जानें क्या छुपा है रहस्य, अयोध्या खुदाई में मिले खंभे, देखें तस्वीरें

मिले राम मंदिर के अवशेष और मजबूत हुई आस्‍था

कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन के बाद संपूर्ण देशवासियों की अपील पर सरकार ने रामायण का प्रसारण शुरू करवाया तो पूरे देश में भक्तिमय माहौल बन गया। अब अयोध्‍या को लेकर जो खबर आई उसे जानने के बाद भगवान राम के प्रति लोगों की आस्‍था और भी मजबूत हो गई है। यहां राम मंदिर निर्माण के लिए जमीन के समतलीकरण की प्रक्रिया में ऐसे अवशेष मिले हैं जो यहां पहले से मंदिर होने के दावे को और भी मजबूत करते हैं। य‍ह अवशेष राजा विक्रमादित्‍य के काल के बताए जा रहे हैं। आइए देखते हैं इनसे जुड़ी तस्‍वीरें और जानते हैं इस बारे में और गहराई से…

यह भी पढ़े: तेलंगाना के तिरुपति–लॉकडाउन में भी नहीं रुका हजार करोड़ की लागत वाले यदाद्री मंदिर का…

कलियुग में राजा विक्रमादित्‍य ने की थी अयोध्‍या की खोज

त्रेतायुग में अयोध्‍या की पावन धरती पर भगवान राम का जन्‍म हुआ था। कलियुग में माना जाता है राजा विक्रमादित्‍य ने सैकड़ों वर्ष पहले अयोध्‍या की खोज की थी और फिर यहां भगवान राम का भव्‍य मंदिर बनवाया था। माना जाता है कि राजा विक्रमादित्‍य भगवान राम के परम भक्‍त थे और उस काल में राम की जन्‍मभूमि को खोजकर उनका मंदिर बनवाने की चाह रखते थे।

तीर्थराज प्रयाग ने की मदद

अयोध्‍या से जुड़े महंत और संत बताते हैं कि तीर्थराज प्रयाग ने कलियुग में राम जन्‍मभूमि को खोजने में राजा विक्रमादित्‍य की मदद की थी। उन्‍होंने राजा को एक गाय दी और बोला कि गाय के थन से जहां पहुंचकर दूध निकलने लगे, समझ लेना वही भगवान राम की पावन धरती है। विक्रमादित्‍य गाय को लेकर चल दिए। अयोध्‍या पहुंचते ही गाय खड़ी हो गई और उसके थन से दूध बहने लगा। विक्रमादित्‍य को समझ आ गया है कि यही उनके राजा राम की धरती है।

विक्रमादित्‍य ने बनवाया भव्‍य मंदिर

अयोध्‍या की खोज करने के बाद राजा विक्रमादित्‍य ने यहां 84 कसौटियों के खंबे से यहां भगवान राम का भव्‍य और बहुत ऊंचा मंदिर बनवाया। बताते हैं कि यह मंदिर इतना ऊंचा था कि मुगल शासक बाबर जब पहली बार लखनऊ आया तो उसे वहां से ही यह मंदिर नजर आ गया था।

बाबर देखकर रह गया दंग

लखनऊ आकर बाबर ने जब पूर्व दिशा की ओर देखा तो उसे 2 चंद्रमा दिखाई दिए। उसने मीरबाकी से पूछा कि दिल्ली में तो मुझे एक ही चांद दिखता है मगर यहां 2 चांद कैसे दिख रहे हैं। तब उसे मीरबाकी ने बताया कि जिसे वह दूसरा चांद समझ रह हैं दरअसल वह अयोध्‍या स्थित राम मंदिर के शिखर पर लगी चंद्रकांत मणि है।

यह भी पढ़े: साप्‍ताहिक लव राशिफल : मई का आख‍िरी सप्‍ताह में प्‍यार के मामले में इन राशियों के लिए बेहद…

बाबर को आया लालच

ऐसी कथा है कि मणि को देखकर बाबर के मन में लालच आ गया और उसने मीरबाकी को 10 हजार सैनिक देकर मंदिर पर आक्रमण करने को कहा और मणि लाने को कहा। उस समय अयोध्‍या के लाखों लोगों के आगे मीरबाकी और बाबर की सेना ने घुटने टेक दिए। मगर काफी समय के बाद बाबर ने मीरबाकी को सेना के साथ भेजकर मंदिर को ध्‍वस्‍त करवा दिया। अब जो अवशेष मिले हैं वह बताया जा रहा है विक्रमादित्‍य द्वारा बनवाए गए इसी मंदिर के अवशेष हैं। अवशेष में सुदर्शन चक्र की कलाकृतियां, देवी-देवताओं की प्रतिमा और अमृत कलश, पुष्‍प कलश और ऊंचे-ऊंचे खंबे मिले हैं।