बिना पूर्ण नहीं माना जाता है क्योंकि उसका पाठ करने से उसके महत्व का पता चलता है.
  2. आमलकी एकादशी के दिन पवित्रता और सात्विकता का ध्यान रखें. पवित्रता का अर्थ मन, कर्म और वचन से है. मन में किसी से प्रति गलत भाव न रखें, दूसरों को बुरा न बोलें और न ही गलत कार्य करें.
  1. पूजा के समय आमलकी एकादशी व्रत कथा का पाठ या श्रवण जरुर करना चाहिए. कोई भी व्रत उसके कथा के श्रवण के बिना पूर्ण नहीं माना जाता है क्योंकि उसका पाठ करने से उसके महत्व का पता चलता है.
  2. आमलकी एकादशी के दिन पवित्रता और सात्विकता का ध्यान रखें. पवित्रता का अर्थ मन, कर्म और वचन से है. मन में किसी से प्रति गलत भाव न रखें, दूसरों को बुरा न बोलें और न ही गलत कार्य करें.
  1. पूजा के समय आमलकी एकादशी व्रत कथा का पाठ या श्रवण जरुर करना चाहिए. कोई भी व्रत उसके कथा के श्रवण के बिना पूर्ण नहीं माना जाता है क्योंकि उसका पाठ करने से उसके महत्व का पता चलता है.
  2. आमलकी एकादशी के दिन पवित्रता और सात्विकता का ध्यान रखें. पवित्रता का अर्थ मन, कर्म और वचन से है. मन में किसी से प्रति गलत भाव न रखें, दूसरों को बुरा न बोलें और न ही गलत कार्य करें.
  3. इन नियमों के अतिरिक्त आप अन्य एकादशी व्रतों में जिन नियमों का पालन करते हैं, उनका पालन भी करना होता है. अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
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